PMMSY से बढ़ा मत्स्य उत्पादन, पारंपरिक मछुआरों को मिला संरक्षण और आधुनिक तकनीकों का सहारा

PMMSY boosts fish production, provides protection and modern technology to traditional fishermen

Blue Economy को मिलेगी नई गति

Blue Economy को मिलेगी नई गति

भारत सरकार Blue Economy को मजबूत बनाने और मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के माध्यम से देशभर में मत्स्य क्षेत्र का तेजी से विकास कर रही है। लोकसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि योजना के तहत आधुनिक Fisheries Infrastructure, Aquaculture Development, पारंपरिक मछुआरों के संरक्षण और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है।

सरकार के अनुसार PMMSY के प्रभाव से देश में मछली उत्पादन, मत्स्य निर्यात, रोजगार और जलीय कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही पारंपरिक समुद्री मत्स्य पालन को सुरक्षित और टिकाऊ (Sustainable Fisheries) बनाने के लिए कई संरक्षण उपाय भी लागू किए गए हैं।

₹21,461 करोड़ की परियोजनाओं को मिली मंजूरी

सरकार ने बताया कि वर्ष 2020-21 से अब तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PMMSY के तहत ₹21,461 करोड़ लागत की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें ₹9,571 करोड़ का केंद्रीय अंश शामिल है, जबकि विभिन्न राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों को अब तक ₹6,205 करोड़ से अधिक की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से तालाब विकास, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड चेन, फिश प्रोसेसिंग, बाजार संपर्क, आधुनिक जलीय कृषि और मूल्य संवर्धन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देश का Fish Production

PMMSY के लागू होने के बाद भारत के मत्स्य क्षेत्र में तेज़ विकास देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का Fish Production वर्ष 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

इसी अवधि में Fish Export भी ₹46,663 करोड़ से बढ़कर ₹73,890 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे भारत की वैश्विक समुद्री उत्पाद बाजार में स्थिति और मजबूत हुई है।

सरकार ने बताया कि मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यों में अब तक 58 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

सितंबर 2026 तक जारी रहेगी PMMSY

सरकार ने जानकारी दी कि नीति आयोग ने PMMSY के प्रभाव का मूल्यांकन किया है। अध्ययन में योजना के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इसे जारी रखने की सिफारिश की गई है। इसी के आधार पर योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के तहत ₹2,500 करोड़ का केंद्रीय बजट भी निर्धारित किया गया है।

Fish Farmers Producer Organisations को मिलेगा बढ़ावा

मछुआरों और मत्स्य किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए PMMSY के अंतर्गत Fish Farmers Producer Organisations (FFPOs) के गठन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों में सरकार ने 2,195 FFPOs के गठन हेतु ₹544.86 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस सहायता में Incubation Cost, Management Support और Equity Grant शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि FFPO के माध्यम से छोटे मत्स्य किसान संगठित होकर बेहतर बाजार, उचित मूल्य और आधुनिक तकनीकों का लाभ उठा सकेंगे।

पारंपरिक मछुआरों के संरक्षण पर विशेष ध्यान

सरकार ने स्पष्ट किया कि Fisheries संविधान के अनुसार राज्य का विषय है। प्रत्येक तटीय राज्य अपने Marine Fisheries Regulation Act (MFRA) के तहत समुद्री मत्स्य गतिविधियों को नियंत्रित करता है।

इन कानूनों के अंतर्गत—

जैसे प्रावधान लागू किए गए हैं ताकि समुद्री संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के लिए आधुनिक पहल

PMMSY के तहत समुद्री पर्यावरण और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

सरकार का कहना है कि इन पहलों से तटीय क्षेत्रों पर मत्स्य दबाव कम होगा और समुद्री जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

ICAR-CMFRI ने बताया समुद्री मत्स्य भंडार सुरक्षित

ICAR-Central Marine Fisheries Research Institute (ICAR-CMFRI) के अनुसार वर्ष 2021-2025 के दौरान ट्रॉल आधारित मछली पकड़ने में कोई उल्लेखनीय गिरावट दर्ज नहीं की गई है।

संस्थान की रिपोर्ट Marine Fish Stock Status of India (2022) के अनुसार भारतीय Exclusive Economic Zone (EEZ) में आकलित 135 Fish Stocks में से 91.1 प्रतिशत पूरी तरह Sustainable पाए गए हैं।

यह रिपोर्ट इस बात का संकेत देती है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और नियामक उपायों के कारण भारत के समुद्री मत्स्य संसाधन अभी भी स्वस्थ स्थिति में हैं।

11,000 किलोमीटर तटरेखा की हो रही वैज्ञानिक निगरानी

ICAR-CMFRI देश की लगभग 11,000 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा पर स्थित 1,300 से अधिक Fish Landing Centres से नियमित डेटा एकत्र करता है।

यह संस्थान आधुनिक Statistical Sampling System और FAO Guidelines के अनुरूप मत्स्य उत्पादन, जैव विविधता, समुद्री पारिस्थितिकी, Benthic Ecosystem तथा Trawl Fishing के प्रभावों की निरंतर निगरानी करता है। इससे भविष्य की नीतियों को वैज्ञानिक आधार मिलता है और समुद्री संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन सुनिश्चित होता है।

Blue Economy को मिलेगी नई गति

सरकार का मानना है कि PMMSY केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं बल्कि भारत की Blue Economy को मजबूत करने का व्यापक अभियान है। आधुनिक अवसंरचना, वैज्ञानिक मत्स्य पालन, निर्यात वृद्धि, पारंपरिक मछुआरों के संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से यह योजना ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही है। आने वाले वर्षों में इससे लाखों मछुआरों, मत्स्य किसानों और युवाओं को बेहतर रोजगार, अधिक आय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

 

Exit mobile version