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Home कृषि समाचार

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी को मारुति सुजुकी से ₹2.52 करोड़ की रिसर्च परियोजना मिली

Fiza by Fiza
August 7, 2025
in कृषि समाचार
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पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी को मारुति सुजुकी से ₹2.52 करोड़ की रिसर्च परियोजना मिली
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना को मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) योजना के तहत ₹2.52 करोड़ की एक महत्त्वपूर्ण अनुसंधान-सह-प्रसार परियोजना मिली है। यह परियोजना सतत कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स से उत्पन्न फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) के वैज्ञानिक परीक्षण व प्रचार-प्रसार के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों और पर्यावरण हितैषी फसल पोषण के बीच की खाई को पाटना है।

हालांकि FOM पोषक तत्वों और सूक्ष्मजीवों से भरपूर होता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता को लेकर अभी और वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है, खासकर मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादकता पर इसके प्रभाव को लेकर। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना डॉ. अमनदीप सिंह सिद्धू (वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) के नेतृत्व में चलाई जाएगी।

इस परियोजना में कई विषयों के विशेषज्ञों की टीम कार्यरत होगी, जिनमें शामिल हैं:

  • डॉ. एसएस वालिया, प्रिंसिपल एग्रोनॉमिस्ट एवं निदेशक, स्कूल ऑफ ऑर्गेनिक फार्मिंग
  • डॉ. गुलाब पंडोव, माइक्रोबायोलॉजिस्ट
  • डॉ. वजिंदर पाल कालरा, एग्रोनॉमिस्ट
  • डॉ. अजय कुमार चौधरी, प्लांट पैथोलॉजिस्ट
  • डॉ. ओपिंदर सिंह संधू, सॉयल साइंटिस्ट

परियोजना का शीर्षक है — “कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों से प्राप्त फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) का सतत फसल उत्पादन हेतु उपयोग: अनुसंधान एवं जागरूकता रणनीति”।

इस अनुसंधान के अंतर्गत विभिन्न CBG प्लांट्स से प्राप्त FOM की विश्लेषणात्मक जांच, कृषि फसलों पर इसके उपयोग का प्रभाव, और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार को लेकर अध्ययन किया जाएगा। साथ ही, कम इनपुट परिस्थितियों में FOM की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु इसके एनरिचमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह परियोजना हमारी उस सोच के साथ मेल खाती है जो मिट्टी की उर्वरता की पुनर्स्थापना, संसाधनों का पुनर्चक्रण, और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देती है। यह PAU की समग्र और बहुविषयी दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।”

अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह धत्त और रजिस्ट्रार डॉ. ऋषि पाल सिंह ने भी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जैविक पोषण प्रबंधन में नवाचार को आगे बढ़ाएगी। इससे न केवल रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता घटेगी, बल्कि पराली जलाने की समस्या से भी निपटने में मदद मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि CBG प्लांट्स की आर्थिक व्यवहार्यता इस बात पर निर्भर करती है कि उनके उप-उत्पाद FOM का उपयुक्त उपयोग और विपणन कितना सफल होता है। इसलिए यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से, बल्कि कृषि व्यवसायिक दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक और समयानुकूल है।

यह परियोजना पंजाब के किसानों को जैविक और पर्यावरण-सम्मत खेती की दिशा में प्रेरित करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

 

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