सामुदायिक विज्ञान तकनीकों के प्रसार पर पीएयू में कार्यशाला आयोजित, ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर सुधारने पर जोर

PAU organizes workshop on dissemination of community science techniques,

ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी नवीन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से Punjab Agricultural University (पीएयू), लुधियाना के विस्तार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग ने विस्तार शिक्षा निदेशालय के सहयोग से “सामुदायिक विज्ञान से संबंधित तकनीकों का प्रसार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पंजाब के विभिन्न जिलों में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की दस गृह वैज्ञानिकों ने भाग लिया और सामुदायिक विज्ञान की नवीनतम तकनीकों एवं विस्तार रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए विकसित वैज्ञानिक तकनीकों और नवाचारों को प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करना था। कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा तकनीकी जानकारी के तेज और प्रभावी प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

ग्रामीण विकास में गृह वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ. किरण बैंस

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि Dr. Kiran Bains, डीन, कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस, ने अपने संबोधन में कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत गृह वैज्ञानिकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकों को लोगों तक पहुंचाने में गृह वैज्ञानिकों का योगदान अमूल्य है।

उन्होंने कहा कि सामुदायिक विज्ञान केवल घरेलू प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण, स्वास्थ्य, बाल विकास, संसाधन प्रबंधन, वस्त्र विज्ञान और महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाकर उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

डॉ. बैंस ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने-अपने जिलों में सामुदायिक विज्ञान की नवीन तकनीकों और नवाचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इनका लाभ उठा सकें।

विशेषज्ञों ने साझा कीं नवीन तकनीकें और विस्तार रणनीतियां

कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों से संबंधित नवीन तकनीकों, व्यावहारिक हस्तक्षेपों और विस्तार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक समय में सामुदायिक विज्ञान का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसमें विकसित तकनीकों का सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर से है। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसे अनेक नवाचारों के बारे में जानकारी दी जो कम लागत में बेहतर जीवनशैली, पोषण सुरक्षा और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा दे सकते हैं।

कार्यशाला में संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान, खाद्य एवं पोषण, मानव विकास एवं परिवार अध्ययन, विस्तार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन तथा परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभागों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध आधारित जानकारियां साझा कीं। उन्होंने यह भी बताया कि इन तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए किस प्रकार की विस्तार रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं।

पोषण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम के दौरान खाद्य एवं पोषण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने ग्रामीण परिवारों में कुपोषण की समस्या और उसके समाधान के लिए विकसित तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार, पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा पोषण शिक्षा के माध्यम से परिवारों के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।

मानव विकास एवं परिवार अध्ययन विभाग के विशेषज्ञों ने बाल विकास, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर परिवारों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

इसके अलावा संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान से संबंधित विशेषज्ञों ने घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग, ऊर्जा संरक्षण और आर्थिक प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।

तकनीकी जानकारी को गांवों तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य केवल तकनीकों की जानकारी देना नहीं था, बल्कि उनके प्रभावी प्रसार की रणनीति तैयार करना भी था। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी तकनीक का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब वह अंतिम उपयोगकर्ता तक सही तरीके से पहुंचे।

इस संदर्भ में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। केवीके वैज्ञानिकों को ग्रामीण समुदाय और विश्वविद्यालय के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में देखा जाता है। कार्यशाला में इस बात पर चर्चा की गई कि आधुनिक संचार माध्यमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रदर्शन इकाइयों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सामुदायिक विज्ञान तकनीकों का प्रसार और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

विश्वविद्यालय और केवीके के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता

कार्यक्रम के दौरान Dr. Ritu Mittal Gupta, विभागाध्यक्ष, विस्तार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग, ने संसाधन व्यक्तियों और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विकसित तकनीकों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए विश्वविद्यालय और केवीके के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना समय की आवश्यकता है।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि दोनों संस्थान मिलकर कार्य करें तो सामुदायिक विज्ञान से जुड़ी तकनीकों का लाभ बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवारों के समग्र विकास में सहायता मिलेगी।

डॉ. प्रीति शर्मा ने किया प्रतिभागियों का स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत Dr. Preeti Sharma द्वारा प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में सामुदायिक विज्ञान तकनीकों के प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवारों के कल्याण के लिए विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से जागरूकता और प्रशिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव और सुझाव

कार्यशाला ने विषय विशेषज्ञों और केवीके गृह वैज्ञानिकों के बीच संवाद और ज्ञान साझा करने के लिए एक प्रभावी मंच का कार्य किया। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा की और अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यान्वयन के अनुभव साझा किए।

कई प्रतिभागियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकों के प्रसार के दौरान आने वाली चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकों को सरल भाषा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने-अपने जिलों में सामुदायिक विज्ञान से संबंधित तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इनका लाभ उठा सकें।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन Dr. Sukhdeep Kaur द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों तथा विस्तार शिक्षा निदेशालय का आभार व्यक्त किया, जिसने इस कार्यशाला के आयोजन के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया।

यह कार्यशाला सामुदायिक विज्ञान तकनीकों के प्रभावी प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण और संवाद कार्यक्रम न केवल वैज्ञानिक जानकारी को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद करते हैं, बल्कि ग्रामीण समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करते हैं। ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में ऐसी पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 

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