नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यसभा में शुक्रवार को शुष्क खेती, जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों और श्री अन्न (मिलेट्स) को लेकर सरकार की रणनीति का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और जल संरक्षण उपायों के चलते देश के किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है।
मंत्री ने बताया कि हैदराबाद स्थित ICAR-CRIDA द्वारा किए गए एक प्रभाव आकलन में सामने आया है कि मौसम आधारित कृषि सलाह से किसानों की आय में औसतन 6,000 रुपये प्रति एकड़ तक की बढ़ोतरी हुई है। यह सलाह किसानों को सही समय पर बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग और फसल प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन देती है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है।
इसके अलावा जल संरक्षण पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि खेत-तालाब, चेक-डैम और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, एक खेत-तालाब से किसानों को औसतन 73,895 रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है। इससे न सिर्फ सिंचाई की सुविधा बढ़ी है, बल्कि फसल विविधीकरण और पशुपालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़ों पर बात करते हुए Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि हरित क्रांति के दौरान देश में उत्पादन में तेजी आई थी, लेकिन शुष्क और वर्षा-आधारित क्षेत्र पीछे रह गए थे। अब सरकार ने इन क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाया है, जो देश की कुल कृषि भूमि का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके परिणामस्वरूप 2021 में इन इलाकों में खाद्यान्न उत्पादन में 82 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, और राष्ट्रीय उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत तक पहुंच गई।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए मंत्री ने महाराष्ट्र के Marathwada क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि यहां के 23 जिलों में विशेष परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाना और उनकी आय को स्थिर बनाना है। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
सरकार द्वारा विकसित और चयनित की गई 808 जलवायु-अनुकूल और उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों का भी मंत्री ने जिक्र किया। इनमें अनाज, दलहन, तिलहन और अन्य फसलें शामिल हैं, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि श्री अन्न यानी मिलेट्स को बढ़ावा देने से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि मॉडल पर है, जिससे आने वाले वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

