चाय उद्योग में तकनीकी बदलाव की एक बड़ी पहल के तहत चाय बोर्ड अपने पुराने ई-ऑक्शन सिस्टम को अब क्लाउड और वेब-आधारित नए प्लेटफॉर्म पर ले जाने जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य नीलामी प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, तेज और सुगम बनाना है। बोर्ड के अनुसार, इस नए सिस्टम के लागू होने से चाय व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कामकाज पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा।
इस नए प्लेटफॉर्म को विकसित करने और संचालित करने की जिम्मेदारी कोलकाता की ट्रेडफोर्ज टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है। कंपनी इसे BOO (बिल्ड-ओन-ऑपरेट) मॉडल के तहत तैयार करेगी, यानी वह खुद इस सिस्टम को बनाएगी, संचालित करेगी और उसका रखरखाव भी करेगी। ट्रेडफोर्ज का चयन एक टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है और अब यह कंपनी पहले से काम कर रही डेक्सिट ग्लोबल लिमिटेड (NSEIT) की जगह लेगी।
चाय बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नया सिस्टम उपयोग में आसान, अधिक सुरक्षित और लागत के लिहाज से किफायती होगा। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म का विकास कार्य जारी है और जल्द ही इसे परीक्षण के लिए चाय उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ साझा किया जाएगा। इससे उनके सुझावों को शामिल कर सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सकेगा। बोर्ड का कहना है कि तकनीक में बदलाव जरूर होगा, लेकिन नीलामी की प्रक्रिया और कार्यप्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर चाय उद्योग में बहस तेज हो गई है। कई व्यापारिक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। कोचीन टी ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज ने कहा कि मौजूदा ऐप-आधारित सिस्टम पहले से ही प्रभावी और भरोसेमंद तरीके से काम कर रहा है। ऐसे में नए वेब-आधारित सिस्टम पर जाना जोखिम भरा हो सकता है और इससे नीलामी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान ई-ऑक्शन पोर्टल को विक्रेताओं और खरीदारों दोनों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। खरीदार हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में इस सिस्टम का सहजता से उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, विक्रेता से खरीदार तक की बिलिंग प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चल रही है, जिससे किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं होती।
इस बीच, चाय बोर्ड ने सभी एसोसिएशनों से अनुरोध किया है कि वे अपने पंजीकृत सदस्यों का पूरा डेटा ट्रेडफोर्ज को उपलब्ध कराएं, ताकि पुराने सिस्टम से नए प्लेटफॉर्म में डेटा का स्थानांतरण बिना किसी बाधा के हो सके। यह प्रक्रिया सिस्टम के सफल क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर चाय बोर्ड इस बदलाव को डिजिटल प्रगति की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है, वहीं दूसरी ओर उद्योग के कुछ हिस्से इसे अनावश्यक जोखिम के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया प्लेटफॉर्म चाय नीलामी को कितना प्रभावी और सुगम बना पाता है।

