ֆ:§֍:मशरूम उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल§ֆ:PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने मशरूम खेती की शुरुआत करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. एचएस गर्चा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि PAU हर वर्ष दो बार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि किसानों की आय में इज़ाफा हो सके। उन्होंने बताया कि पंजाब देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक राज्यों में शामिल है और इसके अधिकांश उत्पादक PAU से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।§֍:मशरूम प्रोसेसिंग से बढ़ाएं लाभ§ֆ:कौशल विकास की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रूपिंदर कौर ने बताया कि मशरूम उत्पादन एक कम लागत, कम जगह में किया जाने वाला लाभकारी व्यवसाय है, जो ग्रामीण समुदाय के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर, मशरूम पाउडर, अचार आदि जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण की ओर भी कदम बढ़ाने को कहा।§֍:मशरूम की विविध किस्में, पोषण लाभ और विपणन पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन§ֆ:डॉ. शिवानी शर्मा, डॉ. जसप्रीत कौर, डॉ. आइना गोयल, डॉ. सोनिका शर्मा, डॉ. अर्शदीप सिंह और डॉ. राकेश राठौर ने मशरूम की विभिन्न किस्मों की खेती, उनके पोषण लाभ, प्रसंस्करण, घरेलू खाद्य उत्पादों की तैयारी और बाजार रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी।कार्यक्रम के समन्वयक एवं विस्तार वैज्ञानिक डॉ. लवलीश गर्ग ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संस्थागत संपर्क की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विशाल बेक्टर, कुलदीप कौर और कंवलजीत कौर भी उपस्थित रहीं।§पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के कौशल विकास केंद्र और सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा “गर्मी और उष्णकटिबंधीय मशरूम की खेती” पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में 71 किसान, ग्रामीण महिलाएं और युवा भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण गुरुवार को संपन्न होगा और इसे विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एमएस भुल्लर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया है।

