25 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में फसलों को 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है, तो आने वाले महीनों में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, फिलहाल राज्य में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
कर्नाटक में 57 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल प्रभावित
कर्नाटक सरकार के ताजा आकलन के अनुसार, राज्य में लगभग 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसका आर्थिक नुकसान करीब 62,481.88 करोड़ रुपये आंका गया है। राज्य सरकार ने 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है।खास बात यह है कि अक्टूबर की शुरुआत में सरकार ने 177 तालुकों में करीब 46,324 करोड़ रुपये का नुकसान बताया था। बाद में अन्य इलाकों का सर्वेक्षण पूरा होने पर प्रभावित क्षेत्र और नुकसान का अनुमान दोनों बढ़ गए।
इससे साफ है कि Karnataka Drought का असर शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक गंभीर होता दिखाई दे रहा है। इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और अगली फसल की तैयारी पर पड़ सकता है।
सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाया संकट
कर्नाटक में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य के मुकाबले काफी कम बारिश दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मानसून सीजन में सामान्य रूप से लगभग 852 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन 2026 में केवल 551 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस तरह राज्य में लगभग 35 प्रतिशत बारिश की कमी रही। इसके अलावा मानसून के 122 दिनों में से 79 दिन ऐसे रहे, जब बारिश सामान्य से कम या बहुत कम हुई।
किसानों के लिए परेशानी केवल कम बारिश होना नहीं है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से मिट्टी की नमी लगातार घटती गई। जिन खेतों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं थी, वहां खड़ी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।
अरहर, मक्का, कपास और सोयाबीन की खेती प्रभावित
सूखे का असर कर्नाटक की कई प्रमुख खरीफ फसलों पर देखने को मिला है। विशेष रूप से अरहर, मक्का, कपास, सोयाबीन, मूंग और गन्ने की खेती प्रभावित हुई है। इसके अलावा प्याज, सुपारी और लाल मिर्च जैसी बागवानी फसलों को भी नुकसान हुआ है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च करने के बावजूद अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पा रहा है।
जिन किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया है, उन्हें अगली फसल की बुवाई के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटानी पड़ सकती है। सूखे के कारण पशुओं के चारे और पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
केंद्र सरकार से 20,585 करोड़ रुपये की सहायता मांगी
कर्नाटक सरकार ने सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत 20,585.73 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
राज्य सरकार का कहना है कि राहत राशि का उपयोग किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, पेयजल उपलब्ध कराने, पशुधन की सुरक्षा और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए किया जाना जरूरी है।
सरकार ने यह भी आग्रह किया है कि फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता की मौजूदा दरों की समीक्षा की जाए, क्योंकि खेती की लागत पहले के मुकाबले बढ़ चुकी है।
किसानों को 2,500 रुपये की शुरुआती राहत देने का फैसला
केंद्र से सहायता मिलने की प्रक्रिया के बीच कर्नाटक सरकार ने प्रभावित किसानों को अपने संसाधनों से शुरुआती राहत देने का फैसला भी किया है। सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए 2,500 रुपये प्रति किसान की प्रारंभिक सहायता की घोषणा की थी। इसके बाद जिला प्रशासन को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।हालांकि, किसानों को मिलने वाली कुल सहायता फसल नुकसान के आकलन, पात्रता और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेगी।
छोटे और सीमांत किसानों के सामने बड़ी चुनौती
कर्नाटक सरकार के अनुसार, सूखे से लगभग 61.91 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है। ऐसे किसानों के सामने केवल मौजूदा फसल का नुकसान ही समस्या नहीं है, बल्कि अगली बुवाई के लिए बीज, खाद और सिंचाई का इंतजाम करना भी चुनौती बन सकता है।
कृषि विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि जिन इलाकों में मिट्टी की नमी कम है, वहां किसान अगली फसल चुनने से पहले स्थानीय कृषि विभाग से सलाह लें। कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में उपयुक्त फसल और किस्म का चुनाव नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
अब किसानों को केंद्र की राहत का इंतजार
Karnataka Drought के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रभावित किसानों तक आर्थिक सहायता कितनी जल्दी पहुंच पाएगी। केंद्र सरकार की टीम अक्टूबर की शुरुआत में राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर चुकी है। अब राज्य सरकार ने बढ़े हुए नुकसान के आधार पर अधिक वित्तीय मदद मांगी है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के राहत संबंधी फैसले और राज्य में मुआवजा वितरण की प्रगति महत्वपूर्ण रहेगी। किसानों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि नुकसान का सही आकलन हो और सहायता समय पर मिले, ताकि वे आगामी रबी सीजन की तैयारी कर सकें।
