सिंचाई से पहले खाद डालें या बाद में? किसान इन गलतियों से बचें

गेहूं में यूरिया सिंचाई से पहले डालें या बाद में? जानें खाद डालने का सही समय, मिट्टी की नमी, नाइट्रोजन के नुकसान और किसानों की जरूरी सावधानियां।

गेहूं की फसल में सिंचाई से पहले यूरिया खाद डालता किसान

खेत में खाद डालने के बाद सिंचाई कब करनी चाहिए, यह सवाल अक्सर किसानों के सामने आता है। खासकर गेहूं की फसल में यूरिया डालने के समय को लेकर किसान असमंजस में रहते हैं। कुछ किसान पहले सिंचाई करते हैं और खेत सूखने के बाद खाद डालते हैं, जबकि कुछ किसान सिंचाई से ठीक पहले यूरिया का छिड़काव करते हैं। खाद डालने का सही समय तय करना जरूरी है, क्योंकि इससे पौधों को पोषक तत्व मिलने, उर्वरक के उपयोग और नाइट्रोजन के नुकसान पर असर पड़ सकता है।

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के वैज्ञानिकों के शोध में पाया गया कि गेहूं में सिंचाई से ठीक पहले यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करने से सिंचाई के लगभग एक सप्ताह बाद यूरिया डालने की तुलना में बेहतर परिणाम मिले। हालांकि, खाद डालने का सही समय फसल, मिट्टी, मौसम और सिंचाई की व्यवस्था के अनुसार बदल सकता है।

सिंचाई से पहले खाद डालना कब फायदेमंद है?

गेहूं जैसी सिंचित फसलों में जब यूरिया को खड़ी फसल में ऊपर से डाला जाता है, तो सामान्य परिस्थितियों में सिंचाई से ठीक पहले इसका इस्तेमाल करना लाभकारी हो सकता है। सिंचाई का पानी यूरिया को घुलने और मिट्टी में पहुंचने में मदद करता है। इससे पौधों की जड़ों तक नाइट्रोजन पहुंचने की संभावना बढ़ती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यूरिया डालते ही खेत में बहुत अधिक पानी भर देना चाहिए। सिंचाई जरूरत के अनुसार और खेत की स्थिति को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। यदि खेत में पानी जमा हो जाता है या पानी बहकर बाहर निकलता है, तो पोषक तत्वों के नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

गेहूं में यूरिया के इस्तेमाल पर किए गए चार साल के एक शोध में सिंचाई से ठीक पहले नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करने से बेहतर फसल वृद्धि, उपज और नाइट्रोजन उपयोग दक्षता दर्ज की गई। यह परिणाम अध्ययन में अपनाई गई परिस्थितियों और उपचारों से संबंधित हैं; इन्हें हर फसल और हर खेत के लिए एक समान परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

सिंचाई के बाद खाद डालने में क्या परेशानी हो सकती है?

सिंचाई के बाद खेत में नमी बनी रहती है। ऐसी स्थिति में किसान अक्सर सोचते हैं कि मिट्टी में नमी होने से खाद डालना अधिक फायदेमंद होगा। यह बात कुछ परिस्थितियों में सही हो सकती है, लेकिन खाद डालने के समय और उसके बाद की नमी की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।

यूरिया को मिट्टी की सतह पर डालने के बाद यदि पर्याप्त पानी या बारिश नहीं होती और सतह धीरे-धीरे सूखने लगती है, तो कुछ परिस्थितियों में अमोनिया के रूप में नाइट्रोजन का नुकसान हो सकता है। मिट्टी का पीएच, तापमान, सतह पर फसल अवशेष और मौसम जैसी परिस्थितियां भी इस नुकसान को प्रभावित करती हैं। इसलिए सिंचाई के कई दिन बाद यूरिया डालकर उसे लंबे समय तक सतह पर छोड़ना हमेशा सही तरीका नहीं है।

दूसरी ओर, यदि सिंचाई के बाद खेत इतना गीला है कि उसमें चलना मुश्किल हो या पानी भरा हुआ है, तो खाद डालने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में खेत की दशा और फसल की जरूरत के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

यूरिया डालने के बाद नाइट्रोजन का नुकसान कैसे होता है?

यूरिया में नाइट्रोजन होता है, जो पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मिट्टी में पहुंचने के बाद यूरिया रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं से गुजरता है। इन प्रक्रियाओं के दौरान नाइट्रोजन अलग-अलग रूपों में बदलता है और पौधों के लिए उपलब्ध होता है।

यदि यूरिया को खेत की सतह पर डालकर लंबे समय तक छोड़ दिया जाए, तो परिस्थितियों के अनुसार अमोनिया गैस के रूप में नाइट्रोजन का कुछ हिस्सा हवा में जा सकता है। वहीं, अधिक पानी के कारण नाइट्रेट के नीचे की परतों में जाने या पानी के साथ बहने का जोखिम भी हो सकता है। नुकसान कितना होगा, यह मिट्टी के प्रकार, मौसम, सिंचाई के तरीके और खाद डालने की विधि पर निर्भर करता है।

इसलिए किसानों को केवल खाद की मात्रा पर नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के समय और तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। सही समय पर खाद देने से पौधों को पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिल सकता है और उर्वरक की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है।

गेहूं में यूरिया डालने का सही समय क्या है?

गेहूं में नाइट्रोजन की जरूरत फसल की बढ़वार के साथ बदलती रहती है। बुवाई के समय पूरी मात्रा में यूरिया डालने के बजाय अनुशंसित मात्रा को अलग-अलग चरणों में देना कई परिस्थितियों में उपयोगी होता है। इससे फसल की जरूरत के अनुरूप नाइट्रोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान की सलाह के अनुसार, सिंचित गेहूं में पहली सिंचाई सामान्यतः बुवाई के 20 से 25 दिन बाद की जाती है। संस्थान की एक सलाह में यूरिया को सिंचाई से ठीक पहले डालने की सिफारिश भी की गई है। हालांकि, सिंचाई का समय मिट्टी, मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि पहली सिंचाई के समय दी जाने वाली यूरिया की मात्रा खेत में पहले इस्तेमाल किए गए उर्वरकों, मिट्टी की उर्वरता और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसित खुराक के अनुसार तय होनी चाहिए। केवल दूसरे किसान के खेत में इस्तेमाल की गई मात्रा देखकर अपने खेत में उतनी ही खाद डालना उचित नहीं है।

खाद डालते समय इन गलतियों से बचें

पहली गलती है बिना जरूरत यूरिया की अतिरिक्त मात्रा डालना। अधिक यूरिया देने से हर बार अधिक उपज नहीं मिलती। इससे लागत बढ़ सकती है और पोषक तत्वों का नुकसान भी हो सकता है।

दूसरी गलती है खाद डालने के बाद सिंचाई में अनावश्यक देरी करना। यदि फसल को सिंचाई की जरूरत है और यूरिया सतह पर पड़ा है, तो मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार नाइट्रोजन का नुकसान हो सकता है। इसलिए सिंचाई की योजना बनाकर खाद डालना बेहतर है।

तीसरी गलती है खेत में जरूरत से ज्यादा पानी देना। अधिक सिंचाई से जलभराव हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में पोषक तत्वों का बहाव या मिट्टी की गहरी परतों में जाना बढ़ सकता है। खेत को समतल रखना और जरूरत के अनुसार पानी देना महत्वपूर्ण है।

चौथी गलती है सभी फसलों में खाद डालने का एक ही नियम अपनाना। धान, गेहूं, मक्का, सरसों और सब्जियों की पोषक तत्व संबंधी जरूरतें अलग-अलग होती हैं। खाद का प्रकार, फसल की अवस्था और सिंचाई की व्यवस्था देखकर ही समय तय करना चाहिए।

क्या हर खाद सिंचाई से पहले ही डालनी चाहिए?

नहीं। यूरिया, डीएपी, पोटाश और एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के इस्तेमाल का समय और तरीका एक जैसा नहीं होता। डीएपी और अन्य फॉस्फोरस वाले उर्वरकों को कई फसलों में बुवाई के समय मिट्टी में देना उपयोगी होता है। वहीं, यूरिया की टॉप ड्रेसिंग फसल की अवस्था और सिंचाई के कार्यक्रम के अनुसार की जाती है।

इसलिए यह जरूरी नहीं कि हर खाद को सिंचाई से ठीक पहले ही डाला जाए। उर्वरक का चुनाव और प्रयोग मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत और स्थानीय कृषि अनुशंसाओं के आधार पर होना चाहिए।

सही समय पर खाद देने से घट सकती है लागत

खाद का बेहतर उपयोग केवल अधिक मात्रा डालने से नहीं, बल्कि सही समय, सही विधि और संतुलित पोषण से संभव होता है। गेहूं में सिंचाई से ठीक पहले यूरिया डालना कई सिंचित परिस्थितियों में उपयोगी तरीका है, लेकिन खेत में पानी भरने, बारिश की संभावना और मिट्टी की नमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि खाद की अनुशंसित मात्रा का पालन करें, फसल की अवस्था के अनुसार उर्वरक दें और सिंचाई की योजना पहले से बनाएं। इससे नाइट्रोजन के संभावित नुकसान को कम करने, खाद की लागत का बेहतर उपयोग करने और फसल को जरूरत के समय पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

 

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