देश में डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की एक अहम योजना तेजी से किसानों और उद्यमियों के बीच लोकप्रिय हो रही है। National Livestock Mission (NLM) के तहत अब छोटे स्तर से लेकर बड़े डेयरी फार्म तक आसानी से शुरू किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि इस योजना की मदद से किसान 5 से लेकर 100 तक गाय-भैंस पाल सकते हैं या फिर पशु चारा उत्पादन का बिजनेस शुरू कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को दूध उत्पादन में दुनिया में अग्रणी बनाने में इस योजना की बड़ी भूमिका रही है। पिछले 10 वर्षों में देश में दुधारू पशुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह संख्या करीब 8 करोड़ से बढ़कर 12 करोड़ तक पहुंच गई है, जो इस मिशन की सफलता को दर्शाता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देशी नस्लों का संरक्षण और संवर्धन करना है। इसके तहत गाय-भैंस की बेहतर नस्ल विकसित करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) और उच्च गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही भेड़ और बकरी पालन को भी बढ़ावा देने के लिए आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
योजना के तहत राज्यों को वीर्य स्टेशन, प्रयोगशालाओं और कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध हो पाते हैं, जिससे दूध उत्पादन में सीधा फायदा होता है।
इसके अलावा, सरकार पशुपालन क्षेत्र में नवाचार और रिसर्च को भी बढ़ावा दे रही है। भेड़, बकरी, चारा उत्पादन और पशुधन बीमा से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए संस्थानों और विश्वविद्यालयों को सहयोग दिया जा रहा है। इससे इस सेक्टर में नई तकनीकों का विकास हो रहा है, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही हैं।
अगर आप पशुपालन नहीं करना चाहते, तो भी यह योजना आपके लिए फायदेमंद है। फीड और चारा उप-मिशन के तहत चारा उत्पादन और प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर सरकार 50 लाख रुपये तक की लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है। इसमें चारा ब्लॉक बनाना, घास की बेलिंग और साइलेज यूनिट शामिल हैं। इससे किसान कम लागत में बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, नेशनल लाइव स्टॉक मिशन न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाने का जरिया बन रहा है, बल्कि देश के डेयरी सेक्टर को भी मजबूत कर रहा है। अगर सही योजना और तकनीक के साथ इस योजना का लाभ उठाया जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

