• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home सफ़लता की कहानी

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का बड़ा अवसर, अक्टूबर से शुरू होंगे 1,164 प्रशिक्षण बैच

The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

Emran Khan by Emran Khan
September 19, 2026
in सफ़लता की कहानी
0
The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें उद्योग की जरूरत के अनुरूप कौशल प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय अक्टूबर 2026 से अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दीन दयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 2.0 के तहत नए प्रशिक्षण बैच शुरू करने जा रहा है। इस पहल के पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से शुरू किए जाने की तैयारी है।

इस योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को Skill Training उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। ग्रामीण युवाओं को उनकी क्षमता और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित करने से न केवल उनके रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के अंतर्गत 31 दिसंबर 2027 तक 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य स्वीकृत किया गया है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण परियोजनाओं की तैयारी, लक्ष्य आवंटन, युवाओं की पहचान और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

14 राज्यों में अक्टूबर से शुरू होंगे प्रशिक्षण बैच

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण बैच शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा की गई है।

इनमें ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी, कर्नाटक, तेलंगाना और बिहार शामिल हैं।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 31 दिसंबर 2027 तक कुल 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का स्वीकृत लक्ष्य है। इसी दिशा में अक्टूबर 2026 में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच शुरू करने की तैयारी की गई है।

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा और प्रशिक्षण का एक बड़ा अवसर उपलब्ध करा सकती है। विशेष रूप से ऐसे युवा, जिनके पास औपचारिक उच्च शिक्षा या तकनीकी प्रशिक्षण के सीमित अवसर हैं, वे अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार विभिन्न रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं।

24 राज्यों ने 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए आवंटित किए लक्ष्य

मंत्रालय के अनुसार डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए 5.6 लाख लक्ष्य आवंटित किए जा चुके हैं।

इससे संकेत मिलता है कि योजना को लागू करने के लिए राज्यों में व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी लक्ष्य आवंटित करने की प्रक्रिया जारी है।

सरकार की योजना के अनुसार चरणबद्ध समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रशिक्षण बैच शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वीकृत लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि निर्धारित समयसीमा के भीतर वास्तविक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में परिवर्तित हों।

ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

डीडीयू-जीकेवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके तहत ग्रामीण गरीब युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण की अवधि सामान्य तौर पर 3 महीने से लेकर 12 महीने तक होती है।

योजना की मूल भावना यह है कि ग्रामीण युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल प्रदान किए जाएं जिनकी रोजगार बाजार में मांग है। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के बाद नौकरी या आजीविका के अन्य अवसरों से जुड़ने में मदद मिल सकती है।

आज के समय में रोजगार के क्षेत्र में तकनीकी जानकारी, डिजिटल क्षमता, संचार कौशल और व्यावसायिक दक्षता की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में रोजगारपरक Skill Training ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक अवसरों का नया रास्ता खोल सकती है।

सभी 31 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य आवंटित

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन को लेकर हुई समीक्षा बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया गया।

मंत्रालय के अनुसार, 2026-28 की दो वर्षीय अवधि के लिए सभी 31 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य आवंटित किए जा चुके हैं।

अब अगला महत्वपूर्ण चरण इन लक्ष्यों को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों यानी पीआईए तक पहुंचाना और प्रशिक्षण बैचों को निर्धारित समय के भीतर शुरू करना है।

मंत्रालय ने कार्यान्वयन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्य आवंटित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आह्वान किया है। इसके साथ ही निर्धारित समयसीमा के अनुसार प्रशिक्षण बैच शुरू करने पर भी जोर दिया गया है।

31 अक्टूबर तक पीआईए को लक्ष्य आवंटित करने की तैयारी

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 अक्टूबर 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करने के लिए परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्य आवंटित करना सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय को प्राप्त जानकारी के अनुसार, पात्र ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के लिए जुटाने के उद्देश्य से कार्यान्वयन करने वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पीआईए को 5 लाख से अधिक लक्ष्य पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।

इस प्रक्रिया में युवाओं की पहचान और उन्हें प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करना एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र युवाओं तक योजना की जानकारी पहुंचाना और उन्हें प्रशिक्षण से जोड़ना इस पूरी पहल की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार अधिकांश राज्य अक्टूबर 2026 में प्रशिक्षण और ग्रामीण युवाओं को जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने में सक्षम होंगे।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में Digital Portal को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। मंत्रालय ने बताया कि एकीकृत डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल परियोजना की पूरी अवधि को सुगम बनाने के साथ-साथ दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देने में सक्षम है।

एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से योजना के विभिन्न चरणों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। इसमें प्रशिक्षण परियोजनाओं से संबंधित जानकारी, लक्ष्य, कार्यान्वयन और अन्य प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने की सुविधा मिलेगी।

डिजिटल निगरानी का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी हो सकता है कि योजना की प्रगति से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो और संबंधित स्तरों पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

राज्य कोषागार पोर्टल से एकीकरण पर विशेष ध्यान

समीक्षा बैठक में राज्यों के Treasury Portals के साथ डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल के एकीकरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

जहां यह कार्य अभी लंबित था, वहां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे शीघ्र पूरा करने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने राज्यों को 30 सितंबर 2026 तक आवश्यक एकीकरण पूरा करने के लिए कहा है।

इस एकीकरण का उद्देश्य ग्रामीण कौशल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा को बेहतर बनाना है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के मजबूत होने से योजना के वित्तीय संचालन में पारदर्शिता और प्रक्रिया की गति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पीआईए के लिए क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित करेगा मंत्रालय

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के डिजिटल प्लेटफॉर्म और उसकी कार्यप्रणाली को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय अक्टूबर 2026 के दौरान चार स्थानों पर Hybrid Mode में क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है।

ये कार्यशालाएं निम्न स्थानों पर आयोजित की जाएंगी—

  • शिलॉन्ग – 5 अक्टूबर 2026
  • विजयवाड़ा – 7 अक्टूबर 2026
  • मुंबई – 9 अक्टूबर 2026
  • धर्मशाला – 16 अक्टूबर 2026

इन कार्यशालाओं में पीआईए को डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल, उससे जुड़ी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याओं और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर भी मिलेगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे इन कार्यशालाओं में कुछ परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करें।

प्रशिक्षण व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की चुनौती

किसी भी कौशल विकास कार्यक्रम की सफलता केवल लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं होती। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पात्र युवाओं तक प्रशिक्षण की जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है, कितने युवा प्रशिक्षण से जुड़ते हैं और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें रोजगार या आजीविका के अवसर किस स्तर तक मिलते हैं।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में भी ग्रामीण युवाओं की पहचान, उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों तक लाना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ना महत्वपूर्ण चरण होंगे।

इसके लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले प्रशिक्षण बैच इस दिशा में योजना के जमीनी कार्यान्वयन की महत्वपूर्ण शुरुआत होंगे।

वित्तीय स्थिति की भी हुई समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान योजना की Financial Status पर भी चर्चा की गई। बैठक में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने संकेत दिया कि अक्टूबर 2026 से प्रशिक्षण बैच शुरू होने के साथ योजना के अंतर्गत व्यय में वृद्धि होने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण गतिविधियों के विस्तार के साथ प्रशिक्षण संस्थानों, परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी बढ़ेगा। इसलिए योजना के प्रभावी संचालन के लिए वित्तीय प्रबंधन और समय पर भुगतान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

डिजिटल पोर्टल और राज्य कोषागार पोर्टल के एकीकरण को भी इसी व्यापक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार

भारत की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और ग्रामीण युवाओं की बढ़ती संख्या रोजगार और कौशल के अवसरों की तलाश में है। ऐसे में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जब किसी ग्रामीण युवा को रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलता है और उसके बाद उसे रोजगार का अवसर प्राप्त होता है, तो इसका प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसकी आय में वृद्धि होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य इसी व्यापक ग्रामीण विकास दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है।

युवाओं के लिए रोजगार और कौशल के बीच सेतु

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 को ग्रामीण युवाओं के लिए Skill और Employment के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जा सकता है। योजना के माध्यम से युवाओं को उनकी क्षमता और रोजगार बाजार की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर है।

तीन महीने से लेकर 12 महीने तक की प्रशिक्षण अवधि युवाओं को अलग-अलग प्रकार के कौशल हासिल करने का अवसर देती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं को भी लाभ मिल सकता है, जो रोजगार के लिए दूसरे शहरों या औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि प्रशिक्षण के बाद वास्तविक रोजगार परिणाम प्रशिक्षण की गुणवत्ता, स्थानीय रोजगार बाजार, उद्योग की मांग और युवाओं की व्यक्तिगत परिस्थितियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेंगे।

अक्टूबर 2026 से शुरू होगा नया चरण

ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया समीक्षा के बाद डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन को अब जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है।

पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहे हैं। वहीं 31 दिसंबर 2027 तक 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का स्वीकृत लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ ही 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए 5.6 लाख लक्ष्य आवंटित किए जाने से योजना के व्यापक विस्तार का संकेत मिलता है।

अब आने वाले महीनों में योजना की वास्तविक प्रगति इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण बैच कितनी तेजी से शुरू होते हैं, कितने पात्र ग्रामीण युवा इससे जुड़ते हैं, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी रहती है और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर किस स्तर तक मिलते हैं।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत डिजिटल व्यवस्था, क्षेत्रीय कार्यशालाओं, लक्ष्य आवंटन और समयबद्ध प्रशिक्षण शुरुआत पर दिया जा रहा जोर यह दर्शाता है कि ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

अगर निर्धारित समयसीमा के अनुसार लक्ष्य आवंटन, प्रशिक्षण और डिजिटल प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह पहल बड़ी संख्या में ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर उपलब्ध करा सकती है और उन्हें बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।

ग्रामीण युवा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मजबूत कड़ी बनाने की दिशा में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 का अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाला नया चरण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में इसके माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलने की उम्मीद है।

 

Tags: agri newsAgricultureFarmingIndian Agri
Previous Post

जलवायु परिवर्तन के युग में बीजों की महत्ता

Next Post

दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन, हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस

Next Post
दक्षिणी राज्यों में कृषि विकास को नई दिशा देने और राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और Commitments को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में पूरे दिन जिन विषयों पर चर्चा हुई है, उनमें से जो Actionable Points हैं, उन पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक और किसान मिलकर एक ‘टीम एग्रीकल्चर’ हैं। सभी को मिलकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में राज्यों ने जो Commitments दिए हैं, उन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि किसी राज्य ने Farmer ID का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। केवल बैठकों में चर्चा करने से काम पूरा नहीं होगा, बल्कि उसके बाद तय किए गए कार्यों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी Conference का उद्देश्य केवल बैठक करना नहीं बल्कि उसके परिणाम जमीन पर दिखाई देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक दिन बैठक, चर्चा और औपचारिकताओं के बाद कोई काम नहीं हुआ तो यह जनता के साथ ‘Cheating’ होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हंगामा खड़ा करना नहीं है, बल्कि कृषि की वास्तविक स्थिति में बदलाव लाना है। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों की टीम को मिलकर ऐसे प्रयास करने होंगे जिनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों द्वारा जब भी तारीख तय की जाएगी, भारत सरकार के वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक उनके साथ जाएंगे। वैज्ञानिक गांवों और खेतों में पहुंचेंगे, किसानों के साथ बैठेंगे और किसान, वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर स्थानीय कृषि समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे। Farmer ID और AgriStack पर तेजी से काम करने की जरूरत केंद्रीय कृषि मंत्री ने AgriStack और Farmer ID को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बताया। उन्होंने कहा कि Farmer ID तैयार करने के काम में कई राज्यों ने अच्छी प्रगति की है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से अधिक की प्रगति तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में Geo-Referencing का काम भी अच्छा हुआ है। वहीं Digital Crop Survey के मामले में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है। हालांकि Farmer ID के मामले में केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Farmer ID का काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई व्यवस्थाएं इससे जुड़ेंगी। उन्होंने अपेक्षा जताई कि कोई भी राज्य इस प्रक्रिया में पीछे न रहे। Land Record और किसान रजिस्ट्री का समन्वय जरूरी सम्मेलन में Land Records और Farmer Registry के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां अभी Land Parcels किसान रजिस्ट्री से नहीं जुड़े हैं, वहां इस काम को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने कहा कि Land Record Data का Farmer Registry के साथ समन्वय भी आवश्यक है। दक्षिणी राज्यों में Tenant Farmers यानी बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर उसे Notify करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करने की बात कही गई। इसके अलावा गांवों के नक्शों की Geo-Referencing का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को पूरा करना है। 13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा ‘भारत विस्तार’ केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को उनकी अपनी भाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान अलग-अलग जगहों पर नहीं जा सकता। इसी उद्देश्य से ‘भारत विस्तार’ व्यवस्था विकसित की गई है, जिसके माध्यम से किसान मोबाइल के जरिए अपनी समस्या पूछकर उचित सलाह प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल यह व्यवस्था हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने की योजना है। इसके बाद किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उन्हें उसी भाषा में जवाब एवं सलाह मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी भाषा में व्यक्ति अपने विचार और समस्याएं अधिक स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकता है। किसानों तक Digital Agriculture की सुविधाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए राज्यों की योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने पर काम किया जाएगा। Lab से Land तक पहुंचना चाहिए कृषि Research कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी सुविधा के अनुसार 15 या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी दौरान भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे। केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक हैं। ICAR के संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विश्वविद्यालय केवल Research करने के लिए नहीं हैं, बल्कि उस Research को किसानों तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक एक साथ नहीं बैठेंगे तथा कृषि अनुसंधान किसान के खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कृषि विकास का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘Lab to Land’ approach को मजबूत करना जरूरी है। भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाने का लक्ष्य शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने और देश को दुनिया का Food Basket बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसान सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है और आने वाले समय में भी कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए Technology, Research, Digital Agriculture, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों की भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत को वैश्विक कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। 28-29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेंस केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आगामी 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में Rabi Conference आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ रबी सीजन का विस्तृत Plan लेकर शामिल होंगे। इस Conference में यह तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। राज्यों के Crop-wise Plans को अंतिम रूप दिए जाने के बाद बीज की उपलब्धता, Fertilizer Requirement और अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इस आधार पर रबी सीजन के लिए आगे की तैयारी और Supply Planning की जाएगी। PIB के अनुसार, 28-29 सितंबर की यह बैठक राज्यों की रबी योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण मंच होगी। सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट भी सम्मेलन में शामिल हुए। दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर समन्वय, Digital Agriculture, Farmer Registry, कृषि अनुसंधान, फसल योजना और किसानों तक तकनीक की पहुंच को मजबूत करना रहा। सम्मेलन में टिकाऊ और resilient agriculture से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में इन बैठकों की सफलता इस बात से जुड़ी होगी कि सम्मेलन में तय किए गए Action Points को राज्य और केंद्र किस तरह निर्धारित समय सीमा में जमीन पर लागू करते हैं। यही कारण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने बार-बार Commitments की समयबद्ध पूर्ति और Research को Lab से Land तक पहुंचाने पर जोर दिया।

दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन, हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस

Recent Posts

  • Drip Irrigation से पानी और लागत की कितनी बचत हो सकती है?
  • भारत में FMD-मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम, राज्य कार्य योजनाओं और PPP को मजबूत करने पर जोर
  • Soil Health Testing: फसल बोने से पहले क्यों जरूरी है मिट्टी की जांच?
  • मत्स्यपालन विभाग 2 से 31 अक्टूबर तक चलाएगा विशेष अभियान 6.0, स्वच्छता और सुशासन पर जोर
  • कृषि विभाग 2 से 31 अक्टूबर तक चलाएगा विशेष अभियान 6.0, स्वच्छता और लंबित कार्यों के निपटारे पर रहेगा फोकस

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.