Delhi-NCR में GRAP-3 लागू: प्रदूषण पर CAQM का बड़ा एक्शन, अब इन कामों पर लगी रोक!

GRAP-3 implemented in Delhi-NCR: Major action by CAQM against pollution; these activities are now prohibited!

GRAP-3

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GRAP-3: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए Commission for Air Quality Management (CAQM) ने 6 नवंबर 2026 से Graded Response Action Plan (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-3 को लागू कर दिया है। दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका को देखते हुए आयोग ने एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है।

शुक्रवार, 6 नवंबर को दिल्ली का औसत Air Quality Index (AQI) 382 दर्ज किया गया, जो ‘Very Poor’ श्रेणी में आता है। सामान्य परिस्थितियों में GRAP-3 तब लागू किया जाता है जब AQI 401 से 450 के बीच पहुंचता है। हालांकि, इस बार मौसम के पूर्वानुमान और प्रदूषण की बढ़ती स्थिति को देखते हुए समय से पहले पाबंदियां लागू की गई हैं।

इस फैसले का असर दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत और NCR के अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। विशेष रूप से किसानों, कृषि उत्पादों की ढुलाई करने वाले वाहन चालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए इन नियमों की जानकारी जरूरी है।

GRAP-3 क्या है और इसे लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

GRAP यानी Graded Response Action Plan वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की एक चरणबद्ध व्यवस्था है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लगाई जाती हैं।

GRAP चरण AQI स्तर हवा की स्थिति
Stage 1 201–300 Poor
Stage 2 301–400 Very Poor
Stage 3 401–450 Severe
Stage 4 450 से अधिक Severe Plus

GRAP-3 लागू होने का मतलब है कि प्रशासन अब प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों पर पहले से ज्यादा कड़ी निगरानी रखेगा। नवंबर के दौरान दिल्ली-NCR में हवा की गति कम होने, तापमान गिरने और वातावरण में प्रदूषक कणों के जमा होने से Air Pollution की समस्या बढ़ सकती है। वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल, कचरा जलाना और कुछ क्षेत्रों में पराली जलाना भी प्रदूषण के स्रोत हैं।

GRAP-3 लागू होने के बाद कौन-कौन सी पाबंदियां रहेंगी?

1. BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहनों पर रोक

GRAP-3 के तहत दिल्ली और निर्धारित NCR जिलों में BS-III पेट्रोल तथा BS-IV डीजल चारपहिया Light Motor Vehicles के संचालन पर प्रतिबंध लागू होता है।

सितंबर 2026 में संशोधित नियमों के अनुसार यह प्रतिबंध दिल्ली के अतिरिक्त गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और सोनीपत तक लागू किया गया है।

साथ ही, दिल्ली के बाहर पंजीकृत कुछ पुराने डीजल मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसलिए किसानों और व्यापारियों को मंडी में माल भेजने से पहले अपने वाहन की श्रेणी जांचनी चाहिए।

2. निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर प्रतिबंध

Construction and Demolition Activities से धूल और प्रदूषण बढ़ता है। इसे देखते हुए गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की कई गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। मिट्टी की बड़े पैमाने पर खुदाई, सड़क निर्माण, ट्रेंचिंग, पाइलिंग और खुले में निर्माण सामग्री संभालने जैसी गतिविधियों पर सख्ती रहेगी। हालांकि, जरूरी सार्वजनिक परियोजनाओं और कुछ निर्धारित मरम्मत कार्यों के लिए नियमों के अनुसार छूट उपलब्ध हो सकती है।

3. पत्थर क्रशर और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर निगरानी

Stone Crushers, Mining Activities और प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण संयंत्रों के संचालन पर सख्ती की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य हवा में उड़ने वाले PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों को कम करना है। ये कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा सकते हैं।

4. स्कूलों में Hybrid Classes की व्यवस्था

बढ़ते प्रदूषण के कारण प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। GRAP-3 के तहत संबंधित क्षेत्रों में पांचवीं कक्षा तक Hybrid Learning Mode लागू करने की व्यवस्था है।इसका मतलब है कि प्रशासन के निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।

5. सार्वजनिक परिवहन और डीजल जनरेटर पर सख्ती

पुरानी श्रेणी की कुछ अंतरराज्यीय डीजल बसों पर पहले से लागू प्रतिबंध जारी रहेंगे। डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी संबंधित GRAP नियम लागू होंगे, जबकि आवश्यक सेवाओं को निर्धारित छूट मिल सकती है।निजी संस्थानों को कर्मचारियों के लिए Work From Home या Hybrid Working जैसी व्यवस्थाओं पर विचार करने की सलाह दी गई है।

किसानों पर GRAP-3 का क्या असर पड़ेगा?

दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू होने का असर केवल शहरों की सड़कों और निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। NCR के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और कृषि व्यापार से जुड़े लोगों को भी कुछ सावधानियां बरतनी होंगी।

कृषि उत्पादों की ढुलाई: दिल्ली की आजादपुर मंडी और अन्य बाजारों में सब्जियां, फल, अनाज और दूध भेजने वाले किसानों को वाहन संबंधी नियमों की जानकारी रखनी चाहिए। सभी कृषि वाहन अपने आप प्रतिबंधित नहीं होते। प्रतिबंध वाहन के प्रकार, ईंधन, उत्सर्जन मानक और लागू छूट पर निर्भर करता है।

पराली प्रबंधन: धान की कटाई के बाद खेतों में बचे Crop Residue को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करना बेहतर है। पराली जलाने से धुआं और सूक्ष्म प्रदूषक कण निकलते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों की सेहत प्रभावित हो सकती है।

खेत में काम करने वाले मजदूर: प्रदूषण अधिक होने पर लंबे समय तक खुले में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। खासकर बुजुर्गों और पहले से सांस की समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

पराली जलाए बिना किसान कैसे करें Crop Residue Management?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में ही उपयोग करना मिट्टी की सेहत और भविष्य की उत्पादकता के लिए लाभदायक हो सकता है। किसान निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं:

  • Happy Seeder: धान के अवशेषों के बीच गेहूं की सीधी बुवाई के लिए उपयोगी मशीन।

  • Super Seeder: फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाते हुए बुवाई करने में मददगार।

  • Mulching: पराली को मिट्टी की सतह पर बिछाकर नमी संरक्षण और खरपतवार नियंत्रण में मदद ली जा सकती है।

  • Composting: उपयुक्त तरीके से फसल अवशेषों को जैविक खाद में बदला जा सकता है।

  • Crop Residue Collection: बेलर जैसी मशीनों से अवशेष एकत्र करके उपयोग योग्य उद्योगों तक पहुंचाए जा सकते हैं।

हालांकि, मशीन का चुनाव फसल, खेत की स्थिति, मिट्टी की नमी और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार करना चाहिए। किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से सलाह ले सकते हैं।

प्रदूषण के दौरान किसान और ग्रामीण परिवार क्या सावधानी बरतें?

दिल्ली-NCR के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को बदलती Air Quality के अनुसार अपनी दैनिक गतिविधियां तय करनी चाहिए। खेत में भारी धूल उड़ाने वाले कामों से बचें। फसल अवशेष, सूखी पत्तियां और कचरा खुले में न जलाएं। जहां संभव हो, अत्यधिक प्रदूषण वाले समय में लंबे और मेहनत वाले बाहरी काम सीमित रखें।

किसानों को अपने ट्रैक्टर, पंप और कृषि परिवहन वाहनों का नियमित रखरखाव भी करना चाहिए, ताकि अनावश्यक धुआं कम निकले। यह भी समझना जरूरी है कि GRAP-3 लागू होने का अर्थ सभी ट्रैक्टरों या खेती के कामों पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है।

क्या आने वाले दिनों में GRAP-4 भी लागू हो सकता है?

मौसम विभाग और प्रदूषण निगरानी एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार 7 से 9 नवंबर के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई है।यदि प्रदूषण और बढ़ता है तो CAQM परिस्थितियों की समीक्षा करके GRAP-4 से जुड़े अतिरिक्त उपाय लागू कर सकता है। हालांकि, GRAP-4 अपने आप लागू नहीं होता। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण के निर्णय की आवश्यकता होती है।

दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू करना बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए CAQM का महत्वपूर्ण एहतियाती कदम है। निर्माण कार्यों, पुराने वाहनों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण से हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, कृषि उत्पादों की ढुलाई से पहले परिवहन नियम जांचें और प्रदूषण के दौरान अपने परिवार तथा खेत में काम करने वाले मजदूरों की सेहत का ध्यान रखें।

प्रदूषण पर नियंत्रण केवल किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है। शहरों में वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन को कम करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर Crop Residue Management अपनाना भी आवश्यक है।

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