भारतीय किसानों और ‘मेक इन इंडिया’ पर खतरा, पीएमएफएआई ने डेटा प्रोटेक्शन प्रस्ताव का किया विरोध

PMFAI opposes data protection proposal, a threat to Indian farmers and 'Make in India'

भारत के घरेलू एग्रोकेमिकल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख संस्था Pesticides Manufacturers & Formulators Association of India (PMFAI) ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) द्वारा प्रस्तावित “रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन” (RDP) या “डेटा एक्सक्लूसिविटी” व्यवस्था का कड़ा विरोध किया है। संस्था ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आगामी पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल (PMB) या भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में इस प्रावधान को शामिल किया गया, तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों किसानों, घरेलू उद्योगों और “मेक इन इंडिया” अभियान पर पड़ेगा।

PMFAI के अनुसार, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और आयात लॉबी भारत में पेटेंट अवधि समाप्त होने के बाद भी कुछ कीटनाशकों पर अतिरिक्त 5 वर्षों की डेटा सुरक्षा चाहती हैं। संस्था का कहना है कि यह मांग पूरी तरह “TRIPS-Plus” श्रेणी में आती है, जो भारतीय संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के खिलाफ है।

किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

PMFAI ने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है, जिनके पास औसतन 1 से 5 एकड़ तक भूमि होती है। ऐसे किसानों के लिए खेती की लागत और कृषि निवेश की कीमतें सबसे महत्वपूर्ण होती हैं।

संस्था का दावा है कि यदि डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू होती है, तो घरेलू कंपनियां पेटेंट खत्म होने के बाद भी सस्ती जेनेरिक दवाएं और कीटनाशक बाजार में नहीं ला पाएंगी। इससे बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एकाधिकार बढ़ेगा और किसानों को महंगे दामों पर कीटनाशक खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

PMFAI के अनुसार, इस व्यवस्था से फसल सुरक्षा रसायनों की कीमतें मौजूदा दरों की तुलना में 35% से 50% तक बढ़ सकती हैं। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

संसद की समिति पहले ही कर चुकी है विरोध

PMFAI ने याद दिलाया कि संसद की कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 36वीं रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा था कि एग्रोकेमिकल्स के लिए अलग से डेटा प्रोटेक्शन की जरूरत नहीं है।

समिति का मानना था कि भारत में पहले से मौजूद 20 वर्ष की पेटेंट सुरक्षा अवधि किसी भी वैश्विक कंपनी को अपने निवेश की भरपाई और लाभ कमाने के लिए पर्याप्त समय देती है। ऐसे में अतिरिक्त डेटा सुरक्षा देना अनुचित होगा।

पुरानी दवाओं को नए रूप में बेचने का आरोप

संस्था ने आरोप लगाया कि कुछ पश्चिमी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय नीति निर्माताओं को यह कहकर भ्रमित कर रही हैं कि RDP लागू होने से ही नई तकनीक और नए कीटनाशक भारत आएंगे। जबकि वास्तविक आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते।

PMFAI के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद भारत में जिन नए कीटनाशक पेटेंट को मंजूरी मिली, उनमें से हर 10 में से 6 उत्पाद भारतीय बाजार में कभी लॉन्च ही नहीं किए गए, जबकि उन्हें वैश्विक स्तर पर बेचा गया।

संस्था का आरोप है कि अब वही कंपनियां पेटेंट समाप्त हो चुके या समाप्ति के करीब पुराने रसायनों को फिर से “नई खोज” बताकर भारतीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की कोशिश कर रही हैं।

MSME उद्योगों को होगा नुकसान

PMFAI ने कहा कि वैश्विक एग्रोकेमिकल बाजार में लगभग 90% हिस्सा जेनेरिक उत्पादों का है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक बन चुका है और इसका बड़ा श्रेय देश के MSME सेक्टर को जाता है।

यदि डेटा प्रोटेक्शन लागू होता है, तो घरेलू माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) कई वर्षों तक सस्ते विकल्प बाजार में नहीं ला पाएंगे। इससे भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर होगी और निर्यात पर भी असर पड़ेगा।

संस्था ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” विजन के विपरीत होगा।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

PMFAI ने प्रधानमंत्री कार्यालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से अपील की है कि वे घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा करें।

संस्था ने कहा कि सरकार को संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों का सम्मान करते हुए पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल और किसी भी व्यापार समझौते में डेटा प्रोटेक्शन संबंधी प्रावधानों को शामिल नहीं करना चाहिए।

बिना RDP के भी भारत में तेज़ी से आ रही नई तकनीक

PMFAI ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत में बिना डेटा एक्सक्लूसिविटी के भी नई तकनीक और नए कीटनाशकों का प्रवेश तेजी से हो रहा है।

पिछले दो वर्षों में भारत में 36 नए कीटनाशक अणुओं (molecules) का पंजीकरण हुआ है, यानी औसतन हर महीने 1.5 नए उत्पाद बाजार में आए हैं। संस्था का दावा है कि यह गति उन देशों से भी अधिक है, जहां पहले से डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू है, जैसे ब्राजील, मलेशिया और थाईलैंड।

PMFAI का कहना है कि भारत का विशाल कृषि क्षेत्र और बड़ा बाजार खुद ही वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करता है, इसलिए अतिरिक्त डेटा सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है।

1967 से सक्रिय है PMFAI

Pesticides Manufacturers & Formulators Association of India की स्थापना वर्ष 1967 में हुई थी। यह संस्था देश के एग्रोकेमिकल, एग्री-बायोलॉजिकल और अन्य कृषि इनपुट उद्योगों का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान में इसके साथ 220 से अधिक बड़े, मध्यम और छोटे उद्योग जुड़े हुए हैं।

PMFAI के अध्यक्ष Pradip Dave ने कहा कि सरकार को किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी प्रकार के डेटा एक्सक्लूसिविटी प्रावधान को खारिज करना चाहिए, ताकि भारतीय कृषि और उद्योग दोनों सुरक्षित रह सकें।

 

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