देश में चाय उत्पादन इन दिनों दबाव में नजर आ रहा है। मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, कुल चाय उत्पादन घटकर 66.86 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 67.85 मिलियन किलोग्राम था। यानी सालाना आधार पर करीब 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मौसम में हो रहे लगातार बदलाव और अस्थिर जलवायु को माना जा रहा है, जिसका असर खासकर उत्तर भारत के चाय बागानों पर साफ दिखाई दे रहा है।
उत्तर भारत में चाय उत्पादन की स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। मार्च महीने में यहां उत्पादन 5.8 फीसदी गिरकर 49.05 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल 52.08 मिलियन किलोग्राम था। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित बारिश, तापमान में उतार-चढ़ाव और ठंड के लंबे असर ने चाय की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इससे उत्पादन चक्र प्रभावित हुआ है और बागानों की उत्पादकता कम हुई है।
इस गिरावट में सबसे ज्यादा असर असम पर पड़ा है, जो देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहां चाय उत्पादन में करीब 39 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और कुल उत्पादन घटकर 17.38 मिलियन किलोग्राम रह गया। असम घाटी क्षेत्र में उत्पादन 16.77 मिलियन किलोग्राम तक सिमट गया, जबकि कछार क्षेत्र में भी हल्की गिरावट के साथ उत्पादन 0.61 मिलियन किलोग्राम रहा। यह गिरावट न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के कुल उत्पादन आंकड़ों को प्रभावित कर रही है।
हालांकि, पश्चिम बंगाल से कुछ राहत भरी खबर सामने आई है। यहां मार्च महीने में चाय उत्पादन में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। राज्य का कुल उत्पादन 37 फीसदी बढ़कर 29.96 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया। डुआर्स, तराई और दार्जिलिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डुआर्स में 16.35 मिलियन किलोग्राम, तराई में 13.44 मिलियन किलोग्राम और दार्जिलिंग में 0.17 मिलियन किलोग्राम उत्पादन हुआ है। इस बढ़ोतरी ने देश के कुल उत्पादन में आई गिरावट को कुछ हद तक संतुलित किया है।
दक्षिण भारत में भी चाय उत्पादन ने सकारात्मक प्रदर्शन किया है। मार्च में यहां उत्पादन करीब 13 फीसदी बढ़कर 17.81 मिलियन किलोग्राम हो गया। तमिलनाडु और केरल में उत्पादन में अच्छी बढ़त देखने को मिली है। तमिलनाडु में 12.85 मिलियन किलोग्राम और केरल में 4.59 मिलियन किलोग्राम उत्पादन दर्ज किया गया है। हालांकि, कर्नाटक में हल्की गिरावट जरूर देखने को मिली है, लेकिन इसका कुल उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
कुल मिलाकर, देश में चाय उत्पादन पर मौसम का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। जहां एक ओर उत्तर भारत खासकर असम में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की बेहतर स्थिति कुछ राहत जरूर दे रही है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और कृषि प्रबंधन पर ही यह निर्भर करेगा कि चाय उत्पादन में सुधार होता है या नहीं।

