Ministry of Heavy Industries (भारी उद्योग मंत्रालय) द्वारा ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ निर्माण को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी योजना को उद्योग जगत से मजबूत समर्थन मिला है। इस योजना के तहत आयोजित बोली-पूर्व सम्मेलन में 25 से अधिक कंपनियों की भागीदारी ने इसके प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाया।
इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस सम्मेलन में मंत्रालय ने योजना की रूपरेखा, पात्रता शर्तों और बोली प्रक्रिया के सभी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए गए, जिससे प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया गया।
₹7,280 करोड़ की योजना, 6000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
मंत्रालय ने 20 मार्च 2026 को सीपीपी पोर्टल पर प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) जारी किया था। इसके तहत देश में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाले एकीकृत सिंटर्ड NdFeB (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
पारदर्शी दो-स्तरीय बोली प्रक्रिया
बोली प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। इसे न्यूनतम लागत प्रणाली (LCS) के तहत दो चरणों—तकनीकी और वित्तीय बोली—में आयोजित किया जाएगा। इच्छुक कंपनियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करनी होगी, जिसके आधार पर पात्रता तय की जाएगी।
सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 5 कंपनियों का चयन करेगी, जिनमें से प्रत्येक कंपनी 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक की क्षमता वाला संयंत्र स्थापित करेगी। इस तरह कुल उत्पादन क्षमता 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचेगी।
महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया
बोली से संबंधित दस्तावेज 20 मार्च 2026 से उपलब्ध हैं, जबकि प्रश्न भेजने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 तय की गई है। वहीं, बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई 2026 रखी गई है।
रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अहम
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स आधुनिक तकनीक के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है। यह योजना भारत में इन मैग्नेट्स के उत्पादन की पूरी वैल्यू-चेन—रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक—को विकसित करने में मदद करेगी।
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना देश में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर, भारी उद्योग मंत्रालय की यह पहल भारत को उन्नत तकनीकी विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम मानी जा रही है।

