मध्य प्रदेश में इस बार भले ही गेहूं की सरकारी खरीद तय समय से कुछ देर बाद शुरू हुई, लेकिन शुरुआत के कुछ ही दिनों में खरीद और उठान प्रक्रिया ने तेज गति पकड़ ली है। प्रदेश सरकार के मुताबिक रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के तहत अब सभी डिवीजनों में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी सुचारू रूप से जारी है और शुरुआती दौर में ही उल्लेखनीय आंकड़े सामने आए हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक प्रदेश के 42 हजार 689 किसानों से कुल 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि किसानों में सरकारी खरीदी को लेकर भरोसा बना हुआ है और वे बड़ी संख्या में अपनी उपज लेकर खरीद केंद्रों तक पहुंच रहे हैं।
सरकार ने केवल खरीदी पर ही नहीं, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। मंत्री के अनुसार अब तक 28 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जा चुकी है। इससे किसानों को अपनी उपज का भुगतान बिना किसी देरी के मिल रहा है, जो उनके लिए राहत की बात है।
वहीं, गेहूं बेचने के लिए किसानों में उत्साह भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अब तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों ने 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए हैं। सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 24 अप्रैल 2026 तय की है, जिससे किसानों को पर्याप्त समय मिल सके। प्रदेश में खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कुल 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां नियमित रूप से कार्यालयीन दिनों में खरीदी की जा रही है।
सरकार का दावा है कि खरीद केंद्रों पर किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्रों पर छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसके अलावा गुणवत्ता जांच के उपकरण, सफाई व्यवस्था, पंखे और छननी जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है। इस तरह किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल रहा है, जो उन्हें बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक साबित हो रहा है।
कुल मिलाकर, शुरुआती देरी के बावजूद मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी अब गति पकड़ चुकी है और सरकार का फोकस खरीदी के साथ-साथ पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने पर है।

