अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojna) के तहत जल-संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों की पहचान के मानदंड

‘पानी’ राज्य का विषय है और भूजल संसाधनों के उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी मुख्यतः संबंधित राज्य सरकारों की होती है। केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देकर पूरा करती है। इसी दिशा में जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) तथा अन्य केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए, सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के साथ, कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो समुदाय आधारित भागीदारी से भूजल प्रबंधन पर जोर देती है। यह अपनी तरह की पहली योजना है, जो भूजल संरक्षण के लिए मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों पर कार्य करती है तथा विकेन्द्रीकृत एवं अधिक प्रभावी जल शासन के लिए जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

जल शक्ति अभियान (JSA) वर्ष 2019 से देश में मिशन मोड और समयबद्ध कार्यक्रम के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को सामुदायिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाना है। इस अभियान के तहत देश के विभिन्न जिलों में 700 से अधिक जल शक्ति केंद्र (JSKs) स्थापित किए गए हैं, जो स्थानीय समुदाय के साथ संवाद और जल से संबंधित ज्ञान के प्रसार का कार्य करते हैं।

इस अभियान की गति को और मजबूत करने के लिए जल संचय जन भागीदारी पहल शुरू की गई है, जिसमें जन सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए स्थानीय स्तर पर कम लागत के कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं/बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट्स के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे भंडारण क्षमता बढ़ेगी और भूजल पुनर्भरण में मदद मिलेगी।

मनरेगा (MGNREGS) के तहत खेत तालाब, चेक डैम, पर्कोलेशन टैंक, कंटूर ट्रेंच, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इनसे जल उपलब्धता बढ़ाने और एक्विफर रिचार्ज करने में मदद मिलती है। इस योजना के तहत लगभग 60% संसाधन प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) पर खर्च होते हैं, जिसमें जल संरक्षण और पुनर्भरण गतिविधियां प्रमुख घटक हैं।

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) स्थानीय भूजल समस्याओं पर जन संवाद कार्यक्रम (PIP) और जन जागरूकता कार्यक्रम (MAP) आयोजित करता है, ताकि जनता को भूजल पुनर्भरण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा सके और सतत प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके।

अटल भूजल योजना फिलहाल 7 राज्यों — हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश — के 8,203 प्राथमिकता वाले ग्राम पंचायतों (GPs) में पायलट आधार पर लागू की जा रही है। इन राज्यों/ग्राम पंचायतों का चयन भूजल दोहन और गिरावट की स्थिति, कानूनी एवं विनियामक ढांचा, संस्थागत तैयारियां, भूजल प्रबंधन से संबंधित अनुभव और भागीदारी की इच्छा जैसे मानदंडों के आधार पर किया गया है। अंतिम चयन संबंधित राज्य सरकारों ने प्रशासनिक सुविधा और योजना की प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए किया है।

चूंकि यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर लागू हो रही है, इसलिए किसी भी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी गांव इस योजना के अंतर्गत शामिल हैं। इन जल-संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों की सूची (सातों राज्यों सहित कर्नाटक) इस लिंक पर उपलब्ध है:
https://ataljal.mowr.gov.in/WriteReadData/GeneralNotices/6ebd9724-a9b2-4bb1-a8d5-4843116c4e37_adbbde_Master_List_ABY_26072024.pdf

योजना के तहत प्रमुख गतिविधियां और कार्य:

31 मार्च 2025 तक अटल भूजल योजना के तहत राज्यों को जारी और उपयोग की गई निधि (राशि करोड़ रुपये में):

राज्य

जारी निधि

उपयोग निधि

गुजरात

595.57

470.61

हरियाणा

753.00

620.48

कर्नाटक

903.21

831.71

मध्य प्रदेश

211.75

193.89

महाराष्ट्र

643.82

609.59

राजस्थान

489.50

484.79

उत्तर प्रदेश

264.83

207.13

कुल

3861.68

3418.20

 

 

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