भारत में जुटेंगे दुनिया के कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ, 12 से 17 अप्रैल 2027 तक नई दिल्ली में होगा CGIAR विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह

The world's agricultural scientists and experts will gather in India for the CGIAR Science .

The world's agricultural scientists and experts will gather in India for the CGIAR Science

The world's agricultural scientists and experts will gather in India for the CGIAR Science

भारतीय कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की दिशा में भारत एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल की मेजबानी करने जा रहा है। देश की राजधानी नई दिल्ली में 12 से 17 अप्रैल 2027 तक ‘CGIAR Science and Partnership Week 2027’ का आयोजन किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में दुनिया भर से 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, किसानों, नीति निर्माताओं, सरकारी प्रतिनिधियों, कृषि स्टार्टअप, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी रहेगी।

इस आयोजन की घोषणा 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संगठन CGIAR और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से की गई। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) तथा ICAR और CGIAR के संयुक्त प्रयासों से किया जाएगा।

इस छह दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषि विज्ञान, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से खेती की मौजूदा चुनौतियों का समाधान तलाशना तथा किसानों तक वैज्ञानिक नवाचारों की पहुंच बढ़ाना है। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक किस तरह पहुंचाया जाए, ताकि किसानों की उत्पादकता, आमदनी और कृषि की स्थिरता में सुधार हो सके।

भारत के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश ने हरित क्रांति के बाद से कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, बीज विकास, सिंचाई, फसल सुधार और कृषि तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब भारत अपनी इन उपलब्धियों को दुनिया के अन्य देशों, विशेषकर अफ्रीका और विकासशील देशों के साथ साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

50 वर्षों से अधिक पुरानी ICAR-CGIAR साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भारत और CGIAR के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को इस आयोजन का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उन्होंने कहा कि भारत और CGIAR के वैज्ञानिक पिछले पांच दशकों से भी अधिक समय से कृषि अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। इस साझेदारी ने भारतीय कृषि की चुनौतियों को समझने, नई फसल किस्में विकसित करने, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डॉ. जाट के अनुसार, CGIAR एक अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी है, जिसके अंतर्गत 15 अनुसंधान केंद्र 100 से अधिक देशों में काम कर रहे हैं। इसके अनुसंधान कार्यक्रमों का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और वैश्विक खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाना है।

भारत में CGIAR के 10 अनुसंधान केंद्र विभिन्न कृषि क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें फसल सुधार, जल प्रबंधन, पशुधन, मत्स्य पालन, पोषण और कृषि नीतियों से संबंधित विषय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि CGIAR Science and Partnership Week 2027 भारत और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा। इस मंच के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान, नई तकनीकों और सफल कृषि मॉडलों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

खाद्यान्न आयातक से प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बना भारत

भारत की कृषि यात्रा का उल्लेख करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि हरित क्रांति के बाद देश ने कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

एक समय ऐसा था जब भारत को अपनी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान, बेहतर बीज, उन्नत कृषि तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं और किसानों के प्रयासों से भारत आज दुनिया के प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल हो चुका है।

इस परिवर्तन में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। CIMMYT, IRRI और ICRISAT जैसे संस्थानों के साथ भारत के वैज्ञानिकों ने विभिन्न फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, उन्नत किस्में विकसित करने और खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों को मजबूत करने के लिए काम किया है।

गेहूं, चावल, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों के अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारतीय कृषि को नई क्षमताएं मिली हैं।

डॉ. जाट ने कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान की उपलब्धियां केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका लाभ दूसरे देशों के किसानों को भी मिल रहा है। भारतीय कृषि विज्ञान और तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

भारत के मूंगफली अनुसंधान से अफ्रीकी देशों को मिला लाभ

भारत और अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मूंगफली की उन्नत किस्मों से जुड़ा है।

अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) द्वारा संरक्षित और साझा किए गए भारत के मूंगफली के एक नमूने ने ऐसी किस्मों के विकास में योगदान दिया, जिनकी खेती आज मलावी, युगांडा, मोजाम्बिक और जाम्बिया जैसे अफ्रीकी देशों में की जा रही है।

यह उदाहरण दर्शाता है कि किसी एक देश में विकसित या संरक्षित कृषि जैविक संसाधन और वैज्ञानिक ज्ञान दूसरे देशों की खाद्य सुरक्षा तथा किसानों की आजीविका सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हैदराबाद स्थित कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग उत्कृष्टता केंद्र भी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ भारत के सफल कृषि नवाचारों को साझा करने का काम कर रहा है।

भारत की यह पहल विशेष रूप से उन विकासशील देशों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां जलवायु परिवर्तन, सीमित सिंचाई सुविधाएं, मृदा क्षरण और कम कृषि उत्पादकता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।

Climate-Smart Agriculture और Digital Farming पर होगा विशेष फोकस

CGIAR Science and Partnership Week 2027 में भविष्य की कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इनमें Climate-Smart Agriculture, Digital Agriculture, कृषि मशीनीकरण, प्राकृतिक खेती, जल प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य प्रमुख होंगे।

डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि और कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने और दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने की आवश्यकता है।

  1. जलवायु अनुकूल कृषि (Climate-Smart Agriculture)

जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और मौसम की चरम घटनाएं किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। ऐसे में ऐसी फसल किस्मों और कृषि पद्धतियों को विकसित करना जरूरी है, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।

कार्यक्रम में जलवायु अनुकूल बीज, मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल विविधीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।

  1. Digital Agriculture और AgriStack

डिजिटल तकनीक अब खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। किसानों तक सटीक कृषि जानकारी पहुंचाने, खेतों की निगरानी करने, मौसम की जानकारी देने और कृषि सेवाओं को बेहतर बनाने में Digital Agriculture की भूमिका बढ़ रही है।

AgriStack, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा आधारित कृषि सलाह और नई तकनीकों के माध्यम से किसानों को अधिक प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के अवसरों पर भी चर्चा होगी।

  1. कृषि मशीनीकरण (Farm Mechanization)

खेती में श्रम की उपलब्धता और बढ़ती लागत को देखते हुए कृषि मशीनीकरण महत्वपूर्ण हो गया है। छोटे और सीमांत किसानों तक किफायती मशीनें पहुंचाना, कस्टम हायरिंग सेंटर को बढ़ावा देना और आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल को आसान बनाना प्रमुख विषय होंगे।

  1. मोटे अनाज और श्री अन्न (Millets)

भारत ने मोटे अनाज यानी श्री अन्न को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पोषण सुरक्षा, कम पानी में खेती और जलवायु अनुकूल कृषि के लिहाज से बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मोटे अनाज की उपयोगिता पर चर्चा की जाएगी।

  1. प्राकृतिक और टिकाऊ खेती (Natural & Sustainable Farming)

मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, कृषि लागत कम करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों की भूमिका भी इस आयोजन के प्रमुख विषयों में शामिल रहेगी।

कृषि स्टार्टअप, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को मिलेगा प्रोत्साहन

आयोजन में कृषि क्षेत्र में उभरते उद्यमों और नवाचारों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र में काम करने वाले Startups, निजी कंपनियों, शोध संस्थानों और व्यावसायिक संगठनों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

आज कृषि क्षेत्र में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेंसर आधारित खेती, स्मार्ट सिंचाई, कृषि मशीनरी, डिजिटल मार्केटिंग और फसल प्रबंधन से जुड़े कई नए समाधान विकसित हो रहे हैं।

इन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।

डॉ. जाट ने कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला (Agri-Food Value Chain) से जुड़े विषयों को भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इनमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कृषि उद्यमिता, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा कृषि नवाचारों के प्रभावी संचार में मीडिया की भूमिका शामिल है।

इससे कृषि अनुसंधान को केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावसायिक अवसरों, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आर्थिक प्रगति से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से दुनिया तक पहुंचेगा भारतीय कृषि मॉडल

डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि भारत की प्राथमिकताओं में दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत करना शामिल है। इसके माध्यम से भारत अपने कृषि अनुसंधान, तकनीकी अनुभव और सफल मॉडलों को विशेष रूप से अफ्रीकी देशों और अन्य अल्पविकसित देशों के साथ साझा करेगा।

दक्षिण-दक्षिण सहयोग का अर्थ विकासशील देशों के बीच ज्ञान, तकनीक, अनुभव और संसाधनों का आपसी आदान-प्रदान है।

भारत के पास कम लागत वाली कृषि तकनीकों, छोटे किसानों के लिए उपयुक्त मशीनों, मोटे अनाज की खेती, जल संरक्षण, बीज उत्पादन और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में कई उपयोगी अनुभव हैं।

इनका लाभ उन देशों को मिल सकता है, जहां कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों पर निर्भर है।

इस सहयोग से भारत को भी दूसरे देशों के कृषि अनुभवों और अनुसंधान उपलब्धियों से सीखने का अवसर मिलेगा।

CGIAR की कार्यकारी प्रबंध निदेशक ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को सराहा

CGIAR की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्माहेन एलौफ़ी ने भारत और CGIAR के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि CGIAR Science and Partnership Week 2027 का उद्देश्य भारत और CGIAR के बीच अब तक हुई उपलब्धियों को सामने लाने के साथ-साथ कृषि सहयोग के अगले 50 वर्षों के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना है।

डॉ. एलौफ़ी के अनुसार, भारत ने यह साबित किया है कि एक मजबूत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली बड़े स्तर पर कृषि क्षेत्र में बदलाव ला सकती है। भारत के बीज, वैज्ञानिक ज्ञान और कृषि नवाचार पहले से ही अफ्रीका और एशिया के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अप्रैल 2027 में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम इस वैज्ञानिक आदान-प्रदान को और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने मानव कल्याण में सुधार, खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने और वैश्विक कृषि चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिकों की भूमिका को पहचानने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. एलौफ़ी ने अप्रैल 2025 में केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित CGIAR Science and Partnership Week के पहले संस्करण की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में आयोजित होने वाला दूसरा संस्करण वैश्विक कृषि साझेदारियों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

भारत की कृषि उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखेगा आयोजन: डॉ. हिमांशु पाठक

ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश बनने तक भारत की कृषि यात्रा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि CGIAR Science and Partnership Week 2027 के माध्यम से भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय कृषि नवाचारों को दुनिया के साथ साझा करने और अन्य देशों की वैज्ञानिक उपलब्धियों से सीखने का अवसर मिलेगा।

डॉ. पाठक के अनुसार, कृषि और खाद्य प्रणालियों के सामने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा और किसानों की आय जैसी कई चुनौतियां हैं। इनका समाधान केवल किसी एक देश के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग और साझेदारी आवश्यक है।

नैरोबी के बाद नई दिल्ली बनेगी वैश्विक कृषि विज्ञान का केंद्र

CGIAR का पहला Science and Partnership Week अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित किया गया था। इसी दौरान CGIAR ने अपना वर्तमान अनुसंधान कार्यक्रम भी शुरू किया था।

अब भारत में आयोजित होने वाला दूसरा संस्करण विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर किसानों और खेतों तक पहुंचाने पर केंद्रित रहेगा।

नई दिल्ली में होने वाले इस आयोजन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका पर भी विचार किया जाएगा।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के लिए वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, कृषि तकनीकों और सफल मॉडलों को साझा करने के अवसर उपलब्ध होंगे। आयोजन की विस्तृत रूपरेखा और वक्ताओं की सूची आने वाले महीनों में जारी की जाएगी।

2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि अनुसंधान की होगी अहम भूमिका

भारत में CGIAR Science and Partnership Week 2027 का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब देश कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, तकनीक आधारित और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

बदलती जलवायु, घटते प्राकृतिक संसाधन, खेती की बढ़ती लागत, किसानों की आय और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा जैसे मुद्दे भविष्य की कृषि नीति के केंद्र में हैं।

इन चुनौतियों के समाधान के लिए कृषि अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, किसानों, उद्योगों, स्टार्टअप और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

अप्रैल 2027 में नई दिल्ली में होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन भारत को अपनी वैज्ञानिक क्षमता और कृषि उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखने का अवसर देगा। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान को वैश्विक जरूरतों से जोड़ने, नए तकनीकी समाधान विकसित करने और विकासशील देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में मदद कर सकता है।

कुल मिलाकर, CGIAR Science and Partnership Week 2027 केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि भारतीय कृषि अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने और आने वाले दशकों की खेती की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। इससे भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय विस्तार मिलने के साथ किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

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