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कश्मीर की बड़ी खोज: अब जंगल नहीं, खेतों में उगेगी ‘गुच्छी मशरूम’, किसानों की कमाई में आएगा बूम!

Fiza by Fiza
April 14, 2026
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कश्मीर की बड़ी खोज: अब जंगल नहीं, खेतों में उगेगी ‘गुच्छी मशरूम’, किसानों की कमाई में आएगा बूम!
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कश्मीर से एक बेहद सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है, जो देश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। यहां के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिससे अब तक सिर्फ जंगलों में मिलने वाली महंगी ‘गुच्छी मशरूम’ को खेतों और ग्रीनहाउस में उगाया जा सकेगा। यह खोज किसानों के लिए आय बढ़ाने का नया रास्ता खोल सकती है।

गुच्छी मशरूम, जिसे स्थानीय भाषा में “कानी गुच्छी” कहा जाता है, दुनिया की सबसे महंगी मशरूम किस्मों में गिनी जाती है। इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है और यह औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। बाजार में इसकी कीमत 35,000 से 40,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण यह आम किसानों की पहुंच से दूर थी।

इस बड़ी सफलता के पीछे श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST-K) के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत है। करीब पांच साल पहले प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी ने इस दिशा में काम शुरू किया। उनका मानना था कि जब चीन जैसे देश में इस मशरूम की खेती संभव है, तो कश्मीर में क्यों नहीं। इस सोच के साथ उन्होंने छोटे स्तर पर प्रयोग शुरू किए। बाद में पीएचडी छात्र कमरान मुनीर भी इस शोध से जुड़े और इसे आगे बढ़ाया।

लगातार प्रयासों और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद टीम को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने गुच्छी मशरूम को नियंत्रित वातावरण यानी ग्रीनहाउस में उगाने की तकनीक विकसित कर ली। इसके अलावा वैज्ञानिक विकास गुप्ता ने इसे खुले खेतों में उगाने का तरीका भी खोज निकाला। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले यह मशरूम केवल प्राकृतिक जंगलों में ही उगती थी और इसका उत्पादन पूरी तरह मौसम और बारिश पर निर्भर करता था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, गुच्छी मशरूम की कुल 10 किस्में होती हैं, जिनमें से अभी तक 3 किस्मों की सफल खेती की जा चुकी है। बाकी किस्मों पर शोध जारी है और आने वाले समय में उनमें भी सफलता मिलने की उम्मीद है। इस शोध से यह साबित हो गया है कि सही तकनीक और वातावरण के जरिए इस दुर्लभ मशरूम को बड़े पैमाने पर उगाया जा सकता है।

पहले गुच्छी मशरूम केवल वसंत ऋतु के अंत और गर्मियों की शुरुआत में, बारिश के बाद जंगलों में उगती थी। इसे ढूंढना काफी मुश्किल होता था, जिससे इसकी कीमत आसमान छूती थी। अब जब यह खेती के जरिए उपलब्ध होगी, तो न सिर्फ इसकी सप्लाई बढ़ेगी बल्कि किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज किसानों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। खासकर पहाड़ी और ठंडे इलाकों के किसान इस मशरूम की खेती कर अपनी आय में कई गुना इजाफा कर सकते हैं। साथ ही, भारत में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक नई दिशा भी मिलेगी।

कुल मिलाकर, कश्मीर के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह किसानों के लिए समृद्धि का नया रास्ता भी खोलती है। आने वाले समय में गुच्छी मशरूम की खेती देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

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