ग्रामीण रोजगार और आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन और “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” (वीबी-जी राम जी) की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि मनरेगा के तहत कार्यों का जमीनी स्तर पर बिना किसी बाधा के निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर जरूरतमंद श्रमिक को समय पर रोजगार मिलना चाहिए और मजदूरी का भुगतान भी तय समय सीमा के भीतर किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर पर्याप्त संख्या में कार्य उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी श्रमिक को काम के लिए इंतजार न करना पड़े।
श्री चौहान ने कार्यस्थलों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीण परिवारों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जॉब कार्ड जारी किए जाएं और इच्छुक परिवारों को शीघ्र रोजगार से जोड़ा जाए। उनका स्पष्ट संदेश था कि कोई भी इच्छुक परिवार रोजगार से वंचित न रहे, इसके लिए सभी स्तरों पर गंभीरता से प्रयास किए जाएं।
सरकार की ओर से मनरेगा के तहत वित्तीय संसाधनों को भी मजबूत किया जा रहा है। मंत्री ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली किस्त के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मजदूरी भुगतान के लिए ₹17,744.19 करोड़ की राशि जारी की जा रही है। उन्होंने राज्यों से अपेक्षा की कि इस धनराशि का उपयोग पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि श्रमिकों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। इसके साथ ही सामग्री और प्रशासनिक मद में भी पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है।
बैठक में मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान समय एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल है। एक ओर जहां मनरेगा के तहत रोजगार की निरंतरता बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर विकसित भारत–जी राम जी मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी तैयारियों को समय पर पूरा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
“विकसित भारत–जी राम जी” को लेकर उन्होंने बताया कि यह एक दूरदर्शी पहल है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
बैठक के अंत में श्री चौहान ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने सुझाव साझा करें, ताकि इस मिशन को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन में कमी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। मनरेगा और वीबी-जी राम जी जैसे कार्यक्रमों के समन्वित क्रियान्वयन से देश के समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

