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Home कृषि समाचार

दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन, हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस

Discussion on agricultural roadmap for southern states, regional agriculture conference in Hyderabad

Emran Khan by Emran Khan
September 19, 2026
in कृषि समाचार
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दक्षिणी राज्यों में कृषि विकास को नई दिशा देने और राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और Commitments को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में पूरे दिन जिन विषयों पर चर्चा हुई है, उनमें से जो Actionable Points हैं, उन पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक और किसान मिलकर एक ‘टीम एग्रीकल्चर’ हैं। सभी को मिलकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में राज्यों ने जो Commitments दिए हैं, उन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि किसी राज्य ने Farmer ID का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। केवल बैठकों में चर्चा करने से काम पूरा नहीं होगा, बल्कि उसके बाद तय किए गए कार्यों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी Conference का उद्देश्य केवल बैठक करना नहीं बल्कि उसके परिणाम जमीन पर दिखाई देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक दिन बैठक, चर्चा और औपचारिकताओं के बाद कोई काम नहीं हुआ तो यह जनता के साथ ‘Cheating’ होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हंगामा खड़ा करना नहीं है, बल्कि कृषि की वास्तविक स्थिति में बदलाव लाना है। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों की टीम को मिलकर ऐसे प्रयास करने होंगे जिनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों द्वारा जब भी तारीख तय की जाएगी, भारत सरकार के वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक उनके साथ जाएंगे। वैज्ञानिक गांवों और खेतों में पहुंचेंगे, किसानों के साथ बैठेंगे और किसान, वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर स्थानीय कृषि समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे। Farmer ID और AgriStack पर तेजी से काम करने की जरूरत केंद्रीय कृषि मंत्री ने AgriStack और Farmer ID को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बताया। उन्होंने कहा कि Farmer ID तैयार करने के काम में कई राज्यों ने अच्छी प्रगति की है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से अधिक की प्रगति तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में Geo-Referencing का काम भी अच्छा हुआ है। वहीं Digital Crop Survey के मामले में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है। हालांकि Farmer ID के मामले में केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Farmer ID का काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई व्यवस्थाएं इससे जुड़ेंगी। उन्होंने अपेक्षा जताई कि कोई भी राज्य इस प्रक्रिया में पीछे न रहे। Land Record और किसान रजिस्ट्री का समन्वय जरूरी सम्मेलन में Land Records और Farmer Registry के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां अभी Land Parcels किसान रजिस्ट्री से नहीं जुड़े हैं, वहां इस काम को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने कहा कि Land Record Data का Farmer Registry के साथ समन्वय भी आवश्यक है। दक्षिणी राज्यों में Tenant Farmers यानी बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर उसे Notify करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करने की बात कही गई। इसके अलावा गांवों के नक्शों की Geo-Referencing का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को पूरा करना है। 13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा ‘भारत विस्तार’ केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को उनकी अपनी भाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान अलग-अलग जगहों पर नहीं जा सकता। इसी उद्देश्य से ‘भारत विस्तार’ व्यवस्था विकसित की गई है, जिसके माध्यम से किसान मोबाइल के जरिए अपनी समस्या पूछकर उचित सलाह प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल यह व्यवस्था हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने की योजना है। इसके बाद किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उन्हें उसी भाषा में जवाब एवं सलाह मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी भाषा में व्यक्ति अपने विचार और समस्याएं अधिक स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकता है। किसानों तक Digital Agriculture की सुविधाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए राज्यों की योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने पर काम किया जाएगा। Lab से Land तक पहुंचना चाहिए कृषि Research कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी सुविधा के अनुसार 15 या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी दौरान भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे। केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक हैं। ICAR के संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विश्वविद्यालय केवल Research करने के लिए नहीं हैं, बल्कि उस Research को किसानों तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक एक साथ नहीं बैठेंगे तथा कृषि अनुसंधान किसान के खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कृषि विकास का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘Lab to Land’ approach को मजबूत करना जरूरी है। भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाने का लक्ष्य शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने और देश को दुनिया का Food Basket बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसान सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है और आने वाले समय में भी कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए Technology, Research, Digital Agriculture, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों की भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत को वैश्विक कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। 28-29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेंस केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आगामी 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में Rabi Conference आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ रबी सीजन का विस्तृत Plan लेकर शामिल होंगे। इस Conference में यह तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। राज्यों के Crop-wise Plans को अंतिम रूप दिए जाने के बाद बीज की उपलब्धता, Fertilizer Requirement और अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इस आधार पर रबी सीजन के लिए आगे की तैयारी और Supply Planning की जाएगी। PIB के अनुसार, 28-29 सितंबर की यह बैठक राज्यों की रबी योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण मंच होगी। सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट भी सम्मेलन में शामिल हुए। दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर समन्वय, Digital Agriculture, Farmer Registry, कृषि अनुसंधान, फसल योजना और किसानों तक तकनीक की पहुंच को मजबूत करना रहा। सम्मेलन में टिकाऊ और resilient agriculture से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में इन बैठकों की सफलता इस बात से जुड़ी होगी कि सम्मेलन में तय किए गए Action Points को राज्य और केंद्र किस तरह निर्धारित समय सीमा में जमीन पर लागू करते हैं। यही कारण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने बार-बार Commitments की समयबद्ध पूर्ति और Research को Lab से Land तक पहुंचाने पर जोर दिया।

दक्षिणी राज्यों में कृषि विकास को नई दिशा देने और राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और Commitments को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में पूरे दिन जिन विषयों पर चर्चा हुई है, उनमें से जो Actionable Points हैं, उन पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक और किसान मिलकर एक ‘टीम एग्रीकल्चर’ हैं। सभी को मिलकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में राज्यों ने जो Commitments दिए हैं, उन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि किसी राज्य ने Farmer ID का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। केवल बैठकों में चर्चा करने से काम पूरा नहीं होगा, बल्कि उसके बाद तय किए गए कार्यों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी Conference का उद्देश्य केवल बैठक करना नहीं बल्कि उसके परिणाम जमीन पर दिखाई देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक दिन बैठक, चर्चा और औपचारिकताओं के बाद कोई काम नहीं हुआ तो यह जनता के साथ ‘Cheating’ होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हंगामा खड़ा करना नहीं है, बल्कि कृषि की वास्तविक स्थिति में बदलाव लाना है। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों की टीम को मिलकर ऐसे प्रयास करने होंगे जिनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों द्वारा जब भी तारीख तय की जाएगी, भारत सरकार के वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक उनके साथ जाएंगे। वैज्ञानिक गांवों और खेतों में पहुंचेंगे, किसानों के साथ बैठेंगे और किसान, वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर स्थानीय कृषि समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे। Farmer ID और AgriStack पर तेजी से काम करने की जरूरत केंद्रीय कृषि मंत्री ने AgriStack और Farmer ID को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बताया। उन्होंने कहा कि Farmer ID तैयार करने के काम में कई राज्यों ने अच्छी प्रगति की है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से अधिक की प्रगति तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में Geo-Referencing का काम भी अच्छा हुआ है। वहीं Digital Crop Survey के मामले में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है। हालांकि Farmer ID के मामले में केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Farmer ID का काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई व्यवस्थाएं इससे जुड़ेंगी। उन्होंने अपेक्षा जताई कि कोई भी राज्य इस प्रक्रिया में पीछे न रहे। Land Record और किसान रजिस्ट्री का समन्वय जरूरी सम्मेलन में Land Records और Farmer Registry के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां अभी Land Parcels किसान रजिस्ट्री से नहीं जुड़े हैं, वहां इस काम को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने कहा कि Land Record Data का Farmer Registry के साथ समन्वय भी आवश्यक है। दक्षिणी राज्यों में Tenant Farmers यानी बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर उसे Notify करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करने की बात कही गई। इसके अलावा गांवों के नक्शों की Geo-Referencing का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को पूरा करना है। 13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा ‘भारत विस्तार’ केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को उनकी अपनी भाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान अलग-अलग जगहों पर नहीं जा सकता। इसी उद्देश्य से ‘भारत विस्तार’ व्यवस्था विकसित की गई है, जिसके माध्यम से किसान मोबाइल के जरिए अपनी समस्या पूछकर उचित सलाह प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल यह व्यवस्था हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने की योजना है। इसके बाद किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उन्हें उसी भाषा में जवाब एवं सलाह मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी भाषा में व्यक्ति अपने विचार और समस्याएं अधिक स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकता है। किसानों तक Digital Agriculture की सुविधाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए राज्यों की योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने पर काम किया जाएगा। Lab से Land तक पहुंचना चाहिए कृषि Research कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी सुविधा के अनुसार 15 या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी दौरान भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे। केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक हैं। ICAR के संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विश्वविद्यालय केवल Research करने के लिए नहीं हैं, बल्कि उस Research को किसानों तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक एक साथ नहीं बैठेंगे तथा कृषि अनुसंधान किसान के खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कृषि विकास का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘Lab to Land’ approach को मजबूत करना जरूरी है। भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाने का लक्ष्य शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने और देश को दुनिया का Food Basket बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसान सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है और आने वाले समय में भी कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए Technology, Research, Digital Agriculture, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों की भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत को वैश्विक कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। 28-29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेंस केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आगामी 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में Rabi Conference आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ रबी सीजन का विस्तृत Plan लेकर शामिल होंगे। इस Conference में यह तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। राज्यों के Crop-wise Plans को अंतिम रूप दिए जाने के बाद बीज की उपलब्धता, Fertilizer Requirement और अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इस आधार पर रबी सीजन के लिए आगे की तैयारी और Supply Planning की जाएगी। PIB के अनुसार, 28-29 सितंबर की यह बैठक राज्यों की रबी योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण मंच होगी। सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट भी सम्मेलन में शामिल हुए। दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर समन्वय, Digital Agriculture, Farmer Registry, कृषि अनुसंधान, फसल योजना और किसानों तक तकनीक की पहुंच को मजबूत करना रहा। सम्मेलन में टिकाऊ और resilient agriculture से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में इन बैठकों की सफलता इस बात से जुड़ी होगी कि सम्मेलन में तय किए गए Action Points को राज्य और केंद्र किस तरह निर्धारित समय सीमा में जमीन पर लागू करते हैं। यही कारण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने बार-बार Commitments की समयबद्ध पूर्ति और Research को Lab से Land तक पहुंचाने पर जोर दिया।

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दक्षिणी राज्यों में कृषि विकास को नई दिशा देने और राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और Commitments को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में पूरे दिन जिन विषयों पर चर्चा हुई है, उनमें से जो Actionable Points हैं, उन पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक और किसान मिलकर एक ‘टीम एग्रीकल्चर’ हैं। सभी को मिलकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकालना होगा।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में राज्यों ने जो Commitments दिए हैं, उन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि किसी राज्य ने Farmer ID का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। केवल बैठकों में चर्चा करने से काम पूरा नहीं होगा, बल्कि उसके बाद तय किए गए कार्यों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी Conference का उद्देश्य केवल बैठक करना नहीं बल्कि उसके परिणाम जमीन पर दिखाई देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक दिन बैठक, चर्चा और औपचारिकताओं के बाद कोई काम नहीं हुआ तो यह जनता के साथ ‘Cheating’ होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हंगामा खड़ा करना नहीं है, बल्कि कृषि की वास्तविक स्थिति में बदलाव लाना है। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों की टीम को मिलकर ऐसे प्रयास करने होंगे जिनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे।

केंद्रीय मंत्री ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों द्वारा जब भी तारीख तय की जाएगी, भारत सरकार के वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक उनके साथ जाएंगे। वैज्ञानिक गांवों और खेतों में पहुंचेंगे, किसानों के साथ बैठेंगे और किसान, वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर स्थानीय कृषि समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।

Farmer ID और AgriStack पर तेजी से काम करने की जरूरत

केंद्रीय कृषि मंत्री ने AgriStack और Farmer ID को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बताया। उन्होंने कहा कि Farmer ID तैयार करने के काम में कई राज्यों ने अच्छी प्रगति की है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से अधिक की प्रगति तक पहुंच चुके हैं।

उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में Geo-Referencing का काम भी अच्छा हुआ है। वहीं Digital Crop Survey के मामले में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है।

हालांकि Farmer ID के मामले में केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Farmer ID का काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई व्यवस्थाएं इससे जुड़ेंगी। उन्होंने अपेक्षा जताई कि कोई भी राज्य इस प्रक्रिया में पीछे न रहे।

Land Record और किसान रजिस्ट्री का समन्वय जरूरी

सम्मेलन में Land Records और Farmer Registry के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां अभी Land Parcels किसान रजिस्ट्री से नहीं जुड़े हैं, वहां इस काम को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई। उन्होंने कहा कि Land Record Data का Farmer Registry के साथ समन्वय भी आवश्यक है।

दक्षिणी राज्यों में Tenant Farmers यानी बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर उसे Notify करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करने की बात कही गई।

इसके अलावा गांवों के नक्शों की Geo-Referencing का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को पूरा करना है।

13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा ‘भारत विस्तार’

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को उनकी अपनी भाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान अलग-अलग जगहों पर नहीं जा सकता।

इसी उद्देश्य से ‘भारत विस्तार’ व्यवस्था विकसित की गई है, जिसके माध्यम से किसान मोबाइल के जरिए अपनी समस्या पूछकर उचित सलाह प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल यह व्यवस्था हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने की योजना है।

इसके बाद किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उन्हें उसी भाषा में जवाब एवं सलाह मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी भाषा में व्यक्ति अपने विचार और समस्याएं अधिक स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकता है। किसानों तक Digital Agriculture की सुविधाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए राज्यों की योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने पर काम किया जाएगा।

Lab से Land तक पहुंचना चाहिए कृषि Research

कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी सुविधा के अनुसार 15 या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी दौरान भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक हैं। ICAR के संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विश्वविद्यालय केवल Research करने के लिए नहीं हैं, बल्कि उस Research को किसानों तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक एक साथ नहीं बैठेंगे तथा कृषि अनुसंधान किसान के खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कृषि विकास का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘Lab to Land’ approach को मजबूत करना जरूरी है।

भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाने का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने और देश को दुनिया का Food Basket बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसान सभी को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है और आने वाले समय में भी कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए Technology, Research, Digital Agriculture, वैज्ञानिक नवाचार और किसानों की भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत को वैश्विक कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

28-29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेंस

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आगामी 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में Rabi Conference आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ रबी सीजन का विस्तृत Plan लेकर शामिल होंगे।

इस Conference में यह तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। राज्यों के Crop-wise Plans को अंतिम रूप दिए जाने के बाद बीज की उपलब्धता, Fertilizer Requirement और अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों का आकलन किया जाएगा।

इस आधार पर रबी सीजन के लिए आगे की तैयारी और Supply Planning की जाएगी। PIB के अनुसार, 28-29 सितंबर की यह बैठक राज्यों की रबी योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण मंच होगी।

सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी

सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया।

इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट भी सम्मेलन में शामिल हुए।

दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर समन्वय, Digital Agriculture, Farmer Registry, कृषि अनुसंधान, फसल योजना और किसानों तक तकनीक की पहुंच को मजबूत करना रहा। सम्मेलन में टिकाऊ और resilient agriculture से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

आने वाले समय में इन बैठकों की सफलता इस बात से जुड़ी होगी कि सम्मेलन में तय किए गए Action Points को राज्य और केंद्र किस तरह निर्धारित समय सीमा में जमीन पर लागू करते हैं। यही कारण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने बार-बार Commitments की समयबद्ध पूर्ति और Research को Lab से Land तक पहुंचाने पर जोर दिया।

 

Tags: Agri News Indian FarmingAgricultureFarming
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कृषि विभाग 2 से 31 अक्टूबर तक चलाएगा विशेष अभियान 6.0, स्वच्छता और लंबित कार्यों के निपटारे पर रहेगा फोकस

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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक Special Campaign 6.0 आयोजित करेगा। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप चलाए जाने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में cleanliness को institutionalize करना, लंबित मामलों को कम करना, सरकारी परिसरों में बेहतर कार्य वातावरण तैयार करना और आम जनता के कार्यालयों के साथ अनुभव को बेहतर बनाना है। इस अभियान के दौरान सरकारी कार्यालयों में उत्पन्न e-waste के निर्धारित नियमों के अनुसार collection, segregation और disposal पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के मुख्यालय के साथ-साथ उसके अधीनस्थ एवं संबद्ध कार्यालयों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। Special Campaign 5.0 में बड़े स्तर पर हुई कार्रवाई Special Campaign 6.0 से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने Special Campaign 5.0 के दौरान देशभर में व्यापक गतिविधियां संचालित की थीं। विभाग के मुख्यालय, अधीनस्थ और संबद्ध कार्यालयों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में cleanliness drive आयोजित की गई। अभियान के दौरान कई संगठनों ने plantation activities के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों की सफाई में भी भाग लिया। विभाग ने सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता के साथ-साथ लंबित मामलों और public grievances के निपटारे को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। कृषि क्षेत्र से जुड़े मामलों में किसानों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान विशेष महत्व रखता है। इसके लिए विभाग ने CPGRAMS के अलावा अपनी प्रमुख योजनाओं से संबंधित dedicated grievance portals भी विकसित किए हैं। किसानों की शिकायतों के समाधान पर विशेष ध्यान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सामने प्रमुख चुनौतियों में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के implementation से संबंधित public grievances का प्रभावी समाधान भी शामिल है। मंत्रालय से जुड़े मामलों में नागरिकों और किसानों के लिए Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) उपलब्ध है। इसके अलावा PM-KISAN और Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) जैसी प्रमुख योजनाओं के लिए dedicated digital platforms भी विकसित किए गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन portals पर प्राप्त किसानों की शिकायतों के समाधान की quality की समीक्षा की। वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव ने Special Campaign 5.0 के implementation phase के दौरान अधिकारियों को निर्धारित targets हासिल करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। लोक शिकायत और Special Campaign 5.0 पर हुई कार्यशाला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने DARPG के सहयोग से 9 अक्टूबर 2025 को Public Grievance और Special Campaign 5.0 पर एक workshop का आयोजन किया था। कार्यशाला को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव तथा DARPG के सचिव ने संबोधित किया। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में शिकायतों के प्रभावी समाधान, स्वच्छता अभियान और लंबित मामलों के निपटारे से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इस प्रकार की workshops का उद्देश्य विभिन्न विभागों और कार्यालयों में best practices को साझा करना तथा public service delivery को बेहतर बनाना है। E-waste से बनाए किसानों के लिए कृषि उपकरणों के मॉडल Special Campaign 5.0 के दौरान e-waste management विभाग की प्रमुख focus areas में शामिल रहा। इसी दिशा में कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थानों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे का रचनात्मक इस्तेमाल करते हुए किसानों से जुड़ी कृषि मशीनरी के कई models तैयार किए। इनमें drone, tractor, cultivator और अन्य कृषि उपकरणों एवं मशीनरी के models शामिल थे। अभियान के दौरान इन models की exhibition भी आयोजित की गई। यह पहल केवल e-waste disposal तक सीमित नहीं रही, बल्कि waste material के innovative reuse का उदाहरण भी बनी। DARPG के सचिव ने इन प्रयासों की सराहना की। विभाग ने इन गतिविधियों को Waste to Wealth category के तहत best practices के रूप में शामिल किया। कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ते mechanization और digital technology के दौर में पुराने electronic equipment का उचित disposal एक महत्वपूर्ण environmental concern बनता जा रहा है। ऐसे में e-waste को उपयोगी models में बदलने की पहल awareness और resource management दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। किसानों के लिए मजबूत grievance redressal system कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए multi-platform grievance redressal system विकसित किया है। CPGRAMS के अलावा Krishi Rakshak Portal किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक one-stop platform उपलब्ध कराता है। फसल बीमा से संबंधित शिकायतों के तेजी से समाधान से किसानों को insurance claims और योजना से जुड़े मामलों में सहायता मिल सकती है। Digital grievance platforms के माध्यम से शिकायतों की monitoring और tracking को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। Social Media पर भी बढ़ी विभाग की सक्रियता Special Campaign 5.0 के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और उसके संबद्ध, अधीनस्थ तथा क्षेत्रीय कार्यालयों ने विभिन्न social media platforms का भी इस्तेमाल किया। अभियान के दौरान विभाग की ओर से छह PIB notes और 274 से अधिक tweets पोस्ट किए गए। Twitter, LinkedIn, Instagram और Facebook जैसे platforms के माध्यम से अभियान से जुड़ी गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई। आज के digital communication environment में social media सरकारी योजनाओं, campaigns और public initiatives की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। 1,133 स्थानों पर चला स्वच्छता अभियान Special Campaign 5.0 के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने निर्धारित targets में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। विभाग के अनुसार कुल 1,133 cleanliness campaign sites का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और सभी 1,133 स्थानों पर अभियान पूरा किया गया। इस तरह इस category में लक्ष्य की 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। अभियान के दौरान सांसदों से संबंधित लंबित references को भी निपटाने का प्रयास किया गया। कुल 32 references के लक्ष्य के मुकाबले 31 references का निपटारा किया गया। 17.73 लाख से अधिक लंबित सार्वजनिक शिकायतों का निपटारा Public grievance disposal Special Campaign 5.0 का एक प्रमुख component रहा। विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1,77,336 लंबित सार्वजनिक शिकायतों का target था और इतनी ही संख्या में शिकायतों के निपटारे की उपलब्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि अभियान में administrative efficiency और citizen-centric governance को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। किसानों और आम नागरिकों से जुड़ी शिकायतों के timely disposal से सरकारी योजनाओं की delivery और लोगों के भरोसे को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। 31,722 physical files की हुई समीक्षा Special Campaign 5.0 में record management पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विभाग ने 31,722 physical files की समीक्षा का target निर्धारित किया था और इतनी ही files की review process पूरी की गई। इसके अतिरिक्त 10,597 physical files को छांटकर अलग किया गया। इससे सरकारी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और अनावश्यक documents को अलग करने में मदद मिली। Record management के बेहतर होने से कार्यालयों में दस्तावेजों की accessibility बढ़ती है और पुराने एवं अनावश्यक records के कारण होने वाली storage समस्या को भी कम किया जा सकता है। 18,042 वर्ग फुट जगह हुई खाली अभियान के दौरान record management और अन्य administrative activities के परिणामस्वरूप 18,042 square feet space खाली किया गया। सरकारी कार्यालयों में लंबे समय से रखी अनुपयोगी files और अन्य सामग्री को व्यवस्थित करने से उपलब्ध office space का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही workplace cleanliness और operational efficiency को भी बढ़ावा मिलता है। 40.38 लाख रुपये का revenue generation Special Campaign 5.0 के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 40,38,150 रुपये का revenue भी प्राप्त किया। इस तरह अभियान केवल cleanliness और record management तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी संसाधनों के बेहतर utilization और अनावश्यक सामग्री के प्रबंधन से revenue generation का अवसर भी सामने आया। Special Campaign 6.0 में आगे बढ़ेगा अभियान अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक Special Campaign 6.0 के तहत इन प्रयासों को आगे बढ़ाएगा। अभियान में institutional cleanliness, pending matters के disposal, citizen experience को बेहतर बनाने और सरकारी कार्यालयों से निकलने वाले e-waste के वैज्ञानिक तरीके से collection, segregation और disposal पर जोर रहेगा। पिछले अभियान के अनुभवों के आधार पर Special Campaign 6.0 में सरकारी कार्यालयों की cleanliness के साथ-साथ digital governance, grievance redressal, record management, e-waste management और citizen-centric administration को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के लिए यह अभियान केवल कार्यालयों की सफाई तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और citizen-friendly बनाना है, ताकि किसानों और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का बेहतर अनुभव मिल सके

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