राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस की पूर्व संध्या पर सिक्किम में ICAR-CIFRI की पहल

ICAR-CIFRI initiative in Sikkim on the eve of National Fish Farmers Day

ICAR-CIFRI

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राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFRI) के क्षेत्रीय केंद्र, गुवाहाटी ने सिक्किम सरकार के मत्स्य निदेशालय के सहयोग से सोरेंग जिले के रोथाक फिश फार्म में जागरूकता एवं कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र (NEH) में वैज्ञानिक एवं टिकाऊ अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि करना तथा युवाओं में मत्स्य पालन के प्रति रुचि विकसित करना था।

कार्यक्रम के दौरान ICAR-CIFRI के वैज्ञानिकों ने मत्स्य किसानों को वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों, मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के उपाय तथा सजावटी मछलियों (ऑर्नामेंटल फिश) के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों का उपयोग समझाया और उनकी समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत किया। इस संवादात्मक सत्र में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा वैज्ञानिकों से क्षेत्र विशेष के अनुरूप तकनीकी सलाह प्राप्त की।

यह कार्यक्रम ICAR-CIFRI के निदेशक डॉ. प्रदीप डेय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आसपास के विद्यालयों को 21 एक्वेरियम यूनिट्स का वितरण रहा। इन यूनिट्स में सजावटी मछलियां, मछली आहार तथा आवश्यक उपकरण शामिल थे। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में जलीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना तथा वैज्ञानिक तरीके से एक्वेरियम प्रबंधन और मत्स्य पालन के प्रति रुचि उत्पन्न करना है।

इस अवसर पर डॉ. प्रदीप डेय ने कहा कि राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह कार्यक्रम विज्ञान आधारित नवाचारों के माध्यम से मत्स्य किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ICAR-CIFRI की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य मत्स्य विभागों के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से संस्थान एक ऐसे टिकाऊ मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है, जो किसानों की आजीविका मजबूत करने, पोषण सुरक्षा बढ़ाने, जलीय जैव विविधता के संरक्षण तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के समावेशी और सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में 63 मत्स्य किसानों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, नई तकनीकों को अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ मत्स्य पालन अपनाने की भी सलाह दी।

ICAR-CIFRI ने इस अवसर पर यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान राज्य सरकारों के साथ मिलकर विज्ञान आधारित अंतर्देशीय मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ज्ञान के प्रसार, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण जैसे प्रयासों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलीय जैव विविधता के संरक्षण और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं।

यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, सरकारी सहयोग और किसानों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक आधुनिक, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह पहल भविष्य में उत्तर-पूर्व भारत के मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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