कोयला गैसीकरण में निवेश का सुनहरा अवसर: ₹37,500 करोड़ की योजना को उद्योग जगत का जबरदस्त समर्थन, 50 हजार रोजगार सृजन का लक्ष्य

Golden opportunity to invest in coal gasification:

Golden opportunity to invest in coal gasification: Strong industry support for ₹37,500 crore scheme, target to create 50,000 jobs

भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू कोयले के अधिक मूल्यवर्धित उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ₹37,500 करोड़ की सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण (Surface Coal/Lignite Gasification) योजना को उद्योग जगत से जोरदार समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में कोयला मंत्रालय ने सोमवार को इस योजना के लिए प्री-एप्लिकेशन कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी कंपनियों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं और संभावित निवेशकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज़ कुमार झा ने की। सम्मेलन में विभिन्न कंपनियों और निवेशकों द्वारा योजना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय और प्रक्रियागत पहलुओं पर अनेक प्रश्न पूछे गए, जिनका मंत्रालय के अधिकारियों ने विस्तार से उत्तर दिया। इस सम्मेलन में मिली उत्साहजनक भागीदारी से स्पष्ट संकेत मिला कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में उद्योग जगत की गहरी रुचि है और आने वाले वर्षों में यह भारत के ऊर्जा एवं रासायनिक उद्योग के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकती है।

स्वच्छ ऊर्जा और मूल्यवर्धित उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम

भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन लंबे समय तक कोयले का उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन तक ही सीमित रहा है। अब सरकार का उद्देश्य इस प्राकृतिक संसाधन का अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल उपयोग सुनिश्चित करना है। इसी सोच के तहत सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए यह विशेष योजना तैयार की गई है।

कोयला गैसीकरण एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें ठोस कोयले को नियंत्रित परिस्थितियों में गैस में परिवर्तित किया जाता है। इस गैस का उपयोग बिजली उत्पादन के अलावा कई उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। इससे कोयले का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ आयातित ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद तेज हुई प्रक्रिया

इस योजना को 13 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद मंत्रालय ने विस्तृत दिशा-निर्देश (Scheme Guidelines) और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किए। अब प्री-एप्लिकेशन कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इच्छुक कंपनियों को योजना की सभी शर्तों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

सम्मेलन के दौरान अधिकारियों ने पात्रता मानदंड, परियोजनाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, अनुदान, तकनीकी आवश्यकताओं तथा आवेदन जमा करने की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुति दी। साथ ही प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का समाधान भी किया गया ताकि आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बन सके।

₹2.5 से 3 लाख करोड़ तक के निवेश की संभावना

कोयला मंत्रालय का अनुमान है कि ₹37,500 करोड़ की इस सरकारी योजना के माध्यम से देश में लगभग ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निजी एवं सार्वजनिक निवेश आकर्षित होगा। यह निवेश भारत में बड़े पैमाने पर गैसीकरण संयंत्रों की स्थापना, आधुनिक तकनीक के विकास और संबंधित औद्योगिक ढांचे के निर्माण में उपयोग किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो भारत कोयले के पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर गैस आधारित रसायन उद्योग और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकता है।

हर वर्ष 7.5 करोड़ टन कोयले का होगा बेहतर उपयोग

योजना के अंतर्गत विकसित होने वाली परियोजनाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 7.5 करोड़ टन (75 मिलियन टन) घरेलू कोयले का गैसीकरण किया जाएगा। इससे कोयले का अधिक वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल उपयोग संभव होगा।

भारत में बड़ी मात्रा में उपलब्ध निम्न गुणवत्ता वाले कोयले का उपयोग भी गैसीकरण तकनीक के माध्यम से किया जा सकेगा। इससे उन संसाधनों का भी आर्थिक मूल्य बढ़ेगा, जिनका पारंपरिक उपयोग सीमित रहा है।

इन उत्पादों के निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से कई महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

इन उत्पादों की देश में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए वर्तमान में बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

आयात पर निर्भरता होगी कम

भारत हर वर्ष ऊर्जा, उर्वरक उद्योग तथा रसायन निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस, मेथनॉल, अमोनिया और अन्य रसायनों का आयात करता है। गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से इन उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ने पर आयात में उल्लेखनीय कमी आएगी।

सरकार का मानना है कि यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत‘ अभियान को गति देने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे वैश्विक बाजार में ईंधनों और रसायनों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी कम होगा।

50 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

इस महत्वाकांक्षी योजना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। गैसीकरण संयंत्रों के निर्माण, संचालन, रखरखाव, इंजीनियरिंग सेवाओं, परिवहन, लॉजिस्टिक्स तथा रसायन उद्योग में बड़ी संख्या में कुशल एवं अर्द्धकुशल युवाओं को रोजगार मिलेगा।

विशेष रूप से कोयला उत्पादक राज्यों—झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल—में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

उद्योग जगत ने दिखाई गहरी रुचि

प्री-एप्लिकेशन कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, निजी उद्योग समूहों, तकनीकी विशेषज्ञों और संभावित निवेशकों की बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि उद्योग जगत इस योजना को एक दीर्घकालिक अवसर के रूप में देख रहा है।

बैठक में विभिन्न प्रतिभागियों ने वित्तीय प्रोत्साहन, परियोजना क्रियान्वयन, तकनीकी साझेदारी, मूल्यांकन प्रक्रिया और समय-सीमा से जुड़े सुझाव भी दिए। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जाएगी।

7 सितंबर तक किए जा सकेंगे आवेदन

कोयला मंत्रालय ने सम्मेलन के दौरान सभी पात्र कंपनियों और संस्थाओं से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

मंत्रालय का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक योग्य कंपनियां इस योजना में भाग लें ताकि देश में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं का तेजी से विकास हो सके और भारत ऊर्जा तथा रसायन क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित कर सके।

भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना केवल कोयले के उपयोग की नई तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप परियोजनाएं समय पर स्थापित होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल घरेलू मांग पूरी कर सकेगा, बल्कि मूल्यवर्धित ऊर्जा एवं रासायनिक उत्पादों के उत्पादन में भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।

सरकार का यह प्रयास स्वच्छ तकनीक, बड़े निवेश, रोजगार सृजन और आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। उद्योग जगत की सकारात्मक भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में एक नए औद्योगिक युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

 

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