देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई को लेकर ताजा आंकड़े सामने आए हैं, जिनके अनुसार 27 मार्च 2026 तक कुल बोया गया क्षेत्र 49.87 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 52.35 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.47 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि, कुछ फसलों में वृद्धि ने इस गिरावट को आंशिक रूप से संतुलित किया है।
आंकड़ों के अनुसार, चावल की बुवाई में इस वर्ष गिरावट देखी गई है। 2026 में अब तक 28.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में चावल की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 30.69 लाख हेक्टेयर थी। यानी चावल के क्षेत्र में 2.19 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। यह कुल गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, दालों की खेती में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। इस वर्ष 6.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दालों की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के 5.60 लाख हेक्टेयर से 0.46 लाख हेक्टेयर अधिक है। इसमें हरी मूंग की बुवाई 3.91 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल की तुलना में 0.25 लाख हेक्टेयर अधिक है। इसी तरह काला चना 1.90 लाख हेक्टेयर में बोया गया, जिसमें 0.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। अन्य दालों में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।
श्री अन्ना और मोटे अनाज की श्रेणी में कुल मिलाकर हल्की गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष 9.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इन फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 9.71 लाख हेक्टेयर थी। मक्का, जो इस श्रेणी का प्रमुख फसल है, उसके क्षेत्र में 0.54 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। हालांकि बाजरा और रागी जैसी फसलों में कुछ वृद्धि देखने को मिली है, जिससे कुल गिरावट सीमित रही।
तिलहनों की बुवाई में भी हल्की कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष 5.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहनों की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के 6.34 लाख हेक्टेयर से 0.37 लाख हेक्टेयर कम है। मूंगफली के क्षेत्र में 0.52 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जबकि सूरजमुखी और तिल की खेती में थोड़ी बढ़त दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति, जल उपलब्धता और बाजार परिस्थितियों का फसलों के चयन पर प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण कुछ फसलों में कमी और कुछ में वृद्धि देखी जा रही है। दालों में बढ़ती रुचि को सरकार की नीतियों और बेहतर बाजार मूल्य से भी जोड़ा जा रहा है।
कुल मिलाकर, ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में इस वर्ष हल्की गिरावट जरूर दर्ज हुई है, लेकिन दालों और कुछ अन्य फसलों में बढ़ोतरी से कृषि क्षेत्र में संतुलन बना हुआ है। आने वाले हफ्तों में बुवाई के आंकड़ों में और बदलाव संभव है, जो मौसम और किसानों के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
यह रुझान दर्शाता है कि किसान बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी फसल रणनीति में लचीलापन अपना रहे हैं, जो दीर्घकाल में कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।

