मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (UPPCL) ने भले ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला लिया हो, लेकिन इस पूरे मामले में उठ रहे सवालों का जवाब देने में प्रबंधन की ढिलाई अब उस पर भारी पड़ती दिख रही है। विद्युत नियामक आयोग ने तय समयसीमा के भीतर जवाब न देने को गंभीरता से लेते हुए अब कारपोरेशन प्रबंधन को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
दरअसल, स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच उपभोक्ता परिषद ने पिछले महीने आयोग में एक याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने 16 अप्रैल को यूपीपीसीएल प्रबंधन को 10 दिन के भीतर जवाब देने का आदेश दिया था। नियमानुसार यह जवाब 26 अप्रैल तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी प्रबंधन ने कोई उत्तर दाखिल नहीं किया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 10 दिन की समयसीमा पार होने के बाद भी 20 दिन तक जवाब नहीं दिया गया। इसे आयोग ने गंभीर लापरवाही मानते हुए अब कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के इस नए निर्देश के बाद पावर कारपोरेशन के अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है और जल्द से जल्द जवाब तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो आयोग प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। इसमें जुर्माना लगाने से लेकर अन्य प्रशासनिक कदम भी शामिल हो सकते हैं। यह कार्रवाई न केवल प्रबंधन के लिए चुनौती होगी बल्कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर सख्त संदेश भी देगी।
इधर, उपभोक्ता परिषद ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर लिया है। परिषद का कहना है कि केवल मौखिक या आंशिक निर्णय पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए स्पष्ट और लिखित कार्यालय आदेश जारी किया जाना चाहिए। परिषद ने यह भी मांग की है कि जिन उपभोक्ताओं को पहले ही इस व्यवस्था से जोड़ा गया है, उन्हें राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
गौरतलब है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर प्रदेश भर में उपभोक्ताओं के बीच असंतोष का माहौल बना हुआ था। कई उपभोक्ताओं ने बिलिंग में गड़बड़ी, रिचार्ज संबंधी समस्याएं और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए थे। इन शिकायतों के बाद सरकार और नियामक आयोग दोनों ने मामले को गंभीरता से लिया।
अब सभी की निगाहें आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि पावर कारपोरेशन समय रहते संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, तो यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

