इमाम ने शमी को रोजा न रखने पर ‘अपराधी’ कहा

֍:शमी पर मौलाना की टिप्पणी §ֆ:एएनआई से बात करते हुए, बरेलवी ने इस बात पर जोर दिया कि सभी स्वस्थ मुसलमानों के लिए रोजा रखना अनिवार्य है और इसे छोड़ना इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “इस्लाम के मूल कर्तव्यों में से एक रोजा है। अगर कोई स्वस्थ पुरुष या महिला इसका पालन नहीं करता है, तो वह अपराध कर रहा है। शरीयत की नजर में, वे अपराधी हैं और उन्हें अल्लाह को जवाब देना होगा।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि चूंकि शमी क्रिकेट खेलने के लिए शारीरिक रूप से फिट थे, इसलिए उन्हें मैच के दौरान पानी पीने के बजाय रोजा रखना चाहिए था। उन्होंने कहा, “इससे लोगों को गलत संदेश जाता है।” §֍:शमी के भाई ने उनका बचाव किया§ֆ:
इस विवाद के जवाब में शमी के चचेरे भाई मोहम्मद जैद ने उनका बचाव किया। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा: “शमी भाई दुबई में खेल रहे हैं। रमजान के दौरान, अगर लंबी यात्रा करनी है, तो रोज़ा छोड़ा जा सकता है। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। मौलाना ने यह बयान सिर्फ़ टीआरपी के लिए दिया है।”

उन्होंने शमी के देश के प्रति समर्पण को भी उजागर किया, उन्होंने कहा, “हम ऐसे लोग हैं जो देश के लिए बलिदान देने के लिए तैयार हैं।”
§֍:मौलवी की टिप्पणी के खिलाफ़ प्रतिक्रिया§ֆ:



ICC चैंपियनशिप ट्रॉफी के सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ भारत की जीत के बाद विवाद शुरू हुआ, जहाँ शमी ने 48 रन देकर तीन विकेट लेकर अहम भूमिका निभाई। कई नेताओं ने मौलवी की टिप्पणी की निंदा की, उनका तर्क था कि धर्म को खेलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

एनसीपी-एसपी नेता रोहित पवार ने भी शमी का बचाव करते हुए एएनआई से कहा: “अगर उन्हें लगता है कि उपवास उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है, तो उन्हें खेल को प्राथमिकता देने का अधिकार है। वह एक गौरवान्वित भारतीय हैं जिन्होंने देश के लिए मैच जीते हैं।” इसके अलावा, शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने इस बयान की निंदा करते हुए कहा: “धर्म मजबूरी नहीं है। बहुत से लोग उपवास नहीं करते हैं, लेकिन शमी को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?”
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की रमजान के दौरान रोजा (उपवास) न रखने पर आलोचना की, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने शमी को शरीयत (इस्लामी कानून) की नजर में “अपराधी” तक कह दिया। उनकी टिप्पणी की राजनीतिक और धार्मिक दोनों नेताओं ने तीखी आलोचना की है।

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