प्रधानमंत्री मोदी के “रिफॉर्म एक्सप्रेस” मिशन को गति देंगे कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय

Ministry of Agriculture and Rural Development to accelerate PM Modi's "Reform Express" mission

प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने शुक्रवार को अपने दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर प्रशासनिक सुधार, शिकायत निवारण, डिजिटल गवर्नेंस और जवाबदेही को लेकर बड़ा एजेंडा सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का काम केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के जीवन में दिखाई देना चाहिए। किसानों, गरीबों और ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए समयबद्ध, पारदर्शी और परिणाममुखी व्यवस्था तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अब “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार होकर काम कर रही है। प्रधानमंत्री लगातार “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म” मंत्र पर जोर दे रहे हैं और इसी सोच को कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्रालयों में जमीनी स्तर तक लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे।

श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत निवारण प्रणाली को पूरी तरह परिणाममूलक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न योजनाओं और विभागों में अलग-अलग शिकायत पोर्टल, तंत्र और व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन अब इन्हें समेकित और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया गया, जो प्रतिदिन जनशिकायतों, जनप्रतिनिधियों के पत्रों, लाभार्थियों की समस्याओं और विभिन्न पोर्टलों पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा करेगी।

उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि केवल “डिस्पोजल” दिखाना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि लाभार्थी को वास्तव में राहत मिली या नहीं। उन्होंने कहा कि कई बार रिकॉर्ड में योजनाओं का लाभ वितरण दिखता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थी तक कुछ नहीं पहुंचता। ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने कुछ लाभार्थियों को सीधे फोन कर जानकारी ली, तब कागज और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर सामने आया। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि संरचनात्मक है और इसे गंभीरता से हल करना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब हर महीने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा की जाएगी। महीने के पहले सोमवार को इसकी नियमित समीक्षा होगी, हालांकि जून महीने में खरीफ सीजन की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तब तक शिकायत निवारण तंत्र को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार दिए जा रहे प्रशासनिक सुधारों के संदेश का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर विभाग और हर योजना को यह पहचानना होगा कि आखिर कठिनाई कहां है। प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, कृषि योजनाएं, बागवानी, फसल बीमा, कृषि विपणन और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में यदि लाभार्थी को अनावश्यक चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना ही होगा।

उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि हर काम के लिए लाइसेंस की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए, जबकि कई मामलों में सरल पंजीकरण प्रणाली से भी काम हो सकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर ऐसे नियमों, प्रक्रियाओं और प्रावधानों की पहचान की जाए जो योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ गवर्नेंस” दोनों को मजबूत करना है।

बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल गवर्नेंस के उपयोग पर भी व्यापक चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) सहित सभी संस्थाओं में डिजिटल तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली विकसित की जाए, जिससे योजनाओं की निगरानी और लाभ वितरण अधिक पारदर्शी बन सके।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को मजबूत करना समय की मांग है। यदि विभिन्न शिकायत पोर्टल और डेटा सिस्टम एकीकृत हो जाएं, तो शिकायतों का समाधान अधिक तेजी और सटीकता से किया जा सकता है। इसके लिए अलग विशेषज्ञ टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया।

प्रशासनिक कार्यसंस्कृति पर भी केंद्रीय मंत्री ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि फाइल संस्कृति में बदलाव जरूरी है। अक्सर फाइलें नीचे के स्तर पर ही उलझ जाती हैं और वही पुराना माइंडसेट पूरी प्रक्रिया को धीमा कर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शीर्ष स्तर पर सुधार से काम नहीं चलेगा, बल्कि नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी कार्यप्रणाली को बदलना होगा।

उन्होंने फाइल निर्माण, नोटिंग और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया। श्री चौहान ने कहा कि मजबूत और स्पष्ट ड्राफ्टिंग नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया की रीढ़ होती है। यदि फाइल सही तरीके से तैयार होगी तो निर्णय भी तेजी और गुणवत्ता के साथ होंगे। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि कार्यक्रमों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में न्यायालयों में लंबित मामलों पर भी गंभीर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई बार सरकार अदालतों में इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाता। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि लंबित कोर्ट केसों की सूची तैयार कर उनकी नियमित समीक्षा की जाए। प्रत्येक मामले के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं और आवश्यक होने पर बेहतर विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार की किसी भी कानूनी हार का सीधा असर सार्वजनिक हित और सरकारी योजनाओं पर पड़ता है, इसलिए न्यायालयीन मामलों को गंभीरता से लेना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फाइलों और कानूनी मामलों में देरी की संस्कृति को समाप्त करना होगा।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ संवाद और जनजागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कई बार सरकार अच्छे सुधार करती है, लेकिन जनता तक उसकी जानकारी नहीं पहुंच पाती। इसलिए योजनाओं और सुधारों का प्रभावी संचार होना चाहिए। इसके लिए सोशल मीडिया, वीडियो, रील्स, ग्राफिक्स, जनसंवाद और लाभार्थी कहानियों का उपयोग किया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि “रिफॉर्म उत्सव” जैसी अवधारणा के तहत पहले से किए गए सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए। किसानों, मजदूरों, सरपंचों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद कर उन्हें बताया जाए कि कौन से बदलाव किए गए हैं और उनसे उन्हें क्या लाभ मिलेगा। उनका मानना था कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी प्रस्तुतीकरण पारंपरिक माध्यमों से कहीं अधिक असरकारी साबित हो सकता है।

बैठक में राज्यों के साथ साझेदारी को भी विशेष महत्व दिया गया। श्री चौहान ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता राज्यों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि असली क्रियान्वयन राज्यों में होता है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसके लिए ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समीक्षा बैठकें और समस्या आधारित संवाद को मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जो राज्य अभी कुछ मामलों में संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र सरकार पूरे देश की जनता के लिए जिम्मेदार है। कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय पर भी उन्होंने जोर दिया। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग आधारित कृषि मॉडल भविष्य की आवश्यकता हैं।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विभाग को अपना स्पष्ट रोडमैप तैयार करना होगा। इसमें वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना शामिल होनी चाहिए, ताकि कार्यों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में सोलराइजेशन को बढ़ावा देने की भी बात कही। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां सोलराइजेशन का काम हो चुका है और जहां अभी बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार किया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के वर्तमान कार्यकाल के दो वर्ष और पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी चर्चा हुई। श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग अपनी उपलब्धियों का व्यवस्थित दस्तावेज तैयार करें और उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए रचनात्मक संचार रणनीति बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में छोटे वीडियो, ग्राफिक्स और लाभार्थियों की वास्तविक कहानियां अधिक प्रभाव छोड़ती हैं। योजनाओं से लोगों के जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखकर कंटेंट तैयार किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि सरकार की उपलब्धियों को जनता तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना भी सुशासन का हिस्सा है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख किया गया। श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत आवश्यक मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव भेजे जाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राथमिकता देश के भीतर प्रशासनिक सुधारों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दी जानी चाहिए।

फाइलों के निस्तारण पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममुखी निर्णय हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फाइल या नियम का असर लाखों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है, इसलिए उसे गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समझना जरूरी है।

बैठक के अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण, प्रशासनिक सुधार, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद और 2047 रोडमैप—हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना ही केंद्र सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

 

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