दिल्ली सरकार ने रबी सीजन में गेहूं उगाने वाले किसानों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद के नियमों में अहम ढील दी है। इस फैसले से उन किसानों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनकी फसल बारिश और ओलावृष्टि के कारण खराब हो गई थी और जिन्हें अब तक कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी थी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को जानकारी देते हुए कहा कि इस साल असामान्य मौसम के चलते गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। कई इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे दानों की चमक और गुणवत्ता कम हो गई। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिल सके और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
क्या बदले हैं नियम?
नए नियमों के तहत अब 70 प्रतिशत तक चमक खो चुकी गेहूं की फसल भी MSP पर खरीदी जाएगी। इसके अलावा, 15 प्रतिशत तक सिकुड़े और टूटे हुए दाने वाली गेहूं को भी खरीद केंद्रों पर स्वीकार किया जाएगा। पहले इस तरह की गुणवत्ता वाले गेहूं को खरीद से बाहर रखा जाता था, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता था और उन्हें बाजार में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती थी।
केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
दिल्ली सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए विशेष छूट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत दिल्ली के सभी जिलों में गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों को लचीला बनाया गया है। इससे हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो खराब मौसम के कारण अपनी उपज को लेकर चिंतित थे।
पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ढीले नियमों के तहत खरीदी गई गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखा जाएगा। इसके लिए अलग रिकॉर्ड और हिसाब-किताब बनाए रखा जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस गेहूं का उपयोग जल्दी किया जाएगा और इसे लंबे समय तक भंडारण में नहीं रखा जाएगा।
यह कदम न केवल किसानों के हित में है, बल्कि यह सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है कि वह प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के साथ खड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे भविष्य में भी खेती के प्रति भरोसा बनाए रख सकेंगे।
