बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव ने अपनी फिल्म ‘बहन होगी तेरी’ से जुड़े एक पुराने विवाद में जालंधर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया है। इस मामले में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज है। कोर्ट में सरेंडर के बाद उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन अब उन्होंने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामला 2017 में फिल्म के प्रचार के दौरान जारी एक पोस्टर से जुड़ा है, जिसमें राजकुमार राव भगवान शिव के रूप में बाइक पर नजर आए थे। इस पर आपत्ति जताते हुए जालंधर में उनके खिलाफ धारा 295ए, 120बी और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया था।
राजकुमार राव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हुए थे, जिसके बाद उन्होंने जालंधर की अदालत में सरेंडर किया।
“जानबूझकर धार्मिक भावना भड़काने की मंशा नहीं थी”
राजकुमार राव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि धारा 295ए में कार्रवाई के लिए दुर्भावनापूर्ण मंशा का प्रमाण जरूरी है, जो इस केस में नहीं है। वकीलों ने दलील दी कि अभिनेता ने केवल एक फिल्मी किरदार निभाया था, जो एक जागरण मंडली में भगवान शिव की भूमिका अदा करता है।
CBFC से मंजूरी और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि फिल्म को सेंसर बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिली थी और उसकी सामग्री कानूनी रूप से वैध है। इसके अलावा, अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिनेता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी सुरक्षित है।
हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एनएस शेखावत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जालंधर पुलिस आयुक्त से जांच की स्थिति रिपोर्ट शपथपत्र के माध्यम से मांगी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश की जाए।अब अगली सुनवाई 8 अगस्त 2025 को होगी।

