Late Monsoon: मॉनसून की चाल हुई धीमी, आसमान से गायब हुए बादल! जानिए क्या है बड़ी वजह

Late Monsoon: Monsoon progress slows down, clouds vanish from the sky! Find out the major reason.

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Late Monsoon: भारत में हर साल जून के महीने का इंतजार सिर्फ गर्मी से राहत पाने के लिए नहीं, बल्कि मॉनसून की दस्तक के लिए भी किया जाता है। इस बार भी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने तय समय से पहले भारत में प्रवेश किया और शुरुआती दिनों में इसकी रफ्तार काफी तेज रही। लेकिन पिछले करीब दो हफ्तों से मॉनसून की प्रगति लगभग थम सी गई है। देश के कई हिस्सों में जहां लोगों को झमाझम बारिश की उम्मीद थी, वहां गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सोमाली जेट का कमजोर पड़ना और अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाओं की जगह सूखी हवाओं का प्रभाव बढ़ना है।

क्या होता है सोमाली जेट?

सोमाली जेट  (SomaliJet ) एक शक्तिशाली निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह (Low-Level Jet Stream) है, जो अफ्रीका के सोमालिया तट से होकर अरब सागर के ऊपर बहता है। यह जेट भारत में मॉनसून को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। इसकी मदद से अरब सागर से भारी मात्रा में नमी भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचती है, जिससे बारिश की गतिविधियां तेज होती हैं।

जब यह जेट मजबूत रहता है तो मॉनसून तेजी से आगे बढ़ता है और व्यापक क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जाती है। लेकिन इस समय सोमाली जेट सामान्य से कमजोर हो गया है, जिसके कारण नमी की आपूर्ति में कमी आई है और मॉनसून की प्रगति धीमी पड़ गई है।

सूखी हवाओं ने बढ़ाई परेशानी

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से आने वाली शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ गया है। ये हवाएं वातावरण में मौजूद नमी को कम कर रही हैं, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी नहीं पहुंचेगी, तब तक मॉनसून को आगे बढ़ने में कठिनाई होगी। यही वजह है कि पिछले दो सप्ताह से मॉनसून लगभग स्थिर बना हुआ है।

समय से पहले आया था मॉनसून

इस वर्ष मॉनसून ने केरल में सामान्य तिथि से पहले दस्तक दी थी। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में भी तेजी से आगे बढ़ा। शुरुआती चरण में ऐसा लग रहा था कि मॉनसून पूरे देश को समय से पहले कवर कर लेगा।

हालांकि जून के दूसरे सप्ताह में वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला। अरब सागर के ऊपर हवाओं की गति कम हुई और मानसूनी ट्रफ भी कमजोर पड़ गई। इसके बाद मॉनसून की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया।

किन राज्यों में दिख रहा असर?

मॉनसून की धीमी प्रगति का असर सबसे ज्यादा उत्तर भारत और मध्य भारत के राज्यों में देखा जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तापमान में कुछ गिरावट जरूर आई है, लेकिन मॉनसूनी बारिश का इंतजार अभी भी जारी है। वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किसान बारिश न होने से चिंतित नजर आ रहे हैं क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई पर इसका असर पड़ सकता है।

कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है असर

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और खेती का बड़ा हिस्सा मॉनसून पर निर्भर करता है। यदि मॉनसून लंबे समय तक कमजोर बना रहता है तो धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी चिंता की स्थिति नहीं है क्योंकि मॉनसून सीजन की शुरुआत ही हुई है। यदि अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ती हैं तो फसलों पर पड़ने वाला असर काफी हद तक कम हो सकता है।

क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसून में इस तरह का “ब्रेक फेज” कोई असामान्य घटना नहीं है। कई बार मॉनसून शुरुआती दौर में तेजी से आगे बढ़ता है और फिर कुछ दिनों के लिए उसकी गति धीमी पड़ जाती है। यह वायुमंडलीय परिस्थितियों और समुद्री तापमान में बदलाव के कारण होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में नए निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) के बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम विकसित होता है तो मॉनसून को फिर से मजबूती मिल सकती है और बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है।

अगले दो हफ्तों का अनुमान

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके साथ ही मानसूनी हवाओं के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।

यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मॉनसून उत्तर भारत की ओर तेजी से बढ़ सकता है और जून के अंतिम सप्ताह तक कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे गर्मी और उमस से राहत मिलने के साथ-साथ कृषि गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

निष्कर्ष

फिलहाल भारत में मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक लगा हुआ है, जिसकी मुख्य वजह सोमाली जेट का कमजोर पड़ना और सूखी हवाओं का प्रभाव बढ़ना है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे मॉनसून की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में वायुमंडलीय परिस्थितियां बेहतर होंगी और मॉनसून एक बार फिर सक्रिय होकर देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की सौगात लेकर पहुंचेगा। किसानों से लेकर आम लोगों तक, सभी की निगाहें अब आसमान और मौसम विभाग के अगले अपडेट पर टिकी हुई हैं।

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