सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेट को लेकर संसद में बोले केंद्रीय मंत्री, पढ़ें पूरी खबर..

֍:सांसद अरुण गोविल का समर्थन§ֆ:बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने अश्विनी वैष्णव की मांग को लेकर समर्थन जताया. गोविल ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत सारा ऐसा कंटेंट है, जो हमारी संस्कृति से मेल नहीं खाता. इस कंटेट पर सख्त निगरानी करने की जरूरत है. पिछले कुछ सालों में बहुत सारे प्राइवेट प्लेटफॉर्म आए हैं. कोई कानून नहीं होने के कारण इन प्लेटफॉर्म पर कुछ भी दिखाया जा रहा है. इस कंटेंट के कारण युवाओं को गुमराह किया जा रहा है. सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर आए कंटेंट के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए, जिससे वो ऐसे कंटेंट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर सकें.§֍:समस्या पर दिया गया सुझाव§ֆ: §ֆ:अश्विनी वैष्णव ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को सेल्फ-रेगुलेटरी अप्रोच अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि फ्री स्पीच और रिस्पॉन्सिबल कंटेंट मॉडरेशन के बीच बैलेंस बनाने की जरूरत है. इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर ऐसे कंटेंट को प्रायोरिटी देते हैं, जो सनसनीखेज होते हैं. उन्होंने कहा था कि फेक न्यूज तेजी से फैल रही हैं, जो न केवल मीडिया के लिए खतरा है, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी बड़ा खतरा है.§֍:नहीं रुका विपक्षी दल का हंगामा§ֆ:लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही इसके बाद स्थगित करनी पड़ी. स्पीकर ओम बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन चलने देने की अपील की लेकिन इस अपील का कोई असर नहीं हुआ. स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. जिसके बाद 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई आसन पर दिलीप सैकिया आए. लेकिन विपक्षी सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया. अडानी समूह से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कुछ देर चली. हंगामे के बीच ही लिस्टेड बिजनेस सदन पटल पर रखे गए और नियम 377 के तहत स्वीकृत मामले लिखित में सदन पटल पर रखे गए. इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.§संसद में अभी शीतकालीन सत्र चल रहा है. इसके चलते केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट रोकने के लिए कानून बनाने की मांग की है. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष इसपर चर्चा करेगा. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हमारी संस्कृति और वहां की संस्कृति में बहुत अंतर है, जहां से ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आए हैं. उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति इस मुद्दे को उठाए और इस पर सख्त कानून बनाए.
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