रबी सीजन 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य करीब 177.72 मिलियन टन रखा है। इस लक्ष्य के साथ सरकार का ध्यान रबी फसलों की समय पर बुवाई, पर्याप्त कृषि इनपुट की उपलब्धता और किसानों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने पर है। कमजोर और असमान मानसून की स्थिति तथा El Niño की संभावनाओं को देखते हुए रबी सीजन की तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रबी फसलें भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। गेहूं, चना, मसूर, सरसों और अन्य प्रमुख फसलों का उत्पादन इसी मौसम में होता है। इसलिए रबी सीजन में उत्पादन बेहतर बनाए रखने के लिए बुवाई से पहले ही कृषि संबंधी तैयारियों को मजबूत करना जरूरी होता है।
177.72 मिलियन टन का लक्ष्य
सरकार ने रबी 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 177.72 मिलियन टन निर्धारित किया है। यह लक्ष्य देश की खाद्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
रबी उत्पादन में गेहूं की हिस्सेदारी प्रमुख रहती है। इसके साथ दलहन और अन्य फसलों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए कुल खाद्यान्न उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग फसलों की उत्पादकता और बुवाई क्षेत्र दोनों पर ध्यान देना होगा।
उत्पादन लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे बुवाई क्षेत्र, मौसम, सिंचाई, बीज, उर्वरक और कृषि तकनीक जैसे कई कारक जुड़े होते हैं। इन सभी क्षेत्रों में बेहतर तैयारी रहने पर निर्धारित लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना आसान हो सकता है।
कमजोर मानसून से बढ़ी चुनौती
रबी फसलों की बुवाई मुख्य रूप से मानसून के बाद शुरू होती है। खरीफ सीजन में हुई बारिश का असर मिट्टी की नमी और जलाशयों में उपलब्ध पानी पर पड़ता है। ऐसे में यदि मानसून कमजोर या असमान रहता है तो रबी फसलों की सिंचाई और शुरुआती बुवाई की परिस्थितियां प्रभावित हो सकती हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं होती। कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश कम रहने से मिट्टी में नमी की स्थिति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि रबी सीजन की तैयारी में क्षेत्रवार परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में किसान अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं, लेकिन वर्षा पर अधिक निर्भर क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता रबी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।
El Niño की संभावना पर नजर
रबी 2026-27 की तैयारी के दौरान El Niño की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। El Niño एक जलवायु घटना है, जिसका प्रभाव वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ सकता है। भारत में मानसून और तापमान की परिस्थितियों को लेकर भी इसके प्रभाव की चर्चा होती है।
हालांकि किसी भी मौसम घटना का वास्तविक प्रभाव कई अन्य मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए रबी सीजन के लिए केवल एक मौसम संकेतक के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय लगातार मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
सरकार और कृषि विभागों के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है। खासकर बुवाई के समय, सिंचाई प्रबंधन और फसल चयन से संबंधित सलाह किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
गेहूं उत्पादन पर विशेष ध्यान
रबी सीजन में गेहूं देश की प्रमुख फसल है और कुल खाद्यान्न उत्पादन में इसका बड़ा योगदान रहता है। इसलिए 177.72 मिलियन टन के लक्ष्य को हासिल करने में गेहूं उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
गेहूं की बुवाई का सही समय उत्पादन और उत्पादकता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। किसानों को समय पर प्रमाणित बीज, उर्वरक और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से खेती की तैयारी बेहतर तरीके से की जा सकती है।
बुवाई में देरी होने पर कई क्षेत्रों में तापमान की स्थिति फसल की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रबी सीजन शुरू होने से पहले कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
खाद और बीज की उपलब्धता अहम
रबी उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने के लिए खाद और बीज की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। DAP, यूरिया और अन्य उर्वरकों की जरूरत फसल और मिट्टी के अनुसार होती है। किसानों को सही समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होने पर खेती की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसी तरह प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता रबी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। कृषि विभागों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि किसानों तक आवश्यक कृषि इनपुट समय पर पहुंचें।
उर्वरकों के मामले में केवल उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनका संतुलित और उचित उपयोग भी जरूरी है। मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के आधार पर पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने से कृषि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।
दलहन और तिलहन भी महत्वपूर्ण
रबी सीजन में गेहूं के अलावा चना, मसूर, मटर जैसी दलहन फसलों तथा सरसों जैसी तिलहन फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य में इन फसलों का योगदान भी महत्वपूर्ण है।
दलहन उत्पादन बढ़ने से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इसी तरह तिलहन उत्पादन देश की खाद्य तेल जरूरतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए रबी सीजन की रणनीति में गेहूं के साथ दलहन और तिलहन फसलों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
फसल विविधीकरण और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। जहां पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां कृषि सलाह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
सिंचाई व्यवस्था की भूमिका
रबी फसलों के लिए सिंचाई की उपलब्धता उत्पादन का एक महत्वपूर्ण आधार है। जिन क्षेत्रों में नहर, ट्यूबवेल या अन्य सिंचाई साधन उपलब्ध हैं, वहां किसान मौसम की अनिश्चितता के बीच फसल को आवश्यक पानी दे सकते हैं।
कमजोर या असमान मानसून की स्थिति में सिंचाई संसाधनों पर निर्भरता बढ़ सकती है। ऐसे में जल संसाधनों का उचित प्रबंधन जरूरी होगा। किसानों के लिए सिंचाई का समय और मात्रा फसल की जरूरत के अनुसार तय करना महत्वपूर्ण रहेगा।
जल संरक्षण और बेहतर सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल भी रबी उत्पादन में उपयोगी हो सकता है। इससे उपलब्ध पानी का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसानों तक समय पर पहुंचे कृषि सलाह
मौसम में बदलाव और रबी सीजन की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों तक समय पर कृषि सलाह पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। बुवाई का समय, बीज की मात्रा, सिंचाई, उर्वरक उपयोग और फसल सुरक्षा जैसे विषयों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
कृषि विभागों, कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य कृषि संस्थानों की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाती है। मौसम संबंधी जानकारी के साथ स्थानीय कृषि सलाह उपलब्ध होने से किसान बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी खेती की योजना बना सकते हैं।
उत्पादन लक्ष्य के लिए सामूहिक तैयारी जरूरी
177.72 मिलियन टन का रबी खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल खेत स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों, कृषि विभागों, कृषि संस्थानों, उर्वरक एवं बीज कंपनियों तथा किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा।
रबी सीजन से पहले कृषि इनपुट की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, मौसम की निगरानी और किसानों तक जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत रहना जरूरी है। साथ ही अलग-अलग राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयारी करनी होगी।
कुल मिलाकर, रबी 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य के बीच मौसम की अनिश्चितता एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। कमजोर या असमान मानसून और El Niño की संभावनाओं को देखते हुए समय पर बुवाई, पर्याप्त सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरकों की उपलब्धता और वैज्ञानिक कृषि सलाह पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि रबी सीजन की तैयारियां समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जाती हैं, तो निर्धारित उत्पादन लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए किसानों को बेहतर आधार मिल सकता है।
