भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए...
Read moreDetailsदेश में नकली खाद (Fertilizer), बीज (Seeds) और कीटनाशकों (Pesticides) की समस्या लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती...
Read moreDetailsवैश्विक गैस संकट से अब उर्वरक उद्योग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया (Middle...
Read moreDetailsउत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र में शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एग्री जंक्शन योजना का विस्तार कर...
Read moreDetailsमुजफ्फरपुर, बिहार: बिहार की मिट्टी हमेशा से मेहनती किसानों और अनोखे कृषि प्रयोगों के लिए जानी जाती रही है। इसी...
Read moreDetailsInterest Subvention Scheme: भारत में खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक समय पर सस्ती...
Read moreDetailsभारत के लिए उर्वरक आपूर्ति के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। यूरिया, डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर...
Read moreDetailsBiofuel Policy: भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। हमारे...
Read moreDetailsMSP Scheme 2026: भारत में खेती केवल उत्पादन का काम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों परिवारों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा...
Read moreDetailsबछवाड़ा, बेगूसराय (बिहार) | किसान: अमरदीप चौधरी | फसल: पपीता (Papaya Farming) खेती को लोग अक्सर मेहनत का काम कहते हैं — और यह सच भी है। लेकिन जब मेहनत के साथ सही सोच और थोड़ी हिम्मत मिल जाए, तो वही खेती जिंदगी बदल देती है। बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड की चिरंजीवीपुर पंचायत, वार्ड नंबर 3 के रहने वाले किसान अमरदीप चौधरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। आज अमरदीप की Papaya Farming पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। उनके Papaya Farm से हर दो दिन में 2 से 3 क्विंटल पपीता निकलता है, मंडी में ₹3,000 से ₹4,000 प्रति क्विंटल का भाव मिलता है और महीने के अंत में जेब में पारंपरिक खेती से चार गुना तक ज्यादा पैसा होता है। लेकिन यह सफर आसान नहीं था। पहले क्या था? — गेहूं-मक्का, मेहनत ज्यादा, कमाई कम कुछ साल पहले तक अमरदीप भी बिहार के अधिकतर किसानों की तरह गेहूं और मक्का की खेती करते थे। हर सीजन में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी का खर्च होता था। फसल तैयार होती थी, मंडी जाते थे — लेकिन हाथ में जो बचता था, वो परिवार चलाने के लिए बस काफी होता था, आगे बढ़ने के लिए नहीं। "लागत निकालने के बाद कुछ खास बचता नहीं था। लगा कि कुछ तो बदलना होगा।" — अमरदीप चौधरी यही बेचैनी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी। इंटरनेट ने बदली सोच — मोबाइल से मिली Papaya Farming की राह अमरदीप पढ़े-लिखे किसान हैं। उन्होंने अपने मोबाइल फोन को सिर्फ कॉल करने तक सीमित नहीं रखा। YouTube, कृषि वेबसाइट्स और ऑनलाइन किसान समूहों से उन्होंने आधुनिक खेती की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें पपीते की व्यावसायिक खेती (Commercial Papaya Farming) के बारे में पता चला। देश के कई हिस्सों में किसान Papaya Farming के जरिए अच्छा मुनाफा कमा रहे थे। उन्होंने गहराई से अध्ययन किया — पौधों की देखभाल, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, बाजार की मांग, सब कुछ। ...
Read moreDetails
Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.
© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.