सफ़लता की कहानी

‘कृषि विक्रम विकसित कृषि, विकसित भारत 2047’ सम्मेलन में कृषि के भविष्य पर मंथन, तकनीक और नवाचार को बताया विकास की कुंजी

भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए...

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नकली खाद, बीज और कीटनाशकों पर सख्ती की तैयारी: किसानों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा अभियान

देश में नकली खाद (Fertilizer), बीज (Seeds) और कीटनाशकों (Pesticides) की समस्या लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती...

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वैश्विक गैस संकट से यूरिया बाजार पर दबाव, किसानों और उर्वरक उद्योग के लिए बढ़ी चिंता

वैश्विक गैस संकट से अब उर्वरक उद्योग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया (Middle...

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यूपी एग्री जंक्शन योजना: कृषि क्षेत्र में पढ़े-लिखे युवाओं के लिए रोजगार का शानदार मौका

उत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र में शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एग्री जंक्शन योजना का विस्तार कर...

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बिहार के mango man एक ही बाग में उगा दीं 92 दुर्लभ आम की किस्में

मुजफ्फरपुर, बिहार: बिहार की मिट्टी हमेशा से मेहनती किसानों और अनोखे कृषि प्रयोगों के लिए जानी जाती रही है। इसी...

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फर्टिलाइज़र सप्लाई पर संकट टला, चार कार्गो जहाज भारत की ओर रवाना

भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। यूरिया, डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर...

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बेगूसराय के किसान अमरदीप ने पपीते की खेती ( Papaya Farming) से रचा सफलता का नया अध्याय

बछवाड़ा, बेगूसराय (बिहार) | किसान: अमरदीप चौधरी | फसल: पपीता (Papaya Farming)  खेती को लोग अक्सर मेहनत का काम कहते हैं — और यह सच भी है। लेकिन जब मेहनत के साथ सही सोच और थोड़ी हिम्मत मिल जाए, तो वही खेती जिंदगी बदल देती है। बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड की चिरंजीवीपुर पंचायत, वार्ड नंबर 3 के रहने वाले किसान अमरदीप चौधरी की कहानी कुछ ऐसी ही है।  आज अमरदीप की Papaya Farming पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। उनके Papaya Farm से हर दो दिन में 2 से 3 क्विंटल पपीता निकलता है, मंडी में ₹3,000 से ₹4,000 प्रति क्विंटल का भाव मिलता है और महीने के अंत में जेब में पारंपरिक खेती से चार गुना तक ज्यादा पैसा होता है।  लेकिन यह सफर आसान नहीं था।  पहले क्या था? — गेहूं-मक्का, मेहनत ज्यादा, कमाई कम  कुछ साल पहले तक अमरदीप भी बिहार के अधिकतर किसानों की तरह गेहूं और मक्का की खेती करते थे। हर सीजन में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी का खर्च होता था। फसल तैयार होती थी, मंडी जाते थे — लेकिन हाथ में जो बचता था, वो परिवार चलाने के लिए बस काफी होता था, आगे बढ़ने के लिए नहीं।  "लागत निकालने के बाद कुछ खास बचता नहीं था। लगा कि कुछ तो बदलना होगा।" — अमरदीप चौधरी  यही बेचैनी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी।   इंटरनेट ने बदली सोच — मोबाइल से मिली Papaya Farming की राह  अमरदीप पढ़े-लिखे किसान हैं। उन्होंने अपने मोबाइल फोन को सिर्फ कॉल करने तक सीमित नहीं रखा। YouTube, कृषि वेबसाइट्स और ऑनलाइन किसान समूहों से उन्होंने आधुनिक खेती की जानकारी जुटानी शुरू की।  इसी दौरान उन्हें पपीते की व्यावसायिक खेती (Commercial Papaya Farming) के बारे में पता चला। देश के कई हिस्सों में किसान Papaya Farming के जरिए अच्छा मुनाफा कमा रहे थे। उन्होंने गहराई से अध्ययन किया — पौधों की देखभाल, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, बाजार की मांग, सब कुछ। ...

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