देश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में Department of Biotechnology की बायोटेक-किसान योजना एक अहम भूमिका निभा रही है। राज्यसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2017 से लागू इस योजना ने प्रयोगशाला और खेत के बीच की दूरी को कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
यह योजना ‘कृषि नवाचार विज्ञान अनुप्रयोग नेटवर्क’ के रूप में देशभर के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में संचालित की जा रही है। इसके तहत स्थापित केंद्र न केवल प्रशिक्षण और प्रदर्शन इकाइयों के रूप में काम कर रहे हैं, बल्कि उद्यम इनक्यूबेशन हब के रूप में भी किसानों को नई तकनीकों से जोड़ रहे हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से एक लाख से अधिक किसानों तक सीधी पहुंच बनाई गई है, जिससे फसल उत्पादकता में 15 से 37 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 से अधिक बायोटेक-किसान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। ये केंद्र शुष्क, अर्ध-शुष्क, पहाड़ी, तटीय, जनजातीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों जैसे विविध इलाकों में कार्यरत हैं, जहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि नवाचारों को लागू किया जा रहा है।
योजना के तहत किसानों को जैव उर्वरक, वर्मीकम्पोस्ट, एजोला, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और जैविक खेती जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, सटीक कृषि (Precision Farming), एकीकृत कीट प्रबंधन और सूक्ष्मजीव आधारित खेती को बढ़ावा दिया गया है, जिससे लागत कम होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।
विभिन्न राज्यों में इस योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। ओडिशा, असम और आंध्र प्रदेश में किसानों ने जैव उर्वरकों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की खपत में 25–30 प्रतिशत तक कमी की है। वहीं ओडिशा में मृदा कार्बनिक कार्बन में 20–25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता बेहतर हुई है। राजस्थान और आंध्र प्रदेश में दलहन फसलों की पैदावार में 20–35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तिकरण भी है। अब तक 5,000 से अधिक महिला किसानों को जैव उर्वरक, बीज उत्पादन, मशरूम खेती और पोषण उद्यान जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही, 1,200 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को मजबूत किया गया है, जिससे महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को बढ़ावा मिला है।
इसके अलावा, टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले, वायरस-मुक्त पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर रोपण सामग्री मिल रही है और फसल रोगों का खतरा कम हो रहा है। इस क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है, जहां लगभग 70 प्रतिशत कार्यबल महिला है।
कुल मिलाकर, ‘बायोटेक-किसान’ योजना देश में टिकाऊ और वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह पहल भविष्य की कृषि को अधिक उन्नत, समावेशी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।

