रबी फसलों की आगामी तैयारियों, किसानों तक सरकारी सेवाओं की प्रभावी पहुंच और कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को लेकर रबी अभियान 2026 के तहत आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। सम्मेलन में कृषि क्षेत्र को अधिक डिजिटल, आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने के साथ-साथ किसानों की आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन डिजिटल सेवा, दलहन में आत्मनिर्भरता, डिजिटल कृषि, बागवानी तथा खाद्य तेल उत्पादन जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा के केंद्र में रहे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन विषयों पर प्रस्तुतियां देते हुए सरकार की विभिन्न पहलों, मौजूदा प्रगति और आगे की कार्ययोजना से संबंधित जानकारी साझा की।
इस दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा ने ‘डिजिटल सेवा—वितरण की प्रगति एवं आगामी रोडमैप’ विषय पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। वहीं विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ पर प्रस्तुति दी। इसके अलावा बागवानी आयुक्त प्रभात कुमार ने डिजिटल कृषि मिशन तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।
किसानों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच पर जोर
रबी अभियान के दौरान कृषि विभाग के सामने प्रमुख उद्देश्यों में किसानों को समय पर आवश्यक सेवाएं, जानकारी और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना शामिल है। ऐसे में डिजिटल तकनीक कृषि सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा ने अपने प्रस्तुतिकरण में डिजिटल सेवा वितरण की प्रगति और आगामी रोडमैप से संबंधित पहलुओं पर चर्चा की। कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से किसानों तक योजनाओं, कृषि संबंधी सूचनाओं और विभिन्न सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
डिजिटल सेवाओं का उद्देश्य केवल ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि कृषि से जुड़ी सेवाओं को किसान के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना भी है। रबी सीजन के दौरान किसानों को फसल चयन, कृषि इनपुट, मौसम, बाजार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस संदर्भ में डिजिटल माध्यमों का बेहतर एकीकरण किसानों और कृषि प्रशासन के बीच सूचना के अंतर को कम करने में उपयोगी हो सकता है।
डिजिटल कृषि को मिल रहा बढ़ता महत्व
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का दायरा लगातार बढ़ रहा है। खेती से जुड़े आंकड़ों का डिजिटलीकरण, किसानों की पहचान, फसल संबंधी डेटा, भूमि संबंधी जानकारी, मौसम आधारित सलाह और कृषि सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में डिजिटल कृषि मिशन को भी प्रमुख चर्चा के विषय के रूप में शामिल किया गया। बागवानी आयुक्त श्री प्रभात कुमार ने इस विषय पर प्रस्तुति देते हुए डिजिटल कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी साझा की।
डिजिटल कृषि का एक महत्वपूर्ण पक्ष कृषि संबंधी अलग-अलग डेटा स्रोतों को बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे कृषि नीति निर्माण, योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों के लिए लक्षित सेवाओं को विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय लेने की भूमिका और बढ़ सकती है। इसके माध्यम से फसल क्षेत्र, उत्पादन, मौसम, बाजार तथा अन्य कृषि संकेतकों का विश्लेषण कर योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की संभावनाएं बनती हैं।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन पर विशेष चर्चा
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन भी महत्वपूर्ण विषय रहा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल ने इस विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
भारत में दलहन खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण फसल समूह है। दालें भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं और इनमें प्रोटीन की महत्वपूर्ण मात्रा होती है। इसलिए देश में दलहन उत्पादन बढ़ाना और घरेलू आवश्यकता को पूरा करने की क्षमता मजबूत करना कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बीज, वैज्ञानिक तकनीक, सिंचाई, फसल प्रबंधन और बाजार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना आवश्यक है।
रबी सीजन में चना, मसूर, मटर और अन्य दलहनी फसलों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। ऐसे में रबी अभियान के दौरान दलहन उत्पादन की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाना स्वाभाविक है।
दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए क्षेत्र विस्तार के साथ-साथ उत्पादकता में सुधार भी महत्वपूर्ण है। उन्नत किस्मों का इस्तेमाल, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा किसानों को समय पर तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने से उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक महत्वपूर्ण
दलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। किसानों को क्षेत्र और जलवायु के अनुरूप उपयुक्त किस्मों की जानकारी तथा प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना उत्पादन सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
इसके साथ ही दलहनी फसलों में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार तंत्र के माध्यम से किसानों को बुवाई का उचित समय, बीज दर, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई और फसल सुरक्षा से संबंधित सलाह उपलब्ध कराई जा सकती है।
रबी अभियान के दौरान ऐसी जानकारियों को किसानों तक समय पर पहुंचाने की भूमिका कृषि विभाग, राज्य सरकारों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य कृषि संस्थानों की भी महत्वपूर्ण होगी।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन पर भी चर्चा
सम्मेलन में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन से जुड़े विषय पर भी प्रस्तुति दी गई। बागवानी आयुक्त श्री प्रभात कुमार ने इस संबंध में जानकारी साझा की।
खाद्य तेल भारत के कृषि और खाद्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से कृषि नीति का प्रमुख विषय रही है।
खाद्य तेल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए किसानों को तिलहन फसलों की उन्नत तकनीक, बेहतर किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है। इसके साथ ही उत्पादन के बाद प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से तिलहन उत्पादन और उससे जुड़े मूल्य श्रृंखला विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। रबी सीजन में भी कई महत्वपूर्ण तिलहन फसलों की खेती होती है, इसलिए अभियान के दौरान इस क्षेत्र को लेकर चर्चा का विशेष महत्व है।
बागवानी क्षेत्र में डिजिटल तकनीक की भूमिका
बागवानी क्षेत्र में भी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। फल, सब्जियां, फूल, मसाले और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन में किसानों को मौसम, बाजार, उत्पादन तकनीक और फसल प्रबंधन से संबंधित सटीक जानकारी की आवश्यकता होती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऐसी जानकारियों को किसानों तक अधिक तेजी से पहुंचाया जा सकता है। साथ ही उत्पादन और बाजार से संबंधित आंकड़ों का बेहतर उपयोग किसानों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
रबी अभियान में बागवानी से संबंधित क्षेत्रों को शामिल किए जाने से यह संकेत मिलता है कि कृषि विकास को केवल पारंपरिक खाद्यान्न फसलों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न कृषि उपक्षेत्रों के समन्वित विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
डिजिटल सेवा और कृषि विस्तार के बीच संबंध
किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीक पहुंचाने में कृषि विस्तार सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। परंपरागत रूप से कृषि विस्तार में किसान प्रशिक्षण, खेत प्रदर्शन, कृषि मेले, वैज्ञानिकों से संवाद और स्थानीय स्तर पर सलाह जैसे माध्यमों का इस्तेमाल होता रहा है।
अब इन माध्यमों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जुड़ रहे हैं। मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से किसानों को कृषि संबंधी जानकारी डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
हालांकि डिजिटल कृषि की सफलता के लिए केवल तकनीक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्थानीय भाषा में सामग्री और किसानों के लिए सरल डिजिटल इंटरफेस भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए डिजिटल सेवाओं के आगामी रोडमैप में तकनीकी विकास के साथ-साथ किसान-केंद्रित सेवा वितरण पर ध्यान देना भी आवश्यक होगा।
रबी अभियान में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण
रबी अभियान का उद्देश्य केवल केंद्रीय स्तर पर योजनाओं की जानकारी साझा करना नहीं है, बल्कि राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर आगामी फसल सीजन की तैयारियों को मजबूत करना भी है।
अलग-अलग राज्यों में मिट्टी, जलवायु, सिंचाई की उपलब्धता, फसल पैटर्न और किसानों की जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए रबी फसलों की रणनीति बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
दलहन, तिलहन और अन्य रबी फसलों के क्षेत्र में राज्यवार रणनीति तैयार करने के लिए कृषि विभागों, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होती है।
डिजिटल कृषि व्यवस्था इस समन्वय को मजबूत करने में सहायता कर सकती है, क्योंकि इससे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कृषि आंकड़ों और सूचनाओं का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।
डेटा आधारित कृषि नीति की ओर बढ़ता कदम
कृषि में डिजिटल परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पहलू डेटा आधारित नीति निर्माण है। कृषि क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के डेटा का विश्लेषण करके फसल क्षेत्र, उत्पादन, मौसम जोखिम, कृषि संसाधनों और बाजार से संबंधित बेहतर जानकारी हासिल की जा सकती है।
हालांकि डेटा आधारित कृषि व्यवस्था के साथ डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता, सुरक्षा और किसानों की सहमति जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल कृषि का विस्तार करते समय इन पहलुओं पर संतुलित ध्यान देना आवश्यक है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल कृषि और डिजिटल सेवा वितरण से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलना कृषि प्रशासन में तकनीकी बदलाव की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
आत्मनिर्भर कृषि के लिए उत्पादन से आगे की सोच
दलहन और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन बढ़ाने का विषय नहीं है। इसके लिए बीज से लेकर खेत, भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन और बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता होती है।
किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन की सुविधाएं मिलना भी महत्वपूर्ण है। किसान उत्पादक संगठन यानी FPO, प्रसंस्करण इकाइयां और स्थानीय स्तर पर कृषि मूल्य श्रृंखला का विकास इस दिशा में भूमिका निभा सकता है।
रबी अभियान में दलहन आत्मनिर्भरता और खाद्य तेल मिशन जैसे विषयों को साथ लेकर चर्चा किए जाने से कृषि क्षेत्र में उत्पादन, पोषण और आय से जुड़े व्यापक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है।
आगे की रणनीति पर हुआ मंथन
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन हुई प्रस्तुतियों में एक ओर जहां मौजूदा योजनाओं और डिजिटल सेवाओं की प्रगति पर जानकारी साझा की गई, वहीं दूसरी ओर आने वाले समय के लिए रोडमैप और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।
डिजिटल सेवा वितरण, डिजिटल कृषि, दलहन में आत्मनिर्भरता और खाद्य तेल उत्पादन ऐसे क्षेत्र हैं जिनका सीधा संबंध किसानों, कृषि उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा से है।
रबी अभियान 2026 के संदर्भ में इन विषयों पर चर्चा का उद्देश्य आगामी सीजन के लिए बेहतर तैयारी, तकनीकी सेवाओं की पहुंच और कृषि क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समन्वित दृष्टिकोण विकसित करना है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों में कृषि क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन और उत्पादन आधारित आत्मनिर्भरता दोनों पहलुओं को प्रमुखता मिली। डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने, दलहन उत्पादन को मजबूत करने, डिजिटल कृषि को आगे बढ़ाने तथा खाद्य तेल क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा रबी अभियान 2026 की तैयारियों में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकती है।
