भारत में रबी सीजन 2026-27 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक स्थिति में है। सरकार के 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में पांच प्रमुख श्रेणियों के उर्वरकों का कुल स्टॉक 199.48 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रहा। पूरे रबी सीजन के लिए इन उर्वरकों की अनुमानित जरूरत 380.96 लाख मीट्रिक टन है। इस दौरान 24.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की बिक्री दर्ज की गई, जिसके बाद शेष स्टॉक 175.32 लाख मीट्रिक टन रहा।
गेहूं, दलहन, तिलहन और अन्य रबी फसलों की बुवाई की तैयारियों के बीच उर्वरकों का यह स्टॉक किसानों के लिए राहत देने वाला है। हालांकि, देश में कुल उपलब्धता पर्याप्त होने का मतलब यह नहीं है कि हर राज्य, जिले और बाजार में सभी प्रकार की खाद आसानी से उपलब्ध होगी। किसानों को समय पर खाद मिलना इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकारी और निजी वितरण नेटवर्क के माध्यम से उर्वरक जरूरत वाले क्षेत्रों तक कितनी तेजी से पहुंचते हैं।
सरकारी आंकड़ों में यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी), एनपीके कॉम्प्लेक्स और सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) को शामिल किया गया है। अक्टूबर महीने के लिए इन पांच श्रेणियों की कुल अनुमानित जरूरत 88.33 लाख मीट्रिक टन है। इसके मुकाबले 16 अक्टूबर तक उपलब्धता 199.48 लाख मीट्रिक टन थी। यानी उपलब्ध स्टॉक अक्टूबर की अनुमानित जरूरत से लगभग 2.26 गुना अधिक था। बिक्री के बाद बचा 175.32 लाख मीट्रिक टन स्टॉक भी अक्टूबर की जरूरत का करीब 1.98 गुना है।
यूरिया का सबसे बड़ा स्टॉक, 74.54 लाख टन शेष
रबी सीजन में यूरिया की मांग सबसे अधिक रहती है। गेहूं सहित कई प्रमुख फसलों में नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रबी 2026-27 के लिए यूरिया की कुल अनुमानित जरूरत 199.27 लाख मीट्रिक टन है। इसमें अक्टूबर महीने की जरूरत 38.24 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है।
16 अक्टूबर तक यूरिया की उपलब्धता 85.57 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। इस अवधि में 11.04 लाख मीट्रिक टन की बिक्री के बाद 74.54 लाख मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक में बचा था। उपलब्ध मात्रा अक्टूबर की अनुमानित जरूरत से लगभग 2.24 गुना और शेष स्टॉक करीब 1.95 गुना है।
ये आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की उपलब्धता की मजबूत स्थिति दर्शाते हैं। हालांकि, गेहूं की बुवाई और फसलों की बढ़वार के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ सकती है। ऐसे में खाद की नियमित आपूर्ति, गोदामों से बाजार तक परिवहन और खुदरा दुकानों पर उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होगा।
डीएपी के स्टॉक पर रहेगी विशेष नजर
डीएपी की उपलब्धता भी रबी सीजन के लिए महत्वपूर्ण है। यह फसलों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराने वाला प्रमुख उर्वरक है। शुरुआती विकास और जड़ों की बढ़वार के लिए फॉस्फोरस की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी होती है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रबी सीजन 2026-27 के लिए डीएपी की कुल जरूरत 55.07 लाख मीट्रिक टन है। अक्टूबर महीने की अनुमानित जरूरत 19.01 लाख मीट्रिक टन रखी गई है। 16 अक्टूबर तक डीएपी की उपलब्धता 30.02 लाख मीट्रिक टन थी। इस दौरान 6.97 लाख मीट्रिक टन की बिक्री दर्ज की गई और शेष स्टॉक 23.06 लाख मीट्रिक टन रहा।
डीएपी की उपलब्धता अक्टूबर की जरूरत से लगभग 1.58 गुना अधिक थी, जबकि बचा हुआ स्टॉक अक्टूबर की अनुमानित मांग का करीब 1.21 गुना था। पांच प्रमुख उर्वरक श्रेणियों में डीएपी का स्टॉक अक्टूबर की जरूरत के मुकाबले सबसे कम अनुपात में है। इसलिए इसकी नियमित आपूर्ति और क्षेत्रवार वितरण पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान देने की जरूरत होगी।
सरकारी आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि रबी 2026-27 की शुरुआत में डीएपी का शुरुआती स्टॉक पिछले रबी सीजन की शुरुआत के मुकाबले 3.19 लाख मीट्रिक टन अधिक था। यह पिछले साल की तुलना में सकारात्मक स्थिति का संकेत है। हालांकि, सीजन के दौरान मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आगे की आवक और बिक्री पर नजर रखना जरूरी होगा।
एनपीके कॉम्प्लेक्स में मजबूत उपलब्धता
एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व अलग-अलग अनुपात में उपलब्ध होते हैं। इनका इस्तेमाल फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार किया जाता है।
रबी सीजन के लिए एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की अनुमानित जरूरत 79.12 लाख मीट्रिक टन है। अक्टूबर महीने की जरूरत 18.51 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। 16 अक्टूबर तक इनकी उपलब्धता 49.28 लाख मीट्रिक टन थी। इस अवधि में 3.20 लाख मीट्रिक टन की बिक्री हुई और 46.08 लाख मीट्रिक टन स्टॉक में बचा रहा।
उपलब्ध मात्रा अक्टूबर की जरूरत से करीब 2.66 गुना और शेष स्टॉक लगभग 2.49 गुना है। इससे एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपलब्धता का संकेत मिलता है। हालांकि, अलग-अलग एनपीके ग्रेड में पोषक तत्वों का अनुपात अलग हो सकता है। इसलिए किसानों को अपनी फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उपयुक्त ग्रेड उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
एमओपी में सबसे मजबूत स्टॉक स्थिति
एमओपी यानी म्यूरेट ऑफ पोटाश पोटाश की आपूर्ति करने वाला प्रमुख उर्वरक है। रबी 2026-27 के लिए इसकी कुल जरूरत 16.40 लाख मीट्रिक टन और अक्टूबर की जरूरत 3.33 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है।
16 अक्टूबर तक एमओपी की उपलब्धता 11.62 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। इस दौरान 0.87 लाख मीट्रिक टन की बिक्री के बाद 10.75 लाख मीट्रिक टन स्टॉक बचा था। उपलब्धता अक्टूबर की जरूरत से लगभग 3.49 गुना और शेष स्टॉक करीब 3.23 गुना है। पांचों श्रेणियों में अक्टूबर की जरूरत के मुकाबले एमओपी का स्टॉक अनुपात सबसे अधिक है।
यह स्थिति पोटाश उर्वरक की राष्ट्रीय उपलब्धता के लिहाज से मजबूत है। फिर भी, वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब जरूरत वाले क्षेत्रों में किसानों को समय पर इसकी आपूर्ति हो सके।
एसएसपी का स्टॉक भी पर्याप्त
सिंगल सुपर फॉस्फेट यानी एसएसपी भी रबी सीजन के लिए उपलब्ध प्रमुख उर्वरकों में शामिल है। इसमें फॉस्फोरस के साथ सल्फर भी होता है, जो फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उपयोगी हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एसएसपी की पूरे रबी सीजन की जरूरत 31.10 लाख मीट्रिक टन है। अक्टूबर महीने की अनुमानित जरूरत 9.24 लाख मीट्रिक टन है। 16 अक्टूबर तक इसकी उपलब्धता 22.98 लाख मीट्रिक टन थी। 2.09 लाख मीट्रिक टन की बिक्री के बाद 20.89 लाख मीट्रिक टन स्टॉक बचा था।
एसएसपी की उपलब्धता अक्टूबर की जरूरत से करीब 2.49 गुना और शेष स्टॉक लगभग 2.26 गुना है। इससे इस श्रेणी में भी पर्याप्त राष्ट्रीय स्टॉक का संकेत मिलता है।
खाद की उपलब्धता के साथ वितरण भी जरूरी
रबी 2026-27 के शुरुआती चरण में उर्वरकों के कुल आंकड़े देश में संतोषजनक आपूर्ति की स्थिति दर्शाते हैं। 16 अक्टूबर तक उपलब्ध 199.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक पूरे सीजन की अनुमानित जरूरत का करीब 52.4 प्रतिशत था। वहीं, बिक्री के बाद बचा 175.32 लाख मीट्रिक टन स्टॉक पूरे सीजन की अनुमानित जरूरत का लगभग 46 प्रतिशत है।
हालांकि, इन अनुपातों को पूरे सीजन की संभावित कमी या अतिरिक्त आपूर्ति का अंतिम अनुमान नहीं माना जाना चाहिए। रबी सीजन अभी जारी है और आगे उर्वरकों की नई खेप आने, बिक्री बढ़ने तथा अलग-अलग क्षेत्रों में मांग बदलने से स्टॉक की स्थिति में बदलाव हो सकता है।
कुल मिलाकर, यूरिया, एनपीके, एमओपी और एसएसपी का राष्ट्रीय स्टॉक अक्टूबर की अनुमानित जरूरत के मुकाबले मजबूत दिखाई देता है। डीएपी के मामले में स्टॉक की स्थिति तुलनात्मक रूप से अधिक निगरानी की मांग करती है। आने वाले समय में सरकार और उर्वरक कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध खाद को जरूरत वाले क्षेत्रों तक समय पर पहुंचाना और बुवाई के महत्वपूर्ण चरणों में आपूर्ति बनाए रखना होगा।
