मीट बिक्री पर बैन: व्यापारियों और मजदूरों पर मंडराता संकट, PFI ने केंद्र से मांगा कैलेंडर

त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान अक्सर पूरे शहर या राज्य में मीट-चिकन की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, जबकि आयोजन कुछ ही स्थानों पर होते हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं को परेशानी होती है, बल्कि पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लाखों मजदूरों, किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मीट बिक्री के लिए एक स्पष्ट कैलेंडर बनाया जाए, ताकि अनावश्यक प्रतिबंधों से बचा जा सके।

बैन का व्यापार और मजदूरों पर प्रभाव

जब किसी शहर या क्षेत्र में मीट बिक्री पर प्रतिबंध लगता है, तो इसका असर पूरे सप्लाई चेन पर पड़ता है:

PFI की केंद्र सरकार से मांग

PFI ने केंद्रीय पशुपालन मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल को पत्र लिखकर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

राज्यों में हालिया विवाद

हाल ही में महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली, नागपुर और मालेगांव में 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर मीट बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया, जिसका व्यापारियों और विपक्षी नेताओं ने विरोध किया। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि “मांस खाने और स्वतंत्रता दिवस मनाने में क्या संबंध है?”  इसी तरह, भोपाल में 10 दिनों तक मीट बिक्री बंद रखने का आदेश जारी किया गया है, जिसमें जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और गांधी जयंती जैसे पर्व शामिल हैं।

मीट बिक्री पर अचानक लगने वाले प्रतिबंधों से उद्योग और मजदूर दोनों प्रभावित होते हैं। PFI की मांग है कि सरकार एक स्पष्ट नीति बनाए, ताकि व्यापारियों को पूर्व सूचना मिल सके और केवल आवश्यक क्षेत्रों में ही बंदी लागू हो। इससे राजस्व का नुकसान भी रोका जा सकता है और धार्मिक भावनाओं के साथ आर्थिक हितों का भी संतुलन बनाया जा सकता है।

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