ICAR और APNI के इस एक कदम से पहुंचेगा हजारों किसानों को फायदा


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और मोरक्को स्थित अफ्रीकन प्लांट न्यूट्रिशन इंस्टिट्यूट (APNI) के बीच आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सहयोगात्मक पहल मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्वों के सटीक प्रबंधन और जलवायु-लचीली खेती प्रणालियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है, जिससे भारत और अफ्रीकी देशों में कृषि नवाचार को गति मिलेगी।

समझौते पर हस्ताक्षर डॉ. एम. एल. जात, सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) एवं महानिदेशक, ICAR, और डॉ. कौशिक मजूमदार, महानिदेशक, APNI द्वारा किए गए। इस अवसर पर ICAR के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कृषि क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जात ने कहा कि यह समझौता उभरती कृषि चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, “यह सहयोग मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन को बढ़ावा देने और जलवायु-लचीली तथा टिकाऊ कृषि प्रणालियों को विकसित करने में सहायक होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस साझेदारी से दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान होगा, जिससे किसान हितैषी और पर्यावरण-संवेदनशील समाधान विकसित किए जा सकेंगे। “जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को देखते हुए वैश्विक स्तर पर कृषि अनुसंधान में साझेदारी और नवाचार समय की मांग है,” उन्होंने जोड़ा।

APNI के महानिदेशक डॉ. कौशिक मजूमदार ने भी इस सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ICAR जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ कार्य करना उनके लिए सम्मान की बात है। “हम मिलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पोषक तत्व प्रबंधन की ऐसी रणनीतियाँ विकसित करना चाहते हैं जो किसानों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों,” उन्होंने कहा।

इस समझौते के अंतर्गत जिन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:

यह साझेदारी ICAR के देशभर में फैले अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के व्यापक नेटवर्क तथा APNI की प्लांट न्यूट्रिशन विशेषज्ञता का लाभ उठाएगी। इस समन्वय से किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।

यह समझौता सरकारी संस्थानों की उस नीति के अनुरूप है, जो तकनीक-आधारित, पर्यावरण-संवेदनशील और किसानों के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देती है। भारत और अफ्रीका के बीच यह रणनीतिक सहयोग वैश्विक कृषि अनुसंधान के लिए एक मॉडल बन सकता है, जो खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और सतत कृषि विकास को एक नई दिशा देगा।

 

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