बदलते वैश्विक भूराजनीतिक परिदृश्य और कृषि क्षेत्र पर बढ़ते दबावों के बीच Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) ने एक उच्च स्तरीय विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का गठन किया है। इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को अधिक लचीला बनाना और राष्ट्रीय खाद्य एवं कृषि इनपुट सुरक्षा को मजबूत करना है।
डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक की अध्यक्षता में आयोजित पहली बैठक में इस कार्यबल ने एक व्यापक रणनीति का खाका प्रस्तुत किया। इसमें किसानों तक तकनीक और संसाधनों की पहुंच बढ़ाने, उत्पादन लागत को संतुलित करने और कृषि प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
‘मेरा गाँव मेरा गौरव’ अभियान को मिलेगा विस्तार
कार्यबल ने ‘मेरा गाँव मेरा गौरव’ (एमजीएमजी) अभियान को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसके तहत देश के 100 महत्वाकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मदद से किसानों तक नई तकनीक और बेहतर खेती पद्धतियाँ पहुंचाई जाएंगी। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर किसानों का विश्वास बढ़ाना और उत्पादन क्षमता में सुधार करना है।
मृदा स्वास्थ्य और उर्वरक उपयोग पर फोकस
आईसीएआर ने उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इसके तहत गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों में उर्वरक खपत का जिलावार आकलन किया जाएगा, ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके और मृदा स्वास्थ्य को भी संरक्षित रखा जा सके।
फसल विविधीकरण और क्षेत्रीय मानचित्रण
कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया गया है। कार्यबल ने बाजरा उत्पादक क्षेत्रों का विस्तृत मानचित्रण करने और कम उत्पादकता वाले धान क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। साथ ही पर्यावरण-अनुकूल मत्स्य पालन जैसे विकल्पों को भी खेती के साथ जोड़ने की योजना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
तकनीकी और यांत्रिक हस्तक्षेप को बढ़ावा
आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) जैसी पद्धतियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही मौसम आधारित सलाह देने के लिए उन्नत तकनीकों और परियोजनाओं का सहारा लिया जाएगा, जिससे किसानों को समय पर सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
सख्त निगरानी और डेटा आधारित निर्णय
कार्यबल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विषय-वस्तु प्रभाग में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो साप्ताहिक प्रगति की निगरानी करेंगे। यह कार्यबल जरूरत के अनुसार नियमित बैठकें करेगा और डेटा आधारित सुझाव सरकार को प्रदान करेगा।
कुल मिलाकर, आईसीएआर का यह कदम भारतीय कृषि को वैश्विक चुनौतियों के बीच अधिक सशक्त, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

