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green revolution krishonnati yojana: किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने वाली बड़ी योजना

Green Revolution Krishonnati Yojana: A major scheme to increase farmers' income and promote modern farming

Fiza by Fiza
May 18, 2026
in योजना
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green revolution krishonnati yojana: किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने वाली बड़ी योजना

green revolution krishonnati yojana

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भारत में खेती को आधुनिक बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार नई योजनाएं चला रही है। इन्हीं महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है green revolution krishonnati yojana। यह योजना किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधा, कृषि मशीनरी और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है।

सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाना भी है। यही कारण है कि इस योजना के तहत कई कृषि मिशनों और सब-स्कीम्स को एक साथ जोड़कर किसानों को व्यापक लाभ देने की कोशिश की गई है।

क्या है हरित क्रांति – कृषोन्नति योजना?

हरित क्रांति – कृषोन्नति योजना केंद्र सरकार की एक umbrella scheme यानी छत्र योजना है, जिसके तहत कई कृषि योजनाओं को जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाना, फसल उत्पादन बढ़ाना और खेती की लागत कम करना है।

इस योजना की शुरुआत वर्ष 2015-16 के आसपास कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके अंतर्गत मिट्टी स्वास्थ्य, सिंचाई, कृषि मशीनीकरण, जैविक खेती, फसल सुरक्षा और कृषि विस्तार जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।

योजना शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत लंबे समय तक खाद्यान्न संकट और कम उत्पादकता जैसी समस्याओं से जूझता रहा। खेती में पारंपरिक तरीकों के कारण किसानों की आय सीमित थी। दूसरी ओर बढ़ती आबादी के लिए अधिक खाद्यान्न उत्पादन की जरूरत थी।

ऐसे समय में सरकार ने महसूस किया कि खेती में नई तकनीकों, HYV बीज, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई और कृषि मशीनरी का उपयोग बढ़ाना जरूरी है। इसी सोच ने हरित क्रांति और बाद में कृषोन्नति योजना जैसी योजनाओं को जन्म दिया।

योजना के मुख्य उद्देश्य

हरित क्रांति – कृषोन्नति योजना के कई बड़े उद्देश्य हैं:

  • किसानों की आय बढ़ाना
  • खेती की लागत कम करना
  • फसल उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाना
  • पानी और उर्वरकों का संतुलित उपयोग बढ़ाना
  • आधुनिक कृषि मशीनरी को बढ़ावा देना
  • जैविक और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन देना
  • मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना
  • छोटे और सीमांत किसानों तक तकनीक पहुंचाना

योजना के प्रमुख घटक

इस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मिशन शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:

1. मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (Soil Health Management)

मिट्टी की जांच कर किसानों को Soil Health Card दिया जाता है। इससे किसान जान पाते हैं कि खेत में कौन-सा पोषक तत्व कम है और किस उर्वरक की जरूरत है।

2. राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं प्रौद्योगिकी मिशन

इस मिशन के तहत किसानों को नई खेती तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाती है। कृषि वैज्ञानिक गांवों तक पहुंचकर जानकारी देते हैं।

3. कृषि मशीनीकरण

ट्रैक्टर, रोटावेटर, रीपर, सीड ड्रिल और अन्य मशीनों पर सब्सिडी दी जाती है। इससे खेती आसान और तेज होती है।

4. सतत कृषि मिशन

कम पानी में अधिक उत्पादन और जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है।

5. जैविक खेती को बढ़ावा

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जाता है।

6. सिंचाई सुविधाएं

ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों पर सब्सिडी दी जाती है।

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठाएं?

किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने जिले के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या CSC सेंटर से संपर्क कर सकते हैं।

सरकार की कई योजनाएं अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। किसान अपने राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

योजना की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

हर राज्य में आवेदन प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  1. कृषि विभाग की वेबसाइट या CSC सेंटर पर जाएं
  2. किसान पंजीकरण कराएं
  3. आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें
  4. भूमि संबंधी जानकारी भरें
  5. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें
  6. योजना का चयन करें
  7. आवेदन जमा करें

सत्यापन के बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ दिया जाता है।

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

किसानों के पास निम्न दस्तावेज होने जरूरी हैं:

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर
  • भूमि रिकॉर्ड / खतौनी
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • किसान पंजीकरण नंबर

किन राज्यों में मिलता है योजना का लाभ?

यह केंद्र सरकार की योजना है, इसलिए लगभग सभी राज्यों के किसान इसका लाभ उठा सकते हैं।

मुख्य राज्यों में शामिल हैं:

  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • बिहार
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • पश्चिम बंगाल
  • तमिलनाडु
  • आंध्र प्रदेश
  • तेलंगाना
  • कर्नाटक
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के माध्यम से लाखों किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंची है। सरकार ने कृषि मशीनीकरण, माइक्रो इरिगेशन, Soil Health Card और जैविक खेती पर बड़े स्तर पर काम किया है।

कई राज्यों में किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है और खेती की लागत में कमी आई है। विशेष रूप से ड्रिप सिंचाई, आधुनिक मशीनों और मिट्टी परीक्षण जैसी सुविधाओं ने किसानों को सीधा फायदा पहुंचाया है।

छोटे किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?

भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे किसानों के पास महंगी मशीनें खरीदने या आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होता। यह योजना उन्हें सब्सिडी और सरकारी सहायता देकर खेती को आसान और लाभकारी बनाने में मदद करती है।

कृषि मशीनीकरण से क्या बदलाव आया?

आज कई किसान मजदूरों की कमी से परेशान रहते हैं। ऐसे में कृषि मशीनें खेती को तेज और आसान बनाती हैं। रीपर, सीड ड्रिल, मल्चर और ट्रैक्टर जैसी मशीनों के उपयोग से:

  • समय की बचत होती है
  • मजदूरी खर्च कम होता है
  • उत्पादन बढ़ता है
  • फसल नुकसान कम होता है

सिंचाई तकनीक से बढ़ा फायदा

कम पानी में अधिक उत्पादन आज खेती की सबसे बड़ी जरूरत है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों के कारण:

  • पानी की बचत होती है
  • उर्वरकों का सही उपयोग होता है
  • फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है
  • बिजली खर्च कम होता है

जैविक खेती को भी मिल रहा बढ़ावा

कई किसान अब रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

हरित क्रांति – कृषोन्नति योजना के तहत जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक खेती तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।

महिलाओं को भी मिल रहा लाभ

आज बड़ी संख्या में महिला किसान भी इस योजना का लाभ उठा रही हैं।

महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि उपकरण, प्रशिक्षण और जैविक खेती से जुड़ी सहायता दी जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ रही है।

किसानों के सामने क्या चुनौतियां हैं?

हालांकि योजना काफी लाभकारी है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं:

  • कई किसानों को जानकारी नहीं मिल पाती
  • आवेदन प्रक्रिया कई जगह जटिल है
  • छोटे किसानों तक मशीनें समय पर नहीं पहुंचती
  • कुछ राज्यों में सब्सिडी भुगतान में देरी होती है

डिजिटल खेती की ओर बढ़ता भारत

अब कृषि क्षेत्र तेजी से डिजिटल हो रहा है। किसान मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से:

  • मौसम की जानकारी
  • मंडी भाव
  • कृषि सलाह
  • योजना आवेदन
  • सब्सिडी स्थिति

जैसी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

भविष्य में योजना का क्या असर हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह योजना भारतीय खेती को और अधिक आधुनिक बना सकती है।

यदि किसानों तक सही समय पर तकनीक और सहायता पहुंचे, तो:

  • उत्पादन बढ़ेगा
  • खेती की लागत घटेगी
  • किसानों की आय में सुधार होगा
  • पानी और मिट्टी संरक्षण बेहतर होगा

निष्कर्ष

हरित क्रांति – कृषोन्नति योजना भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने का भी काम कर रही है।

मशीनीकरण, सिंचाई, मिट्टी स्वास्थ्य और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में इसका प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है। यदि किसान सही जानकारी और तकनीकों का उपयोग करें, तो यह योजना खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकती है।

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