ICAR में Mission Karmayogi को मिलेगी रफ्तार, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के लिए विषय-विशिष्ट ऑनलाइन कोर्स पर जोर
आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर नियमित Learning अनिवार्य करने की पहल, डॉ. एम. एल. जाट ने ICAR संस्थानों को समय पर पाठ्यक्रम तैयार करने और अपलोड करने के दिए निर्देश
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2026: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपने संस्थानों में कर्मचारियों की Professional Skills, कार्यक्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से ICAR के कृषि शिक्षा प्रभाग ने आईजीओटी कर्मयोगी (iGOT Karmayogi) प्लेटफॉर्म के लिए विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास और डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की। इस संबंध में 7 अक्टूबर 2026 को एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने की।
बैठक में ICAR संस्थानों द्वारा तैयार किए जा रहे विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों की स्थिति, उनकी गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। डॉ. एम. एल. जाट ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया कि वे तय दिशा-निर्देशों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रम तैयार करें। इन्हें आंतरिक समीक्षा के बाद समय पर iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए, ताकि कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और सीखने के अवसर मिल सकें।
इस पहल का उद्देश्य केवल ऑनलाइन कोर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए व्यवस्थित, उपयोगी और निरंतर Learning Ecosystem विकसित करना है। इससे संस्थानों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ICAR कर्मचारियों के लिए नियमित Learning पर विशेष जोर
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि सभी ICAR संस्थानों को पाठ्यक्रम विकास और डिजिटलीकरण के कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रमों को अपलोड करने से पहले उनकी उचित आंतरिक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने ICAR के सभी कर्मचारियों को iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से कम से कम दो घंटे Learning करने पर भी जोर दिया। इसके लिए संस्थानों को सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और निर्धारित Learning Hours तथा Course Upload Targets को समय पर पूरा करने की आवश्यकता बताई गई।
डिजिटल प्रशिक्षण व्यवस्था में नियमित भागीदारी कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित नई जानकारियां हासिल करने, Professional Competencies विकसित करने और कार्य प्रक्रियाओं को बेहतर समझने में सहायता कर सकती है। कृषि अनुसंधान जैसे तकनीकी क्षेत्र में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां वैज्ञानिक ज्ञान, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डिजिटल तकनीकों में लगातार बदलाव होते रहते हैं।
हालांकि, ऑनलाइन प्रशिक्षण की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि पाठ्यक्रम कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों, उनकी सामग्री व्यावहारिक हो और प्राप्त ज्ञान का उपयोग कार्यस्थल पर किया जा सके।
क्या है iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म?
iGOT Karmayogi केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए विकसित एक डिजिटल Learning Platform है, जिसका उद्देश्य क्षमता निर्माण को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और निरंतर बनाना है। यह मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियों को उनके कार्य, जिम्मेदारियों और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
इस तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों को अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न विषयों पर अध्ययन करने और नई दक्षताएं विकसित करने में मदद मिल सकती है। पारंपरिक प्रशिक्षण व्यवस्था में जहां कर्मचारियों को निर्धारित स्थान और समय पर उपस्थित होना पड़ता है, वहीं ऑनलाइन Learning से प्रशिक्षण सामग्री तक पहुंच अधिक लचीली हो सकती है।
ICAR जैसे बड़े अनुसंधान नेटवर्क में इस प्रकार की व्यवस्था का विशेष महत्व है। परिषद के अंतर्गत विभिन्न संस्थान कृषि विज्ञान, फसल सुधार, पशुपालन, कृषि शिक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम करते हैं। इन संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की जरूरतें और विशेषज्ञता अलग-अलग हो सकती हैं।
ऐसे में विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित करने से कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र से संबंधित ज्ञान और कौशल हासिल करने के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि पाठ्यक्रमों की विषयवस्तु प्रासंगिक हो, उन्हें सरल डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जाए और समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाए।
विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश
ICAR की समीक्षा बैठक में पाठ्यक्रम विकास के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. एम. एल. जाट ने संस्थानों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पाठ्यक्रम तैयार करें और उन्हें अपलोड करने से पहले उचित Internal Review प्रक्रिया पूरी करें।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण सामग्री स्पष्ट, उपयोगी और संबंधित विषय के अनुरूप हो। डिजिटल पाठ्यक्रम तैयार करते समय केवल जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होता। सामग्री को इस तरह व्यवस्थित करना भी आवश्यक है कि कर्मचारी उसे आसानी से समझ सकें और अपने काम में उपयोग कर सकें।
विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास में विशेषज्ञों की भागीदारी, सही तथ्यों का उपयोग, स्पष्ट Learning Objectives और व्यवस्थित प्रस्तुति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना भी जरूरी है, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लक्ष्य प्रभावित न हों।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सभी ICAR संस्थान अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें और निर्धारित Course Upload Targets को पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करें।
कृषि अनुसंधान संस्थानों में क्षमता निर्माण को मिलेगी मजबूती
कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए वैज्ञानिक तरीकों, तकनीकों और कार्य प्रणालियों का विकास हो रहा है। ऐसे में कर्मचारियों की क्षमताओं को समय के साथ विकसित करना संस्थानों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
Capacity Building यानी क्षमता निर्माण का उद्देश्य कर्मचारियों के ज्ञान, कौशल और कार्य निष्पादन की क्षमता को बेहतर बनाना है। इसके अंतर्गत विषय से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ डिजिटल दक्षता, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यावसायिक कौशल भी शामिल हो सकते हैं।
ICAR के संदर्भ में विषय-विशिष्ट ऑनलाइन पाठ्यक्रम संस्थानों को प्रशिक्षण गतिविधियों को व्यवस्थित करने का अवसर दे सकते हैं। डिजिटल माध्यम से तैयार सामग्री को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को समान विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, नियमित Learning से कर्मचारियों को अपनी विशेषज्ञता को अपडेट रखने और बदलती कार्य आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण सामग्री केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि कर्मचारियों के वास्तविक कार्यों से जुड़ी हो।
डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने समय पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई
बैठक की शुरुआत में ICAR के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत परिषद के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए सभी ICAR संस्थानों द्वारा समय पर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने और राष्ट्रीय स्तर पर ICAR की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए संस्थानों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसके लिए पाठ्यक्रम विकास, डिजिटलीकरण और नियमित Learning से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
किसी बड़े संस्थागत नेटवर्क में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए केवल केंद्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होता। संबंधित संस्थानों को अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार कार्य करना, प्रगति की समीक्षा करना और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना भी आवश्यक होता है।
इस दृष्टि से बैठक में संस्थानों की भागीदारी और समयबद्ध कार्य निष्पादन को महत्व दिया गया। नियमित समीक्षा से पाठ्यक्रम विकास की प्रगति पर नजर रखने और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में आने वाली संभावित बाधाओं को पहचानने में सहायता मिल सकती है।
कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ ने समझाई पाठ्यक्रम डिजिटलीकरण की प्रक्रिया
बैठक के दौरान कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ श्री अश्विन ने प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम सामग्री विकसित करने और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पाठ्यक्रम विकास के लिए उपलब्ध सूचीबद्ध एजेंसियों के बारे में भी बताया।
इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्तापूर्ण विषय-विशिष्ट Learning Material तैयार करने और उसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से संबंधित तकनीकी सुझाव साझा किए।
पाठ्यक्रमों का डिजिटलीकरण ऑनलाइन प्रशिक्षण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण सामग्री को डिजिटल प्रारूप में तैयार करना, उसे उपयुक्त ढंग से व्यवस्थित करना और संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना शामिल है। इस प्रक्रिया में तकनीकी मानकों तथा सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
बैठक में दी गई जानकारी का उद्देश्य ICAR संस्थानों को पाठ्यक्रम विकास और अपलोड प्रक्रिया में सहायता प्रदान करना था, ताकि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपना कार्य पूरा कर सकें।
Mission Karmayogi के तहत संस्थागत जवाबदेही पर जोर
मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमताओं को मजबूत करना और सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित बनाने में सहायता करना है। इस संदर्भ में डिजिटल Learning और नियमित प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
ICAR में इस पहल के अंतर्गत विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों का विकास कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसके लिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, कर्मचारियों की भागीदारी और पाठ्यक्रमों की समय पर उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
संस्थागत स्तर पर नियमित समीक्षा, जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और निर्धारित समयसीमा का पालन प्रशिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने में योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों की उपयोगिता का आकलन करना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि यह समझा जा सके कि प्रशिक्षण से कर्मचारियों के ज्ञान और कार्य निष्पादन में किस प्रकार सुधार हो रहा है।
बैठक के समापन पर पाठ्यक्रम विकास और डिजिटलीकरण में तेजी लाने, आंतरिक समीक्षा के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित करने, निर्धारित Learning Hours पूरे करने और समयसीमा के भीतर पाठ्यक्रम अपलोड करने के निर्देश दोहराए गए।
निष्कर्ष: डिजिटल प्रशिक्षण से मजबूत होगी ICAR की कार्यक्षमता
ICAR की यह समीक्षा बैठक कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से जुड़े संस्थानों में डिजिटल प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों का विकास और नियमित Learning कर्मचारियों को अपने ज्ञान तथा व्यावसायिक कौशल को बेहतर बनाने के अवसर प्रदान कर सकता है।
डॉ. एम. एल. जाट द्वारा नियमित रूप से कम से कम दो घंटे Learning करने और पाठ्यक्रमों को निर्धारित समयसीमा में अपलोड करने पर दिया गया जोर इस पहल के कार्यान्वयन को महत्व देता है। वहीं, डॉ. यशपाल सिंह मलिक और कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ द्वारा साझा किए गए निर्देश तथा तकनीकी सुझाव संस्थानों को इस प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से दिए गए।
आगे इस पहल की सफलता पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, संस्थानों की सक्रिय भागीदारी और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर निर्भर करेगी। यदि डिजिटल Learning को कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ा जाता है, तो इससे ICAR की संस्थागत क्षमता मजबूत करने और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपने संस्थानों में कर्मचारियों की Professional Skills, कार्यक्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से ICAR के कृषि शिक्षा प्रभाग ने आईजीओटी कर्मयोगी (iGOT Karmayogi) प्लेटफॉर्म के लिए विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास और डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की। इस संबंध में 7 अक्टूबर 2026 को एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने की।
बैठक में ICAR संस्थानों द्वारा तैयार किए जा रहे विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों की स्थिति, उनकी गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। डॉ. एम. एल. जाट ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया कि वे तय दिशा-निर्देशों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रम तैयार करें। इन्हें आंतरिक समीक्षा के बाद समय पर iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए, ताकि कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और सीखने के अवसर मिल सकें।
इस पहल का उद्देश्य केवल ऑनलाइन कोर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए व्यवस्थित, उपयोगी और निरंतर Learning Ecosystem विकसित करना है। इससे संस्थानों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ICAR कर्मचारियों के लिए नियमित Learning पर विशेष जोर
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि सभी ICAR संस्थानों को पाठ्यक्रम विकास और डिजिटलीकरण के कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रमों को अपलोड करने से पहले उनकी उचित आंतरिक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने ICAR के सभी कर्मचारियों को iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से कम से कम दो घंटे Learning करने पर भी जोर दिया। इसके लिए संस्थानों को सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और निर्धारित Learning Hours तथा Course Upload Targets को समय पर पूरा करने की आवश्यकता बताई गई।
डिजिटल प्रशिक्षण व्यवस्था में नियमित भागीदारी कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित नई जानकारियां हासिल करने, Professional Competencies विकसित करने और कार्य प्रक्रियाओं को बेहतर समझने में सहायता कर सकती है। कृषि अनुसंधान जैसे तकनीकी क्षेत्र में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां वैज्ञानिक ज्ञान, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डिजिटल तकनीकों में लगातार बदलाव होते रहते हैं।
हालांकि, ऑनलाइन प्रशिक्षण की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि पाठ्यक्रम कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों, उनकी सामग्री व्यावहारिक हो और प्राप्त ज्ञान का उपयोग कार्यस्थल पर किया जा सके।
क्या है iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म?
iGOT Karmayogi केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए विकसित एक डिजिटल Learning Platform है, जिसका उद्देश्य क्षमता निर्माण को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और निरंतर बनाना है। यह मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियों को उनके कार्य, जिम्मेदारियों और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
इस तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों को अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न विषयों पर अध्ययन करने और नई दक्षताएं विकसित करने में मदद मिल सकती है। पारंपरिक प्रशिक्षण व्यवस्था में जहां कर्मचारियों को निर्धारित स्थान और समय पर उपस्थित होना पड़ता है, वहीं ऑनलाइन Learning से प्रशिक्षण सामग्री तक पहुंच अधिक लचीली हो सकती है।
ICAR जैसे बड़े अनुसंधान नेटवर्क में इस प्रकार की व्यवस्था का विशेष महत्व है। परिषद के अंतर्गत विभिन्न संस्थान कृषि विज्ञान, फसल सुधार, पशुपालन, कृषि शिक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम करते हैं। इन संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की जरूरतें और विशेषज्ञता अलग-अलग हो सकती हैं।
ऐसे में विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित करने से कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र से संबंधित ज्ञान और कौशल हासिल करने के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि पाठ्यक्रमों की विषयवस्तु प्रासंगिक हो, उन्हें सरल डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जाए और समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाए।
विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश
ICAR की समीक्षा बैठक में पाठ्यक्रम विकास के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. एम. एल. जाट ने संस्थानों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पाठ्यक्रम तैयार करें और उन्हें अपलोड करने से पहले उचित Internal Review प्रक्रिया पूरी करें।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण सामग्री स्पष्ट, उपयोगी और संबंधित विषय के अनुरूप हो। डिजिटल पाठ्यक्रम तैयार करते समय केवल जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होता। सामग्री को इस तरह व्यवस्थित करना भी आवश्यक है कि कर्मचारी उसे आसानी से समझ सकें और अपने काम में उपयोग कर सकें।
विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास में विशेषज्ञों की भागीदारी, सही तथ्यों का उपयोग, स्पष्ट Learning Objectives और व्यवस्थित प्रस्तुति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना भी जरूरी है, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लक्ष्य प्रभावित न हों।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सभी ICAR संस्थान अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें और निर्धारित Course Upload Targets को पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करें।
कृषि अनुसंधान संस्थानों में क्षमता निर्माण को मिलेगी मजबूती
कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए वैज्ञानिक तरीकों, तकनीकों और कार्य प्रणालियों का विकास हो रहा है। ऐसे में कर्मचारियों की क्षमताओं को समय के साथ विकसित करना संस्थानों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
Capacity Building यानी क्षमता निर्माण का उद्देश्य कर्मचारियों के ज्ञान, कौशल और कार्य निष्पादन की क्षमता को बेहतर बनाना है। इसके अंतर्गत विषय से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ डिजिटल दक्षता, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यावसायिक कौशल भी शामिल हो सकते हैं।
ICAR के संदर्भ में विषय-विशिष्ट ऑनलाइन पाठ्यक्रम संस्थानों को प्रशिक्षण गतिविधियों को व्यवस्थित करने का अवसर दे सकते हैं। डिजिटल माध्यम से तैयार सामग्री को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को समान विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, नियमित Learning से कर्मचारियों को अपनी विशेषज्ञता को अपडेट रखने और बदलती कार्य आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण सामग्री केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि कर्मचारियों के वास्तविक कार्यों से जुड़ी हो।
डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने समय पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई
बैठक की शुरुआत में ICAR के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत परिषद के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए सभी ICAR संस्थानों द्वारा समय पर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने और राष्ट्रीय स्तर पर ICAR की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए संस्थानों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसके लिए पाठ्यक्रम विकास, डिजिटलीकरण और नियमित Learning से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
किसी बड़े संस्थागत नेटवर्क में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए केवल केंद्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होता। संबंधित संस्थानों को अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार कार्य करना, प्रगति की समीक्षा करना और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना भी आवश्यक होता है।
इस दृष्टि से बैठक में संस्थानों की भागीदारी और समयबद्ध कार्य निष्पादन को महत्व दिया गया। नियमित समीक्षा से पाठ्यक्रम विकास की प्रगति पर नजर रखने और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में आने वाली संभावित बाधाओं को पहचानने में सहायता मिल सकती है।
कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ ने समझाई पाठ्यक्रम डिजिटलीकरण की प्रक्रिया
बैठक के दौरान कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ श्री अश्विन ने प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम सामग्री विकसित करने और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पाठ्यक्रम विकास के लिए उपलब्ध सूचीबद्ध एजेंसियों के बारे में भी बताया।
इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्तापूर्ण विषय-विशिष्ट Learning Material तैयार करने और उसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से संबंधित तकनीकी सुझाव साझा किए।
पाठ्यक्रमों का डिजिटलीकरण ऑनलाइन प्रशिक्षण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण सामग्री को डिजिटल प्रारूप में तैयार करना, उसे उपयुक्त ढंग से व्यवस्थित करना और संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना शामिल है। इस प्रक्रिया में तकनीकी मानकों तथा सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
बैठक में दी गई जानकारी का उद्देश्य ICAR संस्थानों को पाठ्यक्रम विकास और अपलोड प्रक्रिया में सहायता प्रदान करना था, ताकि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपना कार्य पूरा कर सकें।
Mission Karmayogi के तहत संस्थागत जवाबदेही पर जोर
मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमताओं को मजबूत करना और सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित बनाने में सहायता करना है। इस संदर्भ में डिजिटल Learning और नियमित प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
ICAR में इस पहल के अंतर्गत विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों का विकास कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसके लिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, कर्मचारियों की भागीदारी और पाठ्यक्रमों की समय पर उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
संस्थागत स्तर पर नियमित समीक्षा, जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और निर्धारित समयसीमा का पालन प्रशिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने में योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों की उपयोगिता का आकलन करना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि यह समझा जा सके कि प्रशिक्षण से कर्मचारियों के ज्ञान और कार्य निष्पादन में किस प्रकार सुधार हो रहा है।
बैठक के समापन पर पाठ्यक्रम विकास और डिजिटलीकरण में तेजी लाने, आंतरिक समीक्षा के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित करने, निर्धारित Learning Hours पूरे करने और समयसीमा के भीतर पाठ्यक्रम अपलोड करने के निर्देश दोहराए गए।
डिजिटल प्रशिक्षण से मजबूत होगी ICAR की कार्यक्षमता
ICAR की यह समीक्षा बैठक कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से जुड़े संस्थानों में डिजिटल प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर विषय-विशिष्ट पाठ्यक्रमों का विकास और नियमित Learning कर्मचारियों को अपने ज्ञान तथा व्यावसायिक कौशल को बेहतर बनाने के अवसर प्रदान कर सकता है।
डॉ. एम. एल. जाट द्वारा नियमित रूप से कम से कम दो घंटे Learning करने और पाठ्यक्रमों को निर्धारित समयसीमा में अपलोड करने पर दिया गया जोर इस पहल के कार्यान्वयन को महत्व देता है। वहीं, डॉ. यशपाल सिंह मलिक और कर्मयोगी भारत के विशेषज्ञ द्वारा साझा किए गए निर्देश तथा तकनीकी सुझाव संस्थानों को इस प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से दिए गए।
आगे इस पहल की सफलता पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, संस्थानों की सक्रिय भागीदारी और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर निर्भर करेगी। यदि डिजिटल Learning को कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ा जाता है, तो इससे ICAR की संस्थागत क्षमता मजबूत करने और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।