केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) द्वारा देशभर में पशुपालन, डेयरी विकास और किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पशुपालकों, डेयरी किसानों, सहकारी समितियों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक तकनीकों, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध स्वच्छता, कृत्रिम गर्भाधान, विपणन तथा प्रबंधन से जोड़ना है।
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार और क्षमता निर्माण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत सेमिनार, प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, पशुधन मेले, उर्वरता शिविर, दुग्ध स्वच्छता प्रशिक्षण, डेयरी प्रबंधन कार्यक्रम और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत किसानों में जागरूकता बढ़ाने के लिए उर्वरता शिविर, दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिताएं, बछड़ा रैलियां और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मल्टी-पर्पज आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन टेक्नीशियन यानी मैत्रियों को प्रशिक्षित कर किसानों के घर तक कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत डेयरी किसानों को स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, गुणवत्ता प्रबंधन, दुग्ध संग्रहण, शीतकरण, विपणन और सहकारी संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के घटक-ए के तहत 7,44,655 किसानों को प्रशिक्षण कवरेज मिला, जबकि घटक-बी के अंतर्गत 10,13,131 किसानों तक पहुंच बनाई गई। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 1,32,829 लाभार्थियों को शामिल किया गया, जबकि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से 5,74,20,400 किसानों को जोड़ा गया। यह दर्शाता है कि सरकार पशुधन और डेयरी क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के साथ-साथ मानव संसाधन विकास पर भी जोर दे रही है।
आंध्र प्रदेश इस अभियान का प्रमुख लाभार्थी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के घटक-ए के तहत 3,58,361 और घटक-बी के तहत 4,54,645 किसानों को प्रशिक्षण से जोड़ा गया। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत 42,540 लाभार्थी शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 34,63,229 किसानों को लाभ मिला। इसके अलावा पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 340 मोबाइल वेटरनरी यूनिट स्वीकृत की गईं, जिनसे 27.32 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए और 28.52 लाख पशुओं का उपचार किया गया।
आंध्र प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत 76.52 लाख पशुओं का गर्भाधान किया गया और कुल 1.49 करोड़ से अधिक कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की गईं। इससे 34.63 लाख किसानों को लाभ पहुंचा। राज्य में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रयोगशालाओं के माध्यम से 1,915 व्यवहार्य भ्रूण तैयार किए गए, 1,085 भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए और 64 बछड़ों का जन्म हुआ।
दूध उत्पादन के मोर्चे पर भी आंध्र प्रदेश में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2014-15 में राज्य का दूध उत्पादन 9,653.41 हजार टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 13,942.26 हजार टन पहुंच गया। इसी अवधि में औसत दूध उत्पादन 5.77 किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 8.07 किलोग्राम प्रतिदिन हो गया। यह क्रमशः 44.4 प्रतिशत और 39.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के उपयोग की निगरानी के लिए समुचित व्यवस्था बनाई गई है। योजना दिशानिर्देशों के अनुसार परियोजनाओं की स्वीकृति और समीक्षा की जाती है। साथ ही राज्यों के साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं तथा राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्र मॉनिटर भी जमीनी स्तर पर प्रगति की जांच करते हैं। सरकार का कहना है कि इससे धन का समय पर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है तथा योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होता है।

