Natural Farming UP: अब खेतों की खोई ताकत लौटाने की तैयारी, कृषि मंत्री शाही ने किया बड़ा ऐलान

Natural Farming in UP: Plans underway to restore the lost vitality of farmlands; Agriculture Minister Shahi makes a major announcement.

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Natural Farming UP: उत्तर प्रदेश में खेती की मिट्टी को स्वस्थ बनाने और किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए एक बड़ी पहल शुरू हुई है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने घोषणा की है कि ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan 2026) को जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य खेतों की घटती उर्वरा शक्ति को बचाना, रासायनिक खादों के असंतुलित इस्तेमाल को रोकना और किसानों को कम लागत वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।

कृषि मंत्री ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ के तेलीबाग स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे।

सरकार का मानना है कि यदि खेतों की मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी किसान लंबे समय तक अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकेंगे। इसी सोच के साथ Natural Farming, Soil Health Management और Sustainable Agriculture को अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

क्या है खेत बचाओ अभियान 2026?

खेत बचाओ अभियान केंद्र सरकार की एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसे रबी सीजन 2026 के दौरान चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 22 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी से हुई थी। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।

इस अभियान के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ गांवों में जाकर किसानों को आधुनिक तथा टिकाऊ खेती के तरीके समझाएंगे।

केंद्र सरकार के अनुसार, अभियान में 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 700 से अधिक जिलों और लगभग 50 हजार गांवों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान का विशेष जोर उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल, मिट्टी की जांच, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और जल संरक्षण पर है।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को क्या संदेश दिया?

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि खेती में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक और असंतुलित इस्तेमाल मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। ऐसे में किसानों को अपनी खेती के तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है।उन्होंने किसानों को गोबर की खाद,  हरी खाद, जैविक खाद और जरूरत के अनुसार अन्य पोषक स्रोतों के संतुलित इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया।

कृषि मंत्री के अनुसार, खेत बचाओ अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे गांव-गांव तक पहुंचाकर किसानों की भागीदारी वाला अभियान बनाना होगा।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को यह समझाना भी है कि मिट्टी की देखभाल केवल एक फसल के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की खेती के लिए भी जरूरी है।

Natural Farming से किसानों को क्या फायदा होगा?

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों को स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना सिखाना है।प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन, विविध फसलों और मिट्टी की जैविक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे किसानों को कई संभावित फायदे हो सकते हैं।

  • स्थानीय संसाधनों के उपयोग से कुछ बाहरी कृषि आदानों पर होने वाला खर्च कम हो सकता है।

  • मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी संरचना सुधारने में मदद मिल सकती है।

  • खेत में पानी रोकने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

  • फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता घट सकती है।

  • लंबे समय में मिट्टी के स्वास्थ्य और खेती की स्थिरता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि प्राकृतिक खेती अपनाने से हर खेत में तुरंत पैदावार बढ़ना तय नहीं है। इसका परिणाम मिट्टी की स्थिति, फसल, मौसम और प्रबंधन पर निर्भर करेगा। इसलिए किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह से चरणबद्ध तरीके से बदलाव करना चाहिए।

Soil Health Management: मिट्टी की जांच पर सरकार का विशेष जोर

खेत बचाओ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Soil Health Management यानी मिट्टी के स्वास्थ्य का प्रबंधन है।कई बार किसान फसल की जरूरत का सही आकलन किए बिना यूरिया, डीएपी या दूसरी खादों का इस्तेमाल करते हैं। इससे कुछ पोषक तत्वों की अधिकता और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

मिट्टी की जांच से किसान जान सकते हैं कि उनके खेत में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर तथा अन्य पोषक तत्वों की स्थिति कैसी है। इसके आधार पर तैयार संतुलित पोषण योजना अनावश्यक खाद खर्च कम करने और फसल की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है।अभियान में किसानों को Soil Health Card और मिट्टी की जांच की उपयोगिता समझाई जा रही है।

गांव-गांव पहुंचेंगे कृषि वैज्ञानिक, किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण

खेत बचाओ अभियान के तहत किसान चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और खेतों में प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, संतुलित उर्वरक प्रयोग, फसल चक्र और प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी।लखनऊ के चिनहट ब्लॉक स्थित पपनामऊ गांव में 2 नवंबर को ICAR, कृषि विज्ञान केंद्र और उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के संयुक्त कार्यक्रम में 108 किसानों ने भाग लिया। इनमें 70 महिला और 38 पुरुष किसान शामिल थे।

इस कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक खेती, सरकारी कृषि योजनाओं और फसल अवशेष न जलाने के महत्व के बारे में बताया गया।

रबी सीजन में गेहूं और सरसों किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?

उत्तर प्रदेश (Natural Farming UP) में नवंबर का महीना गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।ऐसे समय में Khet Bachao Abhiyan किसानों को सही बीज, मिट्टी की स्थिति के अनुसार पोषण और सिंचाई प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

किसानों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए कि गेहूं और सरसों में खाद की मात्रा खेत की मिट्टी की जांच के अनुसार तय की जाए। साथ ही फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करना भी लाभदायक हो सकता है। धान की कटाई के बाद पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करने से मिट्टी के जैविक पदार्थों और पोषक तत्वों का संरक्षण करने में सहायता मिल सकती है।

मूंगफली और तिल उत्पादकों के लिए भी अच्छी खबर

खेत बचाओ अभियान के कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मूंगफली और तिल उत्पादक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 86,500 मीट्रिक टन मूंगफली और 43,250 मीट्रिक टन तिल की खरीद के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है।

इस प्रकार कुल 1,29,750 मीट्रिक टन खरीद का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। इससे पात्र किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के अवसर मिल सकते हैं। वास्तविक खरीद प्रक्रिया, केंद्रों और पंजीकरण संबंधी जानकारी के लिए किसानों को आधिकारिक घोषणा देखनी चाहिए।

किसानों को अभियान से कैसे जुड़ना चाहिए?

जो किसान प्राकृतिक खेती अपनाना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ब्लॉक कृषि कार्यालय या जिला कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं। किसानों को पहले मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। इसके बाद स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सहायता से अपनी फसल के लिए पोषण और सिंचाई प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए।

नई खेती की पद्धति अपनाने के लिए शुरुआत में खेत के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना समझदारी होगी। इससे किसान लागत, पैदावार और मिट्टी की स्थिति की तुलना करके आगे का निर्णय ले सकेंगे।

स्वस्थ मिट्टी से ही मजबूत होगी किसानों की अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश में खेत बचाओ अभियान को जन-आंदोलन बनाने की पहल कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। किसानों को वैज्ञानिक सलाह, मिट्टी की जांच और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जोड़कर खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। हालांकि अभियान की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गांवों तक प्रशिक्षण कितना प्रभावी ढंग से पहुंचता है और किसान इन जानकारियों को अपने खेतों में कितना अपनाते हैं।किसानों के लिए संदेश स्पष्ट है: खेत की मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी खेती का भविष्य सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेगा।

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