ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वादिष्ट परंपराओं का प्रतीक बन चुका छेना पोड़ा अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। नयागढ़ का यह प्रसिद्ध व्यंजन जल्द ही जीआई (Geographical Indication) टैग हासिल कर सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि 28 और 29 मई को होने वाली अहम बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
अगर छेना पोड़ा को जीआई टैग मिल जाता है, तो यह सिर्फ एक मिठाई की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि ओडिशा की पारंपरिक पाक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा। जीआई टैग मिलने के बाद यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ‘छेना पोड़ा’ नाम का उपयोग केवल नयागढ़ और आसपास के प्रमाणित उत्पादक ही कर सकेंगे। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और असली कारीगरों को उनका हक मिलेगा।
इस पहल के पीछे स्थानीय प्रयासों के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी अहम रही है। संबित पात्रा, जो पुरी से भाजपा सांसद हैं, उन्होंने इस पारंपरिक मिठाई को जीआई टैग दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर पहल की थी। उनके इस प्रयास को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया और प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया।
नयागढ़ जिला प्रशासन और स्थानीय संगठनों ने भी इस दिशा में लगातार काम किया है। वर्ष 2023 में तत्कालीन जिला कलेक्टर रवि साहू के नेतृत्व में एक ठोस रणनीति तैयार की गई थी। इसके बाद बेंगलुरु से आई विशेषज्ञ टीम ने नयागढ़ पहुंचकर विस्तृत सर्वे किया था, जिससे इस मिठाई की ऐतिहासिकता और विशिष्टता को प्रमाणित किया जा सके।
छेना पोड़ा न केवल एक स्वादिष्ट मिठाई है, बल्कि यह नयागढ़ की अर्थव्यवस्था का भी अहम हिस्सा है। यहां के हजारों परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं—चाहे वह दूध उत्पादन हो, मिठाई बनाना हो या फिर इसका व्यापार। जीआई टैग मिलने के बाद इस मिठाई की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और दुग्ध उत्पादकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे, जिससे यह मिठाई देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बनाएगी।
हाल ही में 11 अप्रैल को मनाए गए विश्व छेना पोड़ा दिवस ने इस मिठाई को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया था। सोशल मीडिया और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लोगों में इसके प्रति उत्सुकता बढ़ी है। ऐसे में जीआई टैग मिलने की खबर ने नयागढ़ और पूरे ओडिशा में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
कुल मिलाकर, छेना पोड़ा को जीआई टैग मिलना ओडिशा की खाद्य परंपरा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाएगा, बल्कि भारत की विविधता और स्वाद की पहचान को दुनिया के सामने और मजबूती से पेश करेगा।

