खेती में अच्छी पैदावार के लिए किसान बीज, खाद, सिंचाई और कीटनाशकों पर विशेष ध्यान देते हैं। लेकिन इन सभी चीजों की बुनियाद खेत की मिट्टी है। अगर मिट्टी की स्थिति अच्छी नहीं है या उसमें जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो अच्छे बीज और पर्याप्त सिंचाई के बावजूद फसल से अपेक्षित उत्पादन मिलना मुश्किल हो सकता है।
यही कारण है कि खेत की मिट्टी की जांच (Soil Testing for Agriculture) आधुनिक खेती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मिट्टी की जांच से किसान को यह समझने में मदद मिलती है कि उसके खेत की मिट्टी में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, किनकी कमी है और किन तत्वों की मात्रा जरूरत से अधिक हो सकती है।
मिट्टी परीक्षण के आधार पर किसान खाद और उर्वरकों का अधिक संतुलित उपयोग कर सकता है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और बेहतर फसल उत्पादन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि खेत की मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है, Soil Testing क्या है, इसके क्या फायदे हैं, मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाता है और Soil Test Report का खेती में सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
मिट्टी की जांच क्या है
मिट्टी की जांच या Soil Testing एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें खेत से मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना लेकर प्रयोगशाला में उसके विभिन्न गुणों का परीक्षण किया जाता है।इस परीक्षण से मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता, लवणता, जैविक कार्बन और विभिन्न पोषक तत्वों की उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है। परीक्षण का दायरा प्रयोगशाला और आवश्यकताओं के अनुसार अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर Soil Test में मिट्टी के इन पहलुओं का आकलन किया जा सकता है:
- Soil pH
- Electrical Conductivity (EC)
- Organic Carbon
- Available Nitrogen (N)
- Available Phosphorus (P)
- Available Potassium (K)
- Sulphur (S)
- Zinc (Zn)
- Iron (Fe)
- Manganese (Mn)
- Copper (Cu)
- Boron (B)
इन परिणामों के आधार पर किसान अपने खेत के लिए पोषक तत्व प्रबंधन की बेहतर योजना बना सकता है।
खेत की मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?
Importance of Soil Testing in Agriculture को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि प्रत्येक खेत की मिट्टी एक जैसी नहीं होती। यहां तक कि एक ही गांव या आसपास के खेतों की मिट्टी में भी पोषक तत्वों, pH, जैविक कार्बन और अन्य गुणों में अंतर हो सकता है।
अगर किसान बिना मिट्टी परीक्षण के केवल पुराने अनुभव या सामान्य सलाह के आधार पर खाद डालता है, तो संभव है कि फसल को किसी पोषक तत्व की आवश्यकता कम हो लेकिन उसकी मात्रा अधिक डाल दी जाए। दूसरी तरफ जिस तत्व की वास्तव में कमी हो, उसकी पूर्ति पर्याप्त मात्रा में न हो पाए।इसलिए फसल बोने से पहले मिट्टी की जांच क्यों करें का सीधा जवाब है कि इससे किसान अपने खेत की वास्तविक पोषण स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है।मिट्टी परीक्षण खेती में अनुमान के स्थान पर वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
1. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का पता चलता है
फसल की वृद्धि के लिए कई प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं। इनके अलावा सल्फर तथा जिंक, आयरन, बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मिट्टी में किसी पोषक तत्व की उपलब्धता कम होने पर फसल की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। हालांकि केवल पौधे को देखकर हर बार यह निर्धारित करना आसान नहीं होता कि समस्या किस पोषक तत्व से जुड़ी है।Soil Health Testing किसान को मिट्टी की पोषक स्थिति समझने में मदद करता है। इससे पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।
2. उर्वरकों के संतुलित उपयोग में मदद
खेती में उर्वरक महत्वपूर्ण खर्चों में से एक हो सकते हैं। इसलिए उनका सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है।अगर किसान मिट्टी की स्थिति जाने बिना उर्वरक डालता है, तो कुछ पोषक तत्व आवश्यकता से अधिक और कुछ आवश्यकता से कम पड़ सकते हैं।
Soil Testing Benefits for Farmers में एक प्रमुख लाभ यह है कि Soil Test Report के आधार पर उर्वरकों की जरूरत का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।उदाहरण के लिए, यदि मिट्टी में उपलब्ध फास्फोरस पर्याप्त स्तर पर है, तो फसल, स्थानीय सिफारिश और परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार फास्फोरस उर्वरक की मात्रा समायोजित की जा सकती है।इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
3. खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद
आज खेती में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और मशीनरी सहित कई तरह के खर्च होते हैं। ऐसे में इनपुट का कुशल उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।मिट्टी की जांच पर किया गया खर्च किसान को उर्वरकों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में मदद कर सकता है।जब किसान को यह पता हो कि उसके खेत में कौन से पोषक तत्व कम या पर्याप्त हैं, तो वह जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक का चयन कर सकता है।इस प्रकार Agriculture Soil Testing खेती की लागत के बेहतर प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकता है।
4. मिट्टी का pH जानने में मदद
Soil pH मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता को दर्शाता है। इसका प्रभाव पौधों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता पर पड़ता है।अलग-अलग फसलों की उपयुक्त pH सीमा अलग हो सकती है। बहुत अधिक अम्लीय या क्षारीय परिस्थितियों में कुछ पोषक तत्व पौधों के लिए कम उपलब्ध हो सकते हैं।Soil Test के माध्यम से किसान अपने खेत का pH जान सकता है। यदि pH में सुधार की जरूरत हो, तो स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या Soil Test Report की सिफारिश के अनुसार उचित प्रबंधन किया जा सकता है।
5. मिट्टी की उर्वरता को समझने में मदद
Soil Fertility का अर्थ केवल मिट्टी में खाद डालना नहीं है। इसका संबंध मिट्टी की उस क्षमता से है जिसके जरिए वह पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करा सके।लगातार खेती और असंतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है।
नियमित मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) से समय के साथ मिट्टी की स्थिति में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है। इससे किसान दीर्घकालीन Soil Fertility Management की बेहतर योजना बना सकता है।
6. फसल के अनुसार खाद प्रबंधन में सहायता
हर फसल की पोषण आवश्यकता एक जैसी नहीं होती। गेहूं, धान, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जियों और बागवानी फसलों की पोषक आवश्यकताओं में अंतर होता है।इसी वजह से एक ही खाद योजना को हर फसल पर लागू करना उचित नहीं है।Soil Test for Farming से खेत की मौजूदा पोषण स्थिति पता चलती है। इसके बाद प्रस्तावित फसल की आवश्यकता को ध्यान में रखकर खाद और उर्वरक प्रबंधन किया जा सकता है।इस तरह मिट्टी परीक्षण फसल आधारित पोषण प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक बनाने में मदद करता है।
7. बेहतर उत्पादन की योजना बनाने में सहायक
किसान अक्सर जानना चाहते हैं कि how soil testing improves crop yield यानी मिट्टी परीक्षण से उत्पादन बढ़ाने में कैसे मदद मिल सकती है।मिट्टी परीक्षण अपने आप फसल उत्पादन नहीं बढ़ाता। इसका वास्तविक लाभ तब मिलता है जब जांच के परिणामों के आधार पर सही पोषक तत्व प्रबंधन किया जाए।सही Soil Testing और उसके आधार पर संतुलित पोषण प्रबंधन से पौधों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे फसल की वृद्धि और संभावित उत्पादकता के लिए बेहतर परिस्थितियां तैयार की जा सकती हैं।हालांकि अंतिम उत्पादन मौसम, बीज की किस्म, सिंचाई, रोग-कीट प्रबंधन और अन्य कृषि कारकों पर भी निर्भर करता है।
8. जैविक कार्बन की स्थिति जानने में मदद
मिट्टी का Organic Carbon Soil Health का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना, पोषक तत्व चक्र और जल प्रबंधन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।Soil Test Report में उपलब्ध होने पर Organic Carbon की स्थिति देखकर किसान यह समझ सकता है कि मिट्टी में जैविक पदार्थ प्रबंधन पर कितना ध्यान देने की आवश्यकता है।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद, कम्पोस्ट, फसल अवशेष प्रबंधन, हरी खाद जैसी विधियों का उपयोग मिट्टी में जैविक पदार्थ प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।
9. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पहचानने में मदद
NPK के अलावा फसलों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है। जिंक, आयरन, मैंगनीज, कॉपर और बोरॉन जैसे तत्व कम मात्रा में जरूरी होते हैं, लेकिन इनकी कमी पौधों के विकास को प्रभावित कर सकती है।
कई बार किसान सामान्य NPK उर्वरक तो लगातार इस्तेमाल करता रहता है, लेकिन Micronutrients पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता।
ऐसे में Soil Health Testing for Agriculture के माध्यम से परीक्षण किए गए सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति पता लगाई जा सकती है।
इसके बाद रिपोर्ट और फसल की जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
10. मिट्टी और पर्यावरण के बेहतर प्रबंधन में मदद
जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालना केवल आर्थिक नुकसान का कारण नहीं बन सकता, बल्कि पोषक तत्वों के नुकसान और आसपास के पर्यावरण पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याओं से भी जुड़ सकता है।Importance of Soil Testing in Agriculture इसलिए भी है क्योंकि यह जरूरत के आधार पर पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देता है।संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से खेती को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।
मिट्टी की जांच कैसे करें? How to Test Soil for Farming
सही Soil Test Report के लिए खेत से सही तरीके से नमूना लेना बहुत महत्वपूर्ण है। गलत या गैर-प्रतिनिधि नमूना जांच के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।सबसे पहले खेत को समान विशेषताओं वाले हिस्सों में बांटना चाहिए। यदि खेत के किसी हिस्से की मिट्टी, ढाल, फसल इतिहास या प्रबंधन बाकी हिस्से से काफी अलग है, तो उसका नमूना अलग लिया जा सकता है।
नमूना लेने के लिए साफ औजार का इस्तेमाल करें। खेत में अलग-अलग स्थानों से निर्धारित गहराई तक मिट्टी लेकर एक साफ बर्तन में मिलाएं। फसल और जांच के उद्देश्य के अनुसार नमूना लेने की गहराई अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय कृषि विभाग या प्रयोगशाला के निर्देशों का पालन करना बेहतर है।
मिश्रित मिट्टी से आवश्यक मात्रा में प्रतिनिधि नमूना लेकर साफ थैली में रखा जाता है।नमूने के साथ किसान का नाम, खेत की पहचान, गांव, पिछली फसल, प्रस्तावित फसल और नमूना लेने की तारीख जैसी जरूरी जानकारी लिखना उपयोगी रहता है।
मिट्टी का नमूना लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
How to Test Soil for Farming में नमूना लेने का तरीका बहुत महत्वपूर्ण है। सामान्यतः ऐसे स्थानों से नमूना लेने से बचना चाहिए जो पूरे खेत का सही प्रतिनिधित्व नहीं करते।खाद या गोबर के ढेर के ठीक पास, खेत की मेड़, जलभराव वाले छोटे हिस्से, सिंचाई चैनल के बिल्कुल पास या ऐसे असामान्य स्थानों की मिट्टी सामान्य नमूने में मिलाने से रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।अगर खेत में स्पष्ट रूप से अलग-अलग प्रकार की मिट्टी या प्रबंधन क्षेत्र मौजूद हैं, तो उन्हें अलग-अलग Sampling Unit मानकर नमूना लेना अधिक उपयोगी हो सकता है।नमूना लेने से पहले संबंधित Soil Testing Laboratory के निर्देश भी जरूर देख लेने चाहिए।
Soil Test Report में क्या-क्या जानकारी मिलती है?
एक सामान्य Soil Test Report में जांच के प्रकार के अनुसार कई महत्वपूर्ण परिणाम दिए जा सकते हैं।इनमें Soil pH, EC, Organic Carbon, उपलब्ध NPK और चुने गए Secondary या Micronutrients की स्थिति शामिल हो सकती है।कई रिपोर्टों में परिणामों को Low, Medium या High जैसी श्रेणियों में बताया जाता है। कुछ रिपोर्टें संबंधित फसल के लिए पोषक तत्व या उर्वरक संबंधी सिफारिश भी प्रदान कर सकती हैं।
रिपोर्ट को केवल संख्याओं के रूप में देखने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की मदद से समझना अधिक उपयोगी हो सकता है, खासकर जब मिट्टी में pH, salinity या किसी पोषक तत्व से संबंधित समस्या सामने आए।
Soil Health Card क्या है?
भारत में किसानों को मिट्टी की पोषण स्थिति समझने और संतुलित उर्वरक उपयोग में सहायता देने के लिए Soil Health Card जैसी सरकारी पहलें भी चलाई गई हैं।Soil Health Card में परीक्षण किए गए मिट्टी के मापदंडों और पोषक तत्वों की स्थिति से जुड़ी जानकारी दी जाती है। इसके आधार पर किसान को पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
किसानों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध वर्तमान Soil Testing और Soil Health Card सेवाओं की जानकारी स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या संबंधित सरकारी माध्यम से लेनी चाहिए।
मिट्टी की जांच कब करवानी चाहिए?
Soil Testing का समय खेती की योजना और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय किया जा सकता है। आम तौर पर फसल की बुवाई से पर्याप्त समय पहले मिट्टी की जांच करवाना उपयोगी होता है, ताकि रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बनाई जा सके।नमूना लेते समय हाल में डाले गए उर्वरक या अन्य सामग्री से प्रभावित स्थानों से बचना चाहिए।
मिट्टी की जांच कितनी बार करानी चाहिए, इसका कोई एक नियम हर खेत के लिए समान रूप से लागू नहीं होता। फसल प्रणाली, मिट्टी के प्रकार, सिंचाई, प्रबंधन और स्थानीय कृषि सिफारिशों के अनुसार इसकी आवृत्ति तय की जा सकती है।
मिट्टी की जांच कहां कराएं?
किसान अपने क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी या मान्यता प्राप्त Soil Testing Laboratory की सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।इसके अलावा कई स्थानों पर कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय और अन्य अधिकृत संस्थानों के माध्यम से मिट्टी परीक्षण की सुविधा या मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकता है।नमूना भेजने से पहले यह पता कर लेना चाहिए कि प्रयोगशाला किन मापदंडों की जांच करती है, नमूने की कितनी मात्रा चाहिए और नमूना लेने की निर्धारित प्रक्रिया क्या है।
मिट्टी परीक्षण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन
Soil Testing for Better Crop Production का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य Soil Test Report को खेत में व्यावहारिक निर्णयों से जोड़ना है।रिपोर्ट मिलने के बाद किसान को अपनी प्रस्तावित फसल, मिट्टी की स्थिति, उपलब्ध जैविक स्रोतों और स्थानीय कृषि सिफारिशों के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए।इसमें केवल रासायनिक उर्वरक ही नहीं, बल्कि उपयुक्त परिस्थितियों में जैविक खाद, फसल अवशेष और अन्य पोषक स्रोतों का समन्वित उपयोग भी शामिल हो सकता है।इसे Integrated Nutrient Management के व्यापक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।
मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए क्या करें?
मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनाए रखने के लिए केवल एक बार Soil Testing कराना पर्याप्त नहीं है। जांच के परिणामों को उचित खेती के तरीकों के साथ जोड़ना जरूरी है।फसल चक्र अपनाना, दलहनी फसलों को उपयुक्त Crop Rotation में शामिल करना, उपलब्ध जैविक पदार्थों का सही प्रबंधन करना, मिट्टी को अनावश्यक कटाव से बचाना और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना Soil Health Management के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।सिंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में मिट्टी की जांच के साथ Irrigation Water Testing की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
Soil Testing से जुड़ी आम गलतियां
कई बार किसान Soil Test तो करवाते हैं, लेकिन उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसका एक कारण गलत Sampling हो सकता है।पूरे बड़े खेत से केवल एक ही स्थान की मिट्टी लेना प्रतिनिधि नमूना नहीं माना जा सकता। इसी तरह असामान्य स्थान से नमूना लेना, नमूनों की पहचान सही तरीके से न करना या रिपोर्ट की सिफारिशों को समझे बिना उर्वरक डालना भी समस्या पैदा कर सकता है।
एक और गलती Soil Test Report को कई वर्षों तक बिना दोबारा परीक्षण के उसी रूप में लागू करते रहना है। मिट्टी की पोषण स्थिति समय के साथ बदल सकती है।इसलिए Soil Testing Benefits तभी बेहतर तरीके से मिलते हैं जब Sampling, Testing और Recommendation तीनों को सही तरीके से जोड़ा जाए।
क्या मिट्टी की जांच से खाद का खर्च कम हो सकता है?
कई परिस्थितियों में मिट्टी परीक्षण किसान को अनावश्यक उर्वरक उपयोग पहचानने में मदद कर सकता है। अगर किसी पोषक तत्व की उपलब्धता पहले से पर्याप्त है, तो स्थानीय सिफारिशों और फसल की जरूरत के आधार पर उसकी मात्रा समायोजित की जा सकती है।दूसरी ओर, यदि किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी है, तो उसे समय रहते प्रबंधन योजना में शामिल किया जा सकता है।इसलिए Soil Testing को केवल अतिरिक्त खर्च के रूप में देखने के बजाय Nutrient Management Planning के साधन के रूप में देखना बेहतर है।
आधुनिक खेती में Soil Testing का महत्व
आधुनिक खेती में संसाधनों का कुशल उपयोग तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। किसान को कम लागत में स्थिर और बेहतर उत्पादन के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना पड़ता है।ऐसे में Agriculture Soil Testing वैज्ञानिक खेती का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
Precision Farming और Site-Specific Nutrient Management जैसी आधुनिक कृषि अवधारणाओं में भी मिट्टी और फसल से संबंधित आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने पर जोर दिया जाता है।मिट्टी परीक्षण किसान को खेत की वास्तविक स्थिति समझने के लिए उपयोगी डेटा देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. खेत की मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?
खेत की मिट्टी की जांच से मिट्टी की pH, जैविक कार्बन और जांच किए गए पोषक तत्वों की स्थिति समझने में मदद मिलती है। इसके आधार पर किसान संतुलित पोषण प्रबंधन की बेहतर योजना बना सकता है।
2. Soil Testing क्या है?
Soil Testing वह प्रक्रिया है जिसमें खेत की मिट्टी के नमूने का प्रयोगशाला में परीक्षण करके उसके विभिन्न रासायनिक और पोषण संबंधी गुणों की जानकारी प्राप्त की जाती है।
3. मिट्टी की जांच से क्या फायदा होता है?
Soil Testing Benefits में पोषक तत्वों की स्थिति जानना, उर्वरकों का बेहतर उपयोग, Soil pH समझना, खेती की लागत के प्रबंधन में सहायता और दीर्घकालीन Soil Health Management शामिल हैं।
4. मिट्टी की जांच कब करवानी चाहिए?
आमतौर पर बुवाई से पर्याप्त समय पहले जांच करवाना उपयोगी होता है। सही समय फसल, क्षेत्र और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।
5. Soil Test Report मिलने के बाद क्या करें?
रिपोर्ट में दिए गए परिणामों और सिफारिशों को प्रस्तावित फसल के संदर्भ में समझें। आवश्यकता होने पर कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र या योग्य कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर उर्वरक योजना बनाएं।
6. क्या हर फसल के लिए एक ही उर्वरक मात्रा सही होती है?
नहीं। अलग-अलग फसलों की पोषण आवश्यकता अलग होती है। मिट्टी की मौजूदा पोषण स्थिति भी खेत के अनुसार बदल सकती है। इसलिए Soil Test और Crop Requirement दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।
खेत की मिट्टी की जांच (Soil Testing for Agriculture) वैज्ञानिक और संतुलित खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिट्टी परीक्षण किसान को यह समझने में मदद करता है कि उसके खेत की मिट्टी की मौजूदा स्थिति क्या है, किन पोषक तत्वों पर ध्यान देने की जरूरत है और खाद तथा उर्वरकों का प्रबंधन किस तरह किया जा सकता है।सही तरीके से किया गया Soil Health Testing पोषक तत्व प्रबंधन, खेती की लागत, मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन से जुड़े निर्णयों को बेहतर बनाने में सहायता कर सकता है।
अच्छी खेती की शुरुआत केवल अच्छे बीज से नहीं होती। इसकी शुरुआत उस मिट्टी को समझने से होती है जिसमें वह बीज बोया जाना है। इसलिए किसान के लिए समय-समय पर उचित तरीके से मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) करवाना और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से पोषण प्रबंधन करना उपयोगी कदम हो सकता है।

