देश में कृषि क्षेत्र को नई गति देने और पिछड़े जिलों में खेती को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (DDKY) के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के अंतर्गत देश के 100 जिलों की पहचान की गई है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता घटिया है और किसानों को पर्याप्त कृषि ऋण नहीं मिल पा रहा है।
Pradhan Mantri Dhan Dhanya Krishi Yojana का उद्देश्य इन चुनिंदा जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और टिकाऊ खेती को अपनाना है। इसके साथ ही योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं, भंडारण व्यवस्था और आसान ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत हर जिले के लिए एक जिला कृषि कार्य योजना (DAP) तैयार की जा रही है, जिसे ‘जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति’ द्वारा लागू किया जाएगा। यह समिति जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कार्य करती है और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करती है।
इन योजनाओं की खास बात यह है कि इसमें 11 विभागों की 36 से अधिक केंद्रीय और राज्य योजनाओं को एक साथ जोड़कर समन्वित तरीके से लागू किया जा रहा है। इसमें Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY) और Mission for Integrated Development of Horticulture जैसी प्रमुख योजनाएं भी शामिल हैं।
योजना के अंतर्गत जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को भी प्राथमिकता दी गई है। इसमें सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन), संरक्षित खेती (Protected Farming), और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे जैसे कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और नुकसान कम होगा।
इसके अलावा, योजना के तहत किसानों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है। इससे किसानों को खेती के लिए समय पर पूंजी मिल सकेगी और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सक्षम होंगे।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर ‘राज्य धन-धान्य कृषि योजना समिति’ और राष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्ट्रीय कार्यकारी एवं निगरानी समिति’ बनाई गई है, जो योजना की प्रगति की लगातार समीक्षा करेंगी।
इसके साथ ही, प्रत्येक जिले के लिए केंद्रीय नोडल अधिकारी (CNO) नियुक्त किए गए हैं, जो समय-समय पर जिलों का दौरा कर योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेंगे और सुधार के सुझाव देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान पर केंद्रित है, जिससे वास्तविक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। यह पहल न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना देश के उन क्षेत्रों में नई उम्मीद लेकर आई है, जहां खेती अब तक पिछड़ी रही है। समन्वित प्रयास, आधुनिक तकनीकों और बेहतर संसाधनों के जरिए यह योजना भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

