सरकारें कृषि प्रधान भारत को लेबर प्रधान बनाने की ओर बढ़ा रही हैं: राकेश टिकैत

Governments are moving towards making agriculture-based India labour-intensive: Rakesh Tikait

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने देश की कृषि नीतियों और किसानों की वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस दिशा में नीतियां बनाई जा रही हैं, उससे भारत कृषि प्रधान राष्ट्र बनने के बजाय धीरे-धीरे लेबर प्रधान देश की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किसान आत्मनिर्भर उत्पादक बनने के बजाय केवल सस्ते श्रमिक बनकर रह जाएंगे, जो देश के कृषि भविष्य और किसानों के सम्मान, दोनों के लिए चिंताजनक है।

राकेश टिकैत ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की पहचान सदियों से एक कृषि प्रधान देश के रूप में रही है। देश की बड़ी आबादी आज भी खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। ऐसे में सरकारों की प्राथमिकता ऐसी नीतियां होनी चाहिए जो किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं, खेती को लाभकारी बनाएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दें। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत दिखाई देती हैं।

उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी पर होने वाला खर्च किसानों की आय की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है। दूसरी ओर कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। ऐसी परिस्थिति में छोटे और सीमांत किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

टिकैत का कहना है कि जब खेती से सम्मानजनक आय नहीं होगी तो ग्रामीण युवाओं का खेती से मोहभंग होना स्वाभाविक है। वे रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करेंगे और अंततः कम वेतन वाले श्रमिक के रूप में काम करने को मजबूर होंगे। इससे न केवल गांवों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि कृषि क्षेत्र में भी श्रमिकों और किसानों की संख्या लगातार घटती जाएगी।

उन्होंने कहा कि भारत को यदि विकसित राष्ट्र बनाना है तो सबसे पहले कृषि क्षेत्र को मजबूत करना होगा। कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक स्थिरता का आधार भी है। यदि किसानों की स्थिति कमजोर होगी तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनसे किसानों की आय बढ़े, खेती में आधुनिक तकनीकों का विस्तार हो, सिंचाई सुविधाएं बेहतर हों और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए। केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि आधारित उद्योगों को गांवों तक पहुंचाना होगा। यदि गांवों में खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, जैविक खेती और मूल्य संवर्धन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और पलायन पर रोक लगेगी।

राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को केवल उत्पादन करने वाला नहीं बल्कि उद्यमी के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इसके लिए आसान कृषि ऋण, आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और मजबूत भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करेगा तो वह आत्मनिर्भर बनेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। आधुनिक कृषि तकनीकों, ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल मार्केटिंग और एग्री-स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रोत्साहित किया जाए। इससे खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

टिकैत ने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आंदोलन या विरोध प्रदर्शन से नहीं बल्कि सरकार और किसान संगठनों के बीच नियमित संवाद से संभव है। कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले किसानों और उनके प्रतिनिधियों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि नीतियां जमीन से जुड़ी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सकें।

उन्होंने कहा कि यदि कृषि क्षेत्र लगातार कमजोर होता गया तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, कृषि उत्पादन और देश की आर्थिक स्थिरता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए समय रहते ठोस कदम उठाना आवश्यक है।

राकेश टिकैत ने अंत में कहा कि भारत की ताकत उसकी कृषि और किसान हैं। यदि किसान मजबूत होगा तो देश भी मजबूत होगा। इसलिए सरकारों को ऐसी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए जो किसानों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और सम्मानजनक जीवन प्रदान करें। उन्होंने कहा कि कृषि को केवल रोजगार का साधन नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मानते हुए दीर्घकालिक और किसान हितैषी नीतियां लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

 

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