खरीफ महाअभियान को सफल बनाने की तैयारी तेज, किसानों को वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

Preparations to make Kharif Mahaabhiyan a success sharpened,

आगामी खरीफ सीजन को सफल बनाने और किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जिला कृषि विभाग द्वारा जिला स्तरीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों तथा विभिन्न प्रखंडों से आए कृषि कर्मियों ने भाग लिया।

कार्यशाला के दौरान खरीफ मौसम की तैयारियों, फसल आच्छादन लक्ष्यों, बीज वितरण, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और किसानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कृषि कर्मियों को निर्देश दिया कि वे किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाएं ताकि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

खरीफ फसलों के लक्ष्य पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम में बताया गया कि जिले में खरीफ मौसम के लिए विभिन्न फसलों का व्यापक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान की खेती के लिए सबसे अधिक क्षेत्र निर्धारित किया गया है, जबकि दलहन, तिलहन, मक्का और मोटे अनाजों के उत्पादन को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

कृषि अधिकारियों ने कहा कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ पोषक अनाजों की खेती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर आय के अवसर मिलने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

10 जून से शुरू होगा बीज और कृषि उपादानों का वितरण

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि किसानों के बीच उन्नत बीजों और अन्य कृषि उपादानों का वितरण 10 जून से सभी प्रखंडों में शुरू किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अधिकारियों ने कहा कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने से किसानों को खरीफ फसलों की बुआई में सुविधा मिलेगी और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

ग्राम पंचायतों में लगेंगी कृषि जनकल्याण चौपाल

किसानों तक कृषि योजनाओं और नई तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के लिए 11 जून से 30 जून तक सभी ग्राम पंचायतों में कृषि जनकल्याण चौपाल आयोजित किए जाएंगे।

इन चौपालों में किसानों को उन्नत खेती, फसल प्रबंधन, जैविक खेती, कृषि यंत्रीकरण, सरकारी अनुदान योजनाओं और मौसम आधारित कृषि सलाह की जानकारी दी जाएगी। कृषि विभाग का मानना है कि गांव स्तर पर ऐसे कार्यक्रम किसानों को जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वैज्ञानिक खेती और कीट प्रबंधन पर दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ फसलों की वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप उर्वरकों के उपयोग, जल संरक्षण तकनीकों और समेकित कीट प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से लागत कम की जा सकती है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

फार्मर रजिस्ट्री अभियान पर विशेष जोर

बैठक में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है और शेष किसानों को भी जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कृषि विभाग के अनुसार भविष्य में कई सरकारी योजनाओं, कृषि अनुदान, फसल क्षति सहायता तथा सरकारी खरीद योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान पंजीकरण और फार्मर आईडी महत्वपूर्ण होगी।

जैविक और टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा

कार्यशाला में जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और जैविक विकल्पों को अपनाने से खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बन सकती है।

विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक खेती के विभिन्न तरीकों की जानकारी देने पर जोर दिया।

कृषि कर्मियों को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारियों ने प्रखंड स्तर पर कार्यरत कृषि समन्वयकों, तकनीकी प्रबंधकों और किसान सलाहकारों से कहा कि वे किसानों तक योजनाओं और तकनीकों की सही जानकारी पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि खरीफ महाअभियान की सफलता तभी संभव है जब खेत स्तर तक तकनीकी सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। इसके लिए कृषि विभाग और कृषि कर्मियों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

जिले में खरीफ महाअभियान को लेकर शुरू की गई तैयारियों से उम्मीद है कि इस वर्ष फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को आधुनिक तकनीकों का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

 

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