गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई के साथ खेत में सही मात्रा में खाद डालना भी जरूरी है। रबी सीजन में गेहूं की बुवाई की तैयारी करते समय किसान अक्सर डीएपी और यूरिया की खरीद पहले से शुरू कर देते हैं। ऐसे में खाद की सही पहचान, उचित मात्रा, गुणवत्ता, कीमत और इस्तेमाल के तरीके की जानकारी होना बेहद जरूरी है। बाजार में खाद खरीदते समय थोड़ी-सी लापरवाही से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, जरूरत से ज्यादा खाद खरीदने या बिना मिट्टी की जरूरत समझे इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ सकती है।
किसानों को यह समझना चाहिए कि डीएपी और यूरिया दोनों का काम अलग-अलग है। इसलिए केवल ज्यादा खाद डालने से गेहूं की पैदावार बढ़ने की गारंटी नहीं होती। खाद की खरीद से पहले खेत की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।
- डीएपी और यूरिया का अंतर समझकर करें खरीदारी
गेहूं की फसल में डीएपी और यूरिया का इस्तेमाल पौधों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है, लेकिन दोनों उर्वरकों की भूमिका अलग है। डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस होता है। यह फसल की शुरुआती बढ़वार और जड़ों के विकास में मदद करता है। वहीं, यूरिया नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है, जो पौधों की पत्तियों और तनों की बढ़वार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
किसानों को केवल इस आधार पर खाद नहीं खरीदनी चाहिए कि पिछले साल कितनी खाद इस्तेमाल की थी। खेत की मिट्टी, पिछली फसल, उपलब्ध पोषक तत्व और गेहूं की किस्म के अनुसार उर्वरकों की जरूरत बदल सकती है। इसलिए डीएपी और यूरिया की खरीद फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार करनी चाहिए।
- खाद खरीदने से पहले मिट्टी की जांच कराएं
खाद खरीदने से पहले मिट्टी की जांच कराना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है। मिट्टी की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की स्थिति कैसी है।
अगर खेत में किसी पोषक तत्व की पहले से पर्याप्त मात्रा मौजूद है, तो बिना जरूरत उस तत्व की अतिरिक्त खाद डालने से खेती की लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, किसी पोषक तत्व की कमी होने पर फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग या मिट्टी जांच प्रयोगशाला से संपर्क कर सकते हैं। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की मात्रा तय करने से अनावश्यक खर्च कम करने में मदद मिलती है।
- खाद की बोरी पर लिखी जानकारी जरूर पढ़ें
डीएपी और यूरिया खरीदते समय बोरी पर छपी जानकारी को ध्यान से पढ़ना चाहिए। किसानों को उर्वरक का नाम, पोषक तत्वों का विवरण, निर्माता या विपणन कंपनी का नाम, बैच नंबर, अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी और अन्य जरूरी विवरण देखना चाहिए।
डीएपी में सामान्यतः 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है। यूरिया में सामान्यतः 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। बोरी पर दिए गए विवरण से खाद की पहचान करने में मदद मिलती है।
यदि बोरी पर जरूरी जानकारी स्पष्ट नहीं है, पैकेट फटा हुआ है या खाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह है, तो उसे खरीदने से बचें। खाद खरीदते समय अधिकृत विक्रेता को प्राथमिकता दें।
- निर्धारित कीमत से ज्यादा पैसे न दें
खाद खरीदते समय किसान को बोरी पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य की जांच करनी चाहिए। सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री निर्धारित कीमत और लागू नियमों के अनुसार की जाती है। इसलिए दुकानदार द्वारा मांगी गई कीमत का मिलान बोरी पर लिखे मूल्य से करना जरूरी है।
यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे मांगता है या खाद के साथ जबरन दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए कहता है, तो किसान संबंधित कृषि विभाग या उर्वरक निरीक्षक से शिकायत कर सकते हैं।
खाद खरीदने के बाद पक्का बिल या रसीद जरूर लें। इससे खाद की कीमत, मात्रा और खरीद की तारीख का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। किसी विवाद की स्थिति में यह रसीद उपयोगी हो सकती है।
- खाद की किल्लत के डर से जरूरत से ज्यादा भंडारण न करें
गेहूं की बुवाई के समय कई किसान खाद की कमी की आशंका में एक साथ अधिक मात्रा में डीएपी और यूरिया खरीदने की कोशिश करते हैं। इससे घरेलू बजट पर दबाव पड़ सकता है और खाद के भंडारण में भी परेशानी हो सकती है।
किसानों को अपने खेत के रकबे और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खाद की जरूरत का अनुमान लगाना चाहिए। जितनी खाद की जरूरत हो, उतनी ही खरीदने की योजना बनाएं।
यदि खाद पहले से खरीदकर रखनी है, तो उसे सूखी, सुरक्षित और नमी से दूर जगह पर रखें। बोरियों को सीधे गीली जमीन पर न रखें और बारिश या पानी के संपर्क से बचाएं। खाद को बच्चों और पशुओं की पहुंच से दूर रखना भी जरूरी है।
- गेहूं की बुवाई के समय डीएपी का इस्तेमाल सोच–समझकर करें
गेहूं की बुवाई के समय फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए फास्फोरस की पर्याप्त उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए कई किसान बुवाई के समय डीएपी का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, डीएपी की मात्रा खेत की मिट्टी, उपलब्ध पोषक तत्वों और कृषि विभाग की अनुशंसित मात्रा के अनुसार तय होनी चाहिए। हर खेत में एक जैसी मात्रा डालना उचित नहीं है।
बुवाई के समय खाद का इस्तेमाल करते हुए यह भी ध्यान रखें कि बीज और उर्वरक के सीधे संपर्क से बचने के लिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताए गए तरीके अपनाए जाएं। खाद डालने की गलत विधि से बीज के अंकुरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों को केवल अधिक उत्पादन की उम्मीद में डीएपी की अतिरिक्त मात्रा नहीं डालनी चाहिए। संतुलित पोषण और सही कृषि प्रबंधन ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
- यूरिया की पूरी मात्रा एक साथ डालने से बचें
यूरिया गेहूं की फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने का प्रमुख स्रोत है। लेकिन इसकी जरूरत फसल की बढ़वार के अलग-अलग चरणों में होती है। इसलिए पूरी मात्रा एक साथ डालने के बजाय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित समय पर इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
यूरिया की मात्रा तय करते समय मिट्टी की जांच, सिंचाई की उपलब्धता, पिछली फसल और पहले डाली गई खाद को ध्यान में रखें। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर फसल में अनावश्यक बढ़वार हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में फसल के गिरने तथा रोगों की समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।
यूरिया को सही समय पर और उचित मात्रा में डालने से पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है। बारिश, सिंचाई और मिट्टी की नमी की स्थिति को देखते हुए खाद डालने की योजना बनानी चाहिए।
- केवल डीएपी और यूरिया पर निर्भर न रहें
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन और फास्फोरस के अलावा पोटाश, सल्फर और अन्य पोषक तत्व भी जरूरी हो सकते हैं। इनकी जरूरत खेत की मिट्टी और फसल की स्थिति पर निर्भर करती है।
इसलिए किसानों को यह नहीं मानना चाहिए कि डीएपी और यूरिया की अधिक मात्रा डालने से सभी पोषक तत्वों की कमी पूरी हो जाएगी। यदि मिट्टी में किसी अन्य पोषक तत्व की कमी है, तो उसका समाधान मिट्टी की जांच और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन से फसल की जरूरत पूरी करने और खेती की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
- खाद खरीदते समय बिल और रिकॉर्ड सुरक्षित रखें
किसानों को खाद खरीदते समय बिल लेना चाहिए और खरीदी गई बोरियों की संख्या का रिकॉर्ड रखना चाहिए। इससे यह हिसाब लगाने में आसानी होती है कि प्रति एकड़ कितनी खाद खरीदी गई और कितनी मात्रा खेत में इस्तेमाल हुई।
यदि किसान को खाद की गुणवत्ता, वजन या कीमत को लेकर शिकायत है, तो बिल और बोरी पर दर्ज जानकारी के आधार पर संबंधित विभाग से संपर्क करना आसान होगा।
खाद खरीदते समय अनजान स्रोतों से बिना बिल के उर्वरक लेने से बचना चाहिए। अधिकृत विक्रेता से खरीदारी करने पर शिकायत दर्ज कराने और खरीद का प्रमाण रखने में सुविधा होती है।
- खाद की खरीद का फैसला कृषि सलाह के आधार पर करें
खाद की खरीदारी करने से पहले किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से गेहूं की फसल के लिए अनुशंसित उर्वरक मात्रा की जानकारी लें। स्थानीय मिट्टी, जलवायु, सिंचाई और खेती की पद्धति के अनुसार खाद प्रबंधन में अंतर हो सकता है।
किसानों को बुवाई से पहले ही खाद की जरूरत का अनुमान लगाकर खरीदारी करनी चाहिए, ताकि ऐन वक्त पर परेशानी न हो। इसके साथ ही खाद की गुणवत्ता, निर्धारित कीमत और सही इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए।
किसानों के लिए क्या है जरूरी?
गेहूं की बुवाई से पहले डीएपी और यूरिया की खरीद केवल खाद की बोरियां जुटाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। किसानों को यह भी समझना जरूरी है कि किस खेत में किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है और उसे किस समय इस्तेमाल करना उचित रहेगा।
मिट्टी की जांच, अधिकृत विक्रेता से खरीदारी, बोरी पर दर्ज जानकारी की जांच, पक्का बिल और संतुलित उर्वरक इस्तेमाल जैसे कदम खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। वहीं, खाद की जरूरत से ज्यादा मात्रा खरीदने और इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
सही मात्रा में सही खाद का इस्तेमाल ही बेहतर गेहूं उत्पादन और खेती की लागत कम रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
