देश में रबी सीजन की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के लिए input supply, fertilizer availability, crop planning, disaster management और market support को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम में बदलाव, बारिश की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों तक जरूरी कृषि संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने पर सरकार का विशेष ध्यान है।
सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए देश में कुल 373.93 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही किसानों को soil testing के आधार पर खाद के इस्तेमाल, कम पानी वाली फसलों, दलहन-तिलहन और मोटे अनाजों की खेती तथा आधुनिक technology अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
रबी सीजन के लिए राज्यों के साथ बनाई गई रणनीति
रबी की तैयारियों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच लगातार चर्चा की गई। कृषि क्षेत्र में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए अलग-अलग राज्यों की जरूरतों, मौसम की स्थिति, पानी की उपलब्धता और प्रमुख फसलों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की गई हैं।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में राज्यों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों और कृषि मंत्रियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। इसके आधार पर रबी सीजन के लिए विभिन्न राज्यों की जरूरतों के अनुरूप action plan तैयार किया गया।
इस बार खासतौर पर input availability, crop diversification, irrigation, soil health, credit, procurement और digital agriculture जैसे विषयों को रबी की तैयारी से जोड़ा गया है।
2026-27 में 177.72 मिलियन टन रबी उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने आगामी कृषि वर्ष के लिए कुल 373.93 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें रबी फसलों की हिस्सेदारी 177.72 मिलियन टन रखी गई है।
पिछले कृषि वर्ष में देश ने खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के लिए 362.60 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि उत्पादन 376.56 मिलियन टन तक पहुंचा।
इस बार मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए production planning की जा रही है। जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां अधिक water-intensive crops के बजाय ऐसी फसलों को बढ़ावा देने की योजना है जिन्हें अपेक्षाकृत कम पानी में उगाया जा सकता है।
दलहन, तिलहन और मोटे अनाज पर बढ़ेगा फोकस
रबी सीजन में crop diversification को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को pulses, oilseeds और millets जैसी फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार crop selection में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में दलहन और तिलहन की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
खरीफ सीजन के दौरान भी उड़द, तुअर, बाजरा, ज्वार, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज होने की जानकारी दी गई थी।
देश में 163 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा fertilizer stock
रबी सीजन में किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सबसे अहम मुद्दों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में fertilizer prices में तेजी के बावजूद केंद्र सरकार ने देश में पर्याप्त stock होने की जानकारी दी है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने करीब 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है। इसके मुकाबले देश में फिलहाल 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक fertilizer stock उपलब्ध बताया गया है।
पिछले वर्ष इसी समय यह stock लगभग 122 लाख मीट्रिक टन था।
DAP, Urea और NPK सहित विभिन्न fertilizers की supply को लेकर राज्यों के साथ लगातार coordination किया जा रहा है। सरकार ने यह भी कहा है कि global market में fertilizer prices बढ़ने का अतिरिक्त बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद देने की तैयारी
सरकार अब केवल fertilizer availability पर ही नहीं, बल्कि fertilizer के balanced use पर भी जोर दे रही है।
कृषि मंत्री के अनुसार कुछ राज्यों के चुनिंदा जिलों में soil testing के आधार पर fertilizer application का pilot project चलाया गया। इस प्रयोग में किसानों को उनकी जमीन और फसल की आवश्यकता के अनुसार खाद की मात्रा बताई गई।
सरकार के अनुसार इससे संबंधित क्षेत्रों में fertilizer consumption करीब 27 प्रतिशत तक कम हुआ और लगभग 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई।
अब इस approach को बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों की अनावश्यक input cost को कम करना और जमीन की fertility को बनाए रखना है।
22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’
इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने की योजना है।
इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक और field-level agriculture teams गांवों और किसानों तक पहुंचेंगी। ICAR, KVK, ATMA तथा राज्य कृषि विभाग से जुड़े विशेषज्ञ किसानों को practical guidance देने पर काम करेंगे।
अभियान में soil testing, balanced fertilizer use, crop selection, improved varieties, water management और Kisan Credit Card जैसी सुविधाओं से किसानों को जोड़ने पर जोर रहेगा।
इसका उद्देश्य खेती में वैज्ञानिक सलाह को केवल laboratory या office तक सीमित न रखकर उसे सीधे खेत तक पहुंचाना है।
कम बारिश वाले क्षेत्रों में बदलेगा crop pattern
इस साल मानसून की असमानता ने कई राज्यों में खेती की planning को प्रभावित किया। हालांकि सरकार के अनुसार कुल खरीफ sowing area में करीब एक प्रतिशत की ही कमी रही।
धान के रकबे में लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी बताई गई है। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी कुछ गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर कई क्षेत्रों में दलहन, तिलहन और millets का area बढ़ा है।
आगे भी जिन क्षेत्रों में groundwater, reservoir या soil moisture की स्थिति कमजोर है, वहां crop planning को उसी के अनुसार बदलने पर जोर रहेगा।
बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों के लिए field assessment
इस साल भारी बारिश, बाढ़ और सूखे से कुछ राज्यों में फसलों को नुकसान की प्रारंभिक जानकारी सामने आई है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है।
सरकार के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत assessment कराया जा रहा है। इसके लिए 3 अक्टूबर से केंद्रीय टीमें कुछ राज्यों का दौरा करेंगी।
आपदा प्रभावित राज्यों को SDRF के माध्यम से तत्काल राहत और आवश्यकता के अनुसार NDRF से अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों में कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की जरूरत वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है।
MSP से कम कीमत मिलने पर procurement support
किसानों के लिए market price एक बड़ी चिंता है। खासकर दलहन और तिलहन के मामले में सरकार ने procurement mechanism को मजबूत करने की बात कही है।
यदि बाजार में इन फसलों की कीमत MSP से नीचे आती है, तो PM-AASHA के तहत procurement को सक्रिय किया जा सकता है।
सरकार के अनुसार यदि राज्यों की ओर से खरीद प्रक्रिया शुरू करने में देरी होती है तो NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियां सीधे खरीद प्रक्रिया में भाग ले सकती हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को दबाव में अपनी उपज कम कीमत पर बेचने की स्थिति से बचाना है।
राज्यों को कृषि योजनाओं के लिए 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जारी
कृषि योजनाओं के implementation के लिए राज्यों को समय पर financial support देने पर भी जोर दिया गया है।
कृषि मंत्री के अनुसार RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत राज्यों को पहले लगभग 4,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। इसके बाद 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि जारी की गई है।
इस तरह इन योजनाओं के तहत राज्यों को 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
इसका उद्देश्य राज्यों को कृषि योजनाओं के execution के लिए पर्याप्त financial resources उपलब्ध कराना है।
Farmer ID और AgriStack से बढ़ेगा digital agriculture
देश में agriculture को digital platform से जोड़ने की प्रक्रिया भी जारी है। सरकार AgriStack और Farmer ID के माध्यम से किसानों की digital identity और agricultural information को एक structured system से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
इसके जरिए किसानों तक government schemes, advisory services और अन्य कृषि सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
Digital agriculture का इस्तेमाल आने वाले समय में crop planning, scheme delivery और किसानों को targeted services देने में भी किया जा सकता है।
FTA से किसानों को international market से जोड़ने की कोशिश
कृषि उत्पादों के लिए घरेलू बाजार के साथ export market को भी महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
विभिन्न देशों के साथ हुए Free Trade Agreements यानी FTA के तहत भारतीय कृषि उत्पादों के लिए उपलब्ध बाजार अवसरों की जानकारी किसानों और राज्यों तक पहुंचाने की योजना है।
हालांकि global market में प्रवेश के लिए quality, grading, processing, packaging, traceability और international standards को पूरा करना भी जरूरी होगा। इसलिए किसानों को production के साथ post-harvest management और value addition से जोड़ना महत्वपूर्ण रहेगा।
Red Rot और Pink Bollworm पर वैज्ञानिकों का फोकस
फसल रोग और कीट किसानों की productivity को प्रभावित करते हैं। गन्ने में Red Rot तथा कपास में Pink Bollworm जैसी समस्याओं से निपटने के लिए research institutions नई तकनीक और resistant varieties पर काम कर रहे हैं।
फसल रोगों का शुरुआती स्तर पर पता लगाना, resistant varieties का इस्तेमाल और integrated pest management किसानों के लिए नुकसान कम करने के महत्वपूर्ण तरीके हो सकते हैं।
पराली जलाने के मुद्दे पर किसान-केंद्रित समाधान पर जोर
रबी सीजन शुरू होने के साथ दिल्ली-NCR में crop residue management का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को केवल पराली जलाने के लिए दोषी ठहराने के बजाय practical solutions उपलब्ध कराने पर जोर होना चाहिए।
सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में air pollution में stubble burning की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत बताई गई थी, जो अब लगभग 2.5 प्रतिशत रहने का दावा किया गया है।
Crop residue management के लिए किसानों को machinery, technology और alternative uses की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
पराली से biomass, fodder और अन्य उपयोगी products तैयार करने की संभावनाएं भी इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान का हिस्सा हो सकती हैं।
रबी अभियान में ‘किसान से खेत तक’ पहुंचेगी तकनीक
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 में सामने आई योजनाओं को देखें तो इस बार सरकार का फोकस केवल production target हासिल करने तक सीमित नहीं है। Soil health, fertilizer efficiency, water management, crop diversification, digital agriculture, procurement और disaster management को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
रबी सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मौसम के साथ-साथ खेती की बढ़ती लागत और बाजार का जोखिम है। ऐसे में समय पर fertilizer supply, quality seed, institutional credit, scientific advisory और procurement support की उपलब्धता सीधे तौर पर खेती की economics को प्रभावित करेगी।
आने वाले महीनों में इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र और राज्यों के स्तर पर तैयार किए गए निर्णय कितनी प्रभावी तरीके से गांव, किसान और खेत तक पहुंचते हैं।
रबी 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन लक्ष्य, fertilizer के बड़े stock, balanced nutrient management, MSP-linked procurement, Farmer ID, AgriStack और crop diversification जैसी पहलों के जरिए कृषि क्षेत्र को अधिक resilient और resource-efficient बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों के लिए यह रबी सीजन मौसम, लागत और बाजार—तीनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण रहने वाला है।
