भारत के गांवों को आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से मजबूत और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब ग्राम पंचायतें केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगी। इसी उद्देश्य के साथ केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सभी हितधारकों से ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ और ‘विकसित पंचायत’ के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है।
30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित जन योजना अभियान (People’s Plan Campaign – PPC) 2026-27 की राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए पंचायतों का मजबूत, जवाबदेह और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर से 400 से अधिक प्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पीपीसी 2026-27 की हिंदी और अंग्रेजी पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
इस कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण पंचायत भूमि पर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय तथा कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) रहा। इस समझौते के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बुनियादी ढांचा विकसित करने के साथ ग्राम पंचायतों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।
आत्मनिर्भर पंचायतें बनेंगी विकसित भारत की मजबूत नींव
कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पंचायतें भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत बुनियाद हैं। गांवों का विकास तभी संभव है, जब स्थानीय स्तर पर विकास की योजनाएं तैयार करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में पंचायतों की सक्रिय भूमिका हो।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ग्रामीण शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी दिशा में प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM-VGSY) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलना एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह योजना विकसित भारत के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप पंचायतों में शासन व्यवस्था को आधुनिक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। ग्राम पंचायतों को अपने स्वयं के स्रोत राजस्व (Own Source Revenue – OSR) में वृद्धि करनी होगी। इसके लिए स्थानीय संसाधनों, पंचायत संपत्तियों और उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग करना जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्राम सभाओं को विकास योजनाओं के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जब ग्रामीण नागरिक अपनी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर योजनाएं तैयार करेंगे, तभी विकास का वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें स्थानीय स्तर पर राजस्व का सृजन हो, सरकारी योजनाओं का बेहतर समन्वय हो और विकास कार्यों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए सभी विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना से बदलेगी ग्रामीण शासन व्यवस्था
कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के प्रमुख उद्देश्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय विकास की मजबूत संस्था के रूप में विकसित करना है।
योजना के अंतर्गत सरकारी योजनाओं के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने, ग्राम स्तर पर संवाद और विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) को समय पर तैयार करने, पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर प्रभावी शासन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंचायतें तभी वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बन सकती हैं, जब ग्राम सभाएं अपनी जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करें, पंचायतों की अपनी आय लगातार बढ़े और विभिन्न सरकारी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें।
उन्होंने पंचायतों से प्रदर्शन आधारित अनुदान प्राप्त करने के लिए अपने स्वयं के राजस्व सृजन पर विशेष ध्यान देने की अपील की। इससे पंचायतों को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और स्थानीय विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
पंचायत भूमि पर खुलेंगे EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में ग्रामीण भारत के लिए एक नई आर्थिक और तकनीकी संभावना का रास्ता भी खुला। पंचायती राज मंत्रालय ने विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते का उद्देश्य देशभर में उपयुक्त पंचायत भूमि पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करना है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा और पंचायतों के लिए स्थायी आय के नए स्रोत विकसित हो सकेंगे।
समझौते के अनुसार दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया वाहनों के साथ मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास तथा पंचायत परिसरों में उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाएगी।
इस पहल के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। संबंधित विभाग उपयुक्त पंचायत स्थलों की पहचान और निगरानी में सहयोग करेंगे।
दूसरी ओर CESL साइट का तकनीकी मूल्यांकन, संभावित मांग का आकलन, उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग तथा चार्जिंग स्टेशनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस मॉडल की खास बात यह है कि पंचायतों की जमीन का उपयोग एक उत्पादक सामुदायिक संपत्ति के रूप में किया जा सकेगा। चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग सेवाओं से होने वाली आय के माध्यम से पंचायतों को नियमित राजस्व प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
किसानों और ग्रामीण परिवहन को भी मिल सकता है लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कृषि उत्पादों की ढुलाई, स्थानीय परिवहन, छोटे व्यावसायिक कार्यों और ग्रामीण सेवाओं में दोपहिया, तिपहिया तथा अन्य वाहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऐसे में पंचायत स्तर पर EV Charging Infrastructure विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां अभी चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता सीमित है, वहां पंचायत परिसरों और राजमार्गों के आसपास चार्जिंग स्टेशन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इससे ग्रामीण उद्यमियों, छोटे परिवहन कारोबारियों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने की संभावना है। साथ ही बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित होने से ऐसे वाहनों के उपयोगकर्ताओं को बैटरी बदलने की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।
हालांकि इस पहल का वास्तविक लाभ स्थानीय मांग, चार्जिंग स्टेशन की क्षमता, बिजली की उपलब्धता, संचालन व्यवस्था और उचित स्थानों के चयन पर निर्भर करेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने के साथ यह पहल कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
पंचायतों की खाली जमीन बनेगी आय का नया साधन
देश की अनेक ग्राम पंचायतों के पास विभिन्न प्रकार की सार्वजनिक भूमि और सामुदायिक संपत्तियां उपलब्ध हैं। इनका उपयोग अक्सर सीमित गतिविधियों तक ही रह जाता है। अब EV चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं के माध्यम से इन संपत्तियों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
पंचायतों के लिए यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय नियमित आय प्राप्त करने के नए विकल्प मिल सकते हैं।
इस आय का इस्तेमाल स्थानीय जरूरतों के अनुसार ग्रामीण बुनियादी ढांचे, नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता, सार्वजनिक सेवाओं और सामुदायिक कल्याण से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।
पंचायती राज मंत्रालय की यह पहल हाल ही में जारी मॉडल पंचायत कर, दरें और शुल्क नियम (Model OSR Rules) के उद्देश्यों के अनुरूप भी है। इन नियमों का उद्देश्य पंचायतों को पारदर्शी, जवाबदेह और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप राजस्व जुटाने की व्यवस्था विकसित करने में सहायता प्रदान करना है।
यदि पंचायतें अपनी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करती हैं और स्थानीय जरूरतों के अनुसार आय के नए स्रोत विकसित करती हैं, तो ग्रामीण विकास के लिए उनके पास वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
16वें वित्त आयोग से पंचायतों को मिलेंगे 4.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान
कार्यशाला में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी विकेंद्रीकृत और साक्ष्य आधारित ग्रामीण विकास योजना को मजबूत आधार प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से ‘सबकी योजना, सबका विकास’ की थीम के अंतर्गत संचालित जन योजना अभियान अब ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायत विकास योजनाओं को तैयार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
इस अभियान के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर समन्वय को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डॉ. जोशी ने बताया कि सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-31 की अवधि के लिए देश के सभी 28 राज्यों में विधिवत गठित पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए कुल 4,35,236 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है।
इतनी बड़ी वित्तीय सहायता के साथ पंचायतों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्हें उपलब्ध धनराशि का उपयोग स्थानीय जरूरतों, विकास की प्राथमिकताओं और वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करना होगा।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाएं केवल उपलब्ध सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इनका आधार ग्रामीण नागरिकों की जरूरतें, आकांक्षाएं और स्थानीय विकास की प्राथमिकताएं होनी चाहिए।
उन्होंने GPDP में स्वयं के स्रोत राजस्व (OSR) को शामिल करने पर भी जोर दिया, क्योंकि प्रदर्शन आधारित अनुदान का संबंध पंचायतों की राजस्व सृजन क्षमता से जुड़ा हुआ है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत होगी पंचायतों की योजना व्यवस्था
डॉ. विनीत जोशी ने पंचायतों के कामकाज में तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ई-ग्राम स्वराज और समर्थ पंचायत पोर्टल सहित केंद्र तथा राज्य सरकारों के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि एकीकृत डिजिटल डेटा के माध्यम से पंचायतों को स्थानीय समस्याओं की पहचान करने, विकास की प्राथमिकताएं तय करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने वित्त वर्ष 2027-28 के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने के उद्देश्य से ग्राम सभाओं में अधिक भागीदारी, स्थानीय आंकड़ों के इस्तेमाल और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
जल और स्वच्छता सेवाओं के लिए पंचायतों की जिम्मेदारी अहम
कार्यशाला में पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता सेवाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता सुविधाएं सीधे तौर पर ग्रामीण नागरिकों के स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और सम्मान से जुड़ी हुई हैं।
ग्राम पंचायतों को जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल की गुणवत्ता, जल आपूर्ति व्यवस्था के रखरखाव, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता जैसे विषयों को अपनी विकास योजनाओं में उचित स्थान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को जल और स्वच्छता सेवाओं के संचालन के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना होगा। सोलहवें वित्त आयोग के तहत मिलने वाले बंधित अनुदान का इस्तेमाल भी इन सेवाओं से जुड़े बुनियादी अंतराल को दूर करने में किया जा सकता है।
श्री मीणा ने जल और स्वच्छता सेवाओं को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उचित उपयोगकर्ता शुल्क (User Charges) की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। इससे पंचायतों को सेवाओं के संचालन और रखरखाव के लिए नियमित आय प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं के माध्यम से पंचायतों की जवाबदेही बढ़ाई जानी चाहिए और स्थानीय आंकड़ों के आधार पर निवेश तथा विकास संबंधी निर्णय लिए जाने चाहिए।
ग्रामीण विकास के लिए विभागों के बीच समन्वय पर जोर
कार्यशाला में पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती पलका साहनी ने विषयगत पंचायत विकास योजनाओं के माध्यम से हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं की गुणवत्ता, व्यापकता और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत है।
वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने समग्र ग्रामीण विकास के लिए व्यापक और अभिसरण आधारित ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद वित्त वर्ष 2027-28 के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली और जनभागीदारी पर आधारित विकास योजनाएं तैयार करने के उद्देश्य से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन तथा निगरानी के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
जन योजना अभियान 2026-27 में ग्रामीण नागरिक होंगे विकास के केंद्र में
जन योजना अभियान 2026-27 की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को पंचायत विकास की योजना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है।
इस अभियान के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय जरूरतों और समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। ग्रामीण नागरिक अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विकास कार्यों के सुझाव दे सकेंगे और पंचायतें इन्हीं सुझावों के आधार पर अपनी योजनाओं को अंतिम रूप दे सकेंगी।
इसमें महिला, युवा, किसान, श्रमिक और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
‘सबकी योजना, सबका विकास’ की भावना के साथ यह अभियान ग्रामीण शासन व्यवस्था को अधिक सहभागी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ग्रामीण भारत में विकास और रोजगार के नए अवसरों की संभावना
पंचायत भूमि पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने का समझौता केवल परिवहन क्षेत्र से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय शासन व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने का प्रयास भी है।
इससे एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ परिवहन सुविधाओं का विस्तार हो सकता है, वहीं दूसरी ओर पंचायतों को अपनी संपत्तियों के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
आने वाले समय में यदि पंचायतें स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करती हैं, डिजिटल तकनीक अपनाती हैं और नागरिकों की भागीदारी से विकास योजनाएं तैयार करती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
हालांकि इस पहल की सफलता के लिए पंचायत भूमि का पारदर्शी आवंटन, तकनीकी व्यवहार्यता, बिजली आपूर्ति, स्टेशन का नियमित रखरखाव और राजस्व के उचित प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना जरूरी होगा।
केंद्र सरकार की इन पहलों से स्पष्ट है कि अब ग्रामीण विकास की रणनीति केवल सरकारी योजनाओं और अनुदान पर आधारित नहीं रहेगी, बल्कि पंचायतों को स्थानीय संसाधनों से आय अर्जित करने और अपने विकास की जिम्मेदारी स्वयं संभालने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
वास्तव में, आत्मनिर्भर पंचायत ही आत्मनिर्भर गांव और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बन सकती है। यदि पंचायतें आर्थिक रूप से सक्षम होंगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन, जल प्रबंधन और सामुदायिक विकास के कार्यों को नई दिशा मिलेगी। यही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने का महत्वपूर्ण रास्ता है।
